दैनिक जागरण लुधियाना यूनिट के चार दर्जन से अधिक कर्मचारियों ने भी ठोंकी तालहमें क्यों चाहिए मजीठिया भाग-3A: इकरारनामा वर्किंग जर्नलिस्टअब ललित मोदी ने दैनिक भास्कर समूह को भी लपेटा भारतीय अखबार ही गलती करते हैं ऐसा नहीं है, न्यूयॉर्क टाइम से भी ये गलती हुई हैदैनिक जागरण, इलाहाबाद के नये जनरल मैनेजर का तुगलकी फरमानभाजपा के एमजे अकबर राज्यसभा उपचुनाव जीतेनेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया की सफाईसुब्रत राय के खिलाफ वारंट पर रोक की अवधि बढ़ीजागरण के जिंदा/हिन्दुस्तान के मुर्दा पत्रकारदैनिक जागरण्‍ा, नोएडा में करो या मरो का आहवानफोटो जर्नलिस्ट तुषार राय दैनिक भास्कर संग जुडेदैनिक जागरण उदय नहीं अस्त होने को आतुरदैनिक जागरण धनबाद में तैनात होंगे विष्णु त्रिपाठी के खास सिपलाहकारजागरण में सांकेतिक हड़ताल का आज दूसरा दिनदैनिक जागरण में कर्मचारियों की काली पट्टी से प्रबंधन की नींद उड़ी सीईओ राहुल यादव को निकाला गयाअमर उजाला, देहरादून से पुरुषोतम कुमार का कानपुर स्थानांतरण, होंगे कांपैक्ट के प्रभारीदैनिक जागरण में सांकेतिक हड़ताल शुरू, कर्मचारियों ने बांधी काली पट्टी वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र आर्य अब हमारे बीच नहीं रहेपत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’टीम इंडिया का मजाक बनाने वाले अखबार ने जताया खेदहमें क्यों चाहिए मजीठिया भाग-3, पद: चीफ सब! वेतन- 95000!!मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में एक जुलाई से जन सुनवाईदैनिक भास्कर, होशंगाबाद के रिपोर्टर ने प्राचार्य से क्या कहा, सुनिए पूरा टेप दैनिक जागरण, धर्मशाला में प्रताड़ना से दुखी रिपोर्टर,सवांद सहयाेगियों का इस्तीफा जागरण में भारी फेरबदल की तैयारी, कई को दिखाए जाएंगे बाहर के रास्तेहोशंगाबाद भास्कर के रिपोर्टर ने संपादक के नाम पर मांगी LEDनिरुपमा पाठक के साथ इंसाफ नहीं हुआहमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहींदैनिक जागरण में हड़ताल की सूचना पर मीडिया घराने बनाने लगे नई रणनीतिप्रसून शुक्ला ETV में सलाहकार संपादक बनेये देखिए बांग्लादेशी अखबार, टीम इंडिया को कर दिया गंजामध्य प्रदेश में अब पत्रकार पर जानलेवा हमलापत्रकार निरुपमा की मौत के मामले में प्रियभांशु निर्दोष करारदुष्कर्म के आरोपों में फंसे निम्स के चेयरमैन बीएस तोमर मामले में पूछताछ को रांची पहुंची राजस्थाजनवरी से टूट जाएगाी सीएनएन और टीवी 18 की दोस्तीVishwas lodges complaint against TV news channelबक्सर के उमाशंकर पांडेय को किसान चैनल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अब हर साल होगा पत्रकारों का पुलिस वेरिफिकेशनकाठमांडू में वयोवृद्ध पत्रकार रामाशीष का निधनगाजियाबाद में पत्रकार और उसके परिवार पर हमले के आरोपी तीन लोग गिरफ्तार नेट न्यूट्रीलिटी’ का अनसुलझा सवालदैनिक जागरण मेरठ में भगदड, कुछ तो चले गए, कुछ जाने को तैयारउत्तर प्रदेश में एक और पत्रकार पर जान लेवा हमलाअब पत्रकारों को कार्ड देने के पहले होगी पुलिसिया जांचमुंबई में एक साप्ताहिक के संपादक को पुलिस ने गिरफ्तार कियासंदीप हत्याकाण्ड में क्राइम न्यूज ब्यूरो इण्डिया का डायेक्टर ब्रजेश गिरफ्तार दैनिक जागरण, अलीगढ़ में प्रताड़ना से दुखी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का इस्तीफा हमें क्यों चाहिए मजीठिया भाग-2, जानने के लिए यहां क्लिक करें:- Deccan Chronicle chief photographer attacked by UDF supporters

पत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’ ...

पत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’ ...
अगस्त 2014 में मध्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांपुर में एक रहस्यमय पोस्टर पर सबकी निगाह पड़ी थी। गहरे बैंगनी पृष्ठभूमि के इस ‘वांछित’ पोस्टर में कथित के बारे में गंभीर
ईएनएस की रिपोर्ट। अगस्त 2014 में मध्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांपुर में एक रहस्यमय पोस्टर पर सबकी निगाह पड़ी थी। गहरे बैंगनी पृष्ठभूमि के इस ‘वांछित’ पोस्टर में कथित के बारे में गंभीर आरोप थे। पोस्टर में उसे उगाही, ब्लैकमेल करने वाला अपराधी तत्व बताया गया था। इसमें कहा गया था कि उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। पोस्टर में कहा गया कि लोग इस शातिर शख्स ...

नेट न्यूट्रीलिटी’ का अनसुलझा सवाल ...

नेट न्यूट्रीलिटी’ का अनसुलझा सवाल ...
-मनोज कुमार। संचार माध्यमों के विस्तार के साथ ही इंटरनेट ने एक ऐसी दुनिया क्रियेट की जिसके चलते विश्व-ग्राम की अवधारणा की स्थापना हुई। बहुसंख्या में आज भी लोग इंटरनेट फ्रेंडली भले ही न हुए हों लेकिन ज्यादतर काम इंटरनेट के माध्यम से होने लगा है। बाजार ने जब देखा कि इंटरनेट के बिना अब समाज का काम नहीं चलना है तो उसने
-मनोज कुमार। संचार माध्यमों के विस्तार के साथ ही इंटरनेट ने एक ऐसी दुनिया क्रियेट की जिसके चलते विश्व-ग्राम की अवधारणा की स्थापना हुई। बहुसंख्या में आज भी लोग इंटरनेट फ्रेंडली भले ही न हुए हों लेकिन ज्यादतर काम इंटरनेट के माध्यम से होने लगा है। बाजार ने जब देखा कि इंटरनेट के बिना अब समाज का काम नहीं चलना है तो उसने अपने पंजे फैलाना आरंभ कर दिया ...

बातें मीडिया की-17 इंटर्नशिप को बनाएं सीढ़ी ...

बातें मीडिया की-17 इंटर्नशिप को बनाएं सीढ़ी ...
जो युवा पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर इस बात से दो-चार होते हैं कि आखिर इस पेशे में एंट्री कहां से पाई जाए। वैसे, निजी संस्थान तो यही सपना दिखाते हैं कि उनके यहां
Sushil Upadhyay । जो युवा पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर इस बात से दो-चार होते हैं कि आखिर इस पेशे में एंट्री कहां से पाई जाए। वैसे, निजी संस्थान तो यही सपना दिखाते हैं कि उनके यहां मीडिया स्टूडैंट्स के लिए कैंपस सेलेक्शन होता है, लेकिन ये बात आंशिक तौर पर ही सच है। अपवाद छोड़ दे ंतो शायद ही कोई कंपनी किसी मीडिया संस्थान में जा ...

26 जून पर विशेष - … तो अखिलेश यादव अपराधी हैं ...

26 जून पर विशेष - … तो अखिलेश यादव अपराधी हैं  ...
लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को दस हजार रुपए माहवार पेंशन और सम्‍मान देना अपराध है तो मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव अपराधी हैं और मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि वह ताउम्र यह अपराध करते रहें। मेरी इच्‍छा तो यह
Dhirendra Nath Srivastva के फेसबुक वाल से। - लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को दस हजार रुपए माहवार पेंशन और सम्‍मान देना अपराध है तो मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव अपराधी हैं और मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि वह ताउम्र यह अपराध करते रहें। मेरी इच्‍छा तो यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस अपराध में शामिल होकर इस पेंशन और सम्‍मान राष्‍ट्रीय स्‍वरूप दे ...

जनमत ही मीडिया का एकमात्र हथियार ...

जनमत ही मीडिया का एकमात्र हथियार ...
एनके सिंह! मानव और पशु में एक मूल अंतर है. ईश्वर ने मानव में भावना-जनित करुणा और बुद्धि-जनित नैतिकता दी है जो पशु में नहीं होती. नतीजा यह होता
एनके सिंह! मानव और पशु में एक मूल अंतर है. ईश्वर ने मानव में भावना-जनित करुणा और बुद्धि-जनित नैतिकता दी है जो पशु में नहीं होती. नतीजा यह होता है कि कोई करुणा के अतिरेक में चैतन्य महाप्रभु बनता है तो कोई गाँधी बन कर सत्य के प्रति आग्रह जीवन का साध्य मानता है. मानव में ये दोनों पक्ष जितना हीं कम होते जाते हैं वह उतना हीं पशुवत होता जाता है. और जब ...

बातें मीडिया की-15 आॅनलाइन मीडिया का ‘क्लास-कैरेक्टर’ ...

बातें मीडिया की-15 आॅनलाइन मीडिया का ‘क्लास-कैरेक्टर’ ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। आॅनलाइन मीडिया का एक विशिष्ट वर्गीय चरित्र है। यूं तो पूरा आधुनिक मीडिया ही वर्गीय चरित्र पर आधारित है, लेकिन इस पैमाने पर आॅनलाइन मीडिया
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। आॅनलाइन मीडिया का एक विशिष्ट वर्गीय चरित्र है। यूं तो पूरा आधुनिक मीडिया ही वर्गीय चरित्र पर आधारित है, लेकिन इस पैमाने पर आॅनलाइन मीडिया अधिक और व्यापक चिंता पैदा करता हैं। न्यूनतम बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के बिना आॅनलाइन मीडिया के उपयोग के बारे में सोचा नहीं जा सकता। इस ढांचे को कितना भी कम करके देखें तो भी एक ...

पत्रकारों की शहादत, बेशर्म सियासत ...

पत्रकारों की शहादत, बेशर्म सियासत  ...
मुकुंद ! सारी दुनिया में पत्रकारों के सिर पर 24 घंटे मौत का साया मंडराता रहता है। कलम पर हमले जारी हैं। भारत के कई राज्यों में स्थिति बेहद संवेदनशील
मुकुंद ! सारी दुनिया में पत्रकारों के सिर पर 24 घंटे मौत का साया मंडराता रहता है। कलम पर हमले जारी हैं। भारत के कई राज्यों में स्थिति बेहद संवेदनशील है। खासकर उत्तर प्रदेश में पत्रकार बेखौफ होकर काम नहीं कर पा रहे हैं। सत्ता और कानून के पहरेदारों (पुलिस) की संगीने हर पल कलम का पीछा कर रही हैं। बात अस्सी के दशक से शुरू करते हैं। मैं ग्रुजुएशन करके ...

क्या राज्यमंत्री को बर्खास्त करेंगे अखिलेश ...

क्या राज्यमंत्री को बर्खास्त करेंगे अखिलेश  ...
जी हां, जांबाज शहीद पत्रकार जगेन्द्र मामले में आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा व घूसखोर इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय के खिलाफ रपट दर्ज हो जाने के बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो अखिलेश सरकार
जी हां, जांबाज शहीद पत्रकार जगेन्द्र मामले में आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा व घूसखोर इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय के खिलाफ रपट दर्ज हो जाने के बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो अखिलेश सरकार पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है। क्या ऐसे ही मंत्रियो, बाहुबलियों, श्रीप्रकाश राय, संजयनाथ तिवारी जैसे लूटेरा व घुसखोर इंस्पेक्टर, भ्रष्ट आईएएस अमृत त्रि ...

किस्से अखबारों के-48 भाषा की ऐसी की तैसी! ...

किस्से अखबारों के-48 भाषा की ऐसी की तैसी! ...
Sushil Upadhyay। भाषा किसी भी अखबार की जान होती है और शैली उसका सौंदर्य। लेकिन, देहरादून से प्रकाशित होने वाले नामी, प्रतिष्ठित, पहुंचवाले और सरोकार वाले अखबारों को देखकर
Sushil Upadhyay। भाषा किसी भी अखबार की जान होती है और शैली उसका सौंदर्य। लेकिन, देहरादून से प्रकाशित होने वाले नामी, प्रतिष्ठित, पहुंचवाले और सरोकार वाले अखबारों को देखकर लगता है कि इनका सौंदर्य लुट गया और जान भी निकल गई है। एक कागजनुमा मृत देह सुबह-सवेरे लोगों के घरों तक पहुंचाई जाती है। जिन्हें बरसों पुरानी लत लगी हुई है वे घंटा-दो घंटा इस देह को ...

किस्से अखबारों के-47 पारुल की शिकायत और मीडिया में लड़कियां ...

किस्से अखबारों के-47 पारुल की शिकायत और मीडिया में लड़कियां ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पिछले दिनों एक पोस्ट में कुछ ऐसे दोस्तों का जिक्र किया था, जिन्होंने दस साल या उससे भी कम समय में ट्रेनी से संपादक तक का सफर पूरा किया है।
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पिछले दिनों एक पोस्ट में कुछ ऐसे दोस्तों का जिक्र किया था, जिन्होंने दस साल या उससे भी कम समय में ट्रेनी से संपादक तक का सफर पूरा किया है। संयोग ऐसा रहा है कि इस पोस्ट के सभी नाम पुरुष थे। इस पर मेरी पूर्व सहकर्मी और मेरे गुरु प्रो. कमलकांत बुधकर की पुत्रवधु पारुल बुधकर का संदेश मिला। उनकी आपत्ति है कि मैं केवल पुर ...

किस्से अखबारों के-46 सफलता का कोई नियम नहीं! ...

किस्से अखबारों के-46 सफलता का कोई नियम नहीं! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में सफलता और विफलता, बहुत बड़ी हद तक संयोगों पर निर्भर करती है। जिसके जीवन में संयोग सध जाएं, उसे सफलता हासिल हो जाती है
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में सफलता और विफलता, बहुत बड़ी हद तक संयोगों पर निर्भर करती है। जिसके जीवन में संयोग सध जाएं, उसे सफलता हासिल हो जाती है और जो अनुकूल संयोगों की श्रंखला से वंचित रह जाए, उसकी गिनती विफल लोगों में होने लगती है। मोटे तौर पर तो यही कहा जाता है कि मेधावी, योग्य, दक्ष, परिश्रमी और सुपात्र व्यक्ति कभी विफल ...

पत्रकारिता की साख पर बट्टा लगा रहे है दलाल पत्रकार ...

पत्रकारिता की साख पर बट्टा लगा रहे है दलाल पत्रकार  ...
सुरेश गांधी। बात उन दिनों की है जब समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियां चरम पर थी। ब्रतानियां हुकूमत की लाठियां हिन्दुस्तानियों पर कहर बनकर टूट रही थी। बहु-बेटियों की
पत्रकारिता दिवस पर विशेष हर कोई अखबार में काम तो करना चाहता है लेकिन उसके पीछे उस व्यक्ति के कई कारण होते हैं। यानी आज पत्रकारिता बुरे दौर से गुजरने पर मजबूर हैं। अरे अब तो वह दौर आ चुका है कि पैसे के लिए वे अपने ही किसी साथी की बलि बहुत ही संयत भाव से चढा सकते हैं। माना कि पत्रकारिता अब मिशन नहीं, यह एक प्रोफेशन और बिजनेस हो चला है। मगर क्या हर ...

अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर, पढ़िए कैसे ...

अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर,  पढ़िए कैसे  ...
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई। 42 साल तक कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग की पिछले पखवाड़े हुई मौत के बाद यह सवाल बार- बार उठ रहा था कि उसका कातिल सोहनलाल वाल्मिकी आखिर है
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई। 42 साल तक कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग की पिछले पखवाड़े हुई मौत के बाद यह सवाल बार- बार उठ रहा था कि उसका कातिल सोहनलाल वाल्मिकी आखिर है कहां ? क्या वह जिंदा भी है या नहीं ? खुद पुलिस को सोहनलाल के जिंदा होने पर शक था, पर जो काम पुलिस नहीं कर पाई, वह काम किया एक मराठी अखबार के प्रमुख संवाददाता ज्ञानेश चव्हाण ने खुद सोहनलाल क ...

किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक ...

किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक ...
पत्रकारिता की कक्षा में छात्र-छात्राएं अक्सर सफलता के गुर पूछते हैं, वे जानना चाहते हैं कि कौन-से रास्ते से चलकर वे परचम लहरा सकते हैं। उनकी इस जिज्ञासा का जवाब देना बेहद
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की कक्षा में छात्र-छात्राएं अक्सर सफलता के गुर पूछते हैं, वे जानना चाहते हैं कि कौन-से रास्ते से चलकर वे परचम लहरा सकते हैं। उनकी इस जिज्ञासा का जवाब देना बेहद कठिन है। मैं, अक्सर उनके सामने कुछ उदाहरण रखता हूं। ये उदाहरण इतिहास के किन्हीं महान पत्रकारों के नहीं हैं, वरन मेरे समकालीन उन लोगों के हैं ...

मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ...

मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ...
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। वो सच में परिवर्तन के दिन थे...मेरे निजी जीवन के परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों ने भी दस्तक देना शुरु कर दिया था।अब यह बात
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। वो सच में परिवर्तन के दिन थे...मेरे निजी जीवन के परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों ने भी दस्तक देना शुरु कर दिया था।अब यह बात और है कि मेरी ही तरह बाकी लोग भी इन परिवर्तनों को नजर अंदाज कर रहे थे या इनकी गंभीरता को हल्के से ले रहे थे।यही वह समय था जब नरसिम्हा राव के नेतृत्व में मनमोहन सिंह देश की आर्थि ...

हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आत ...

हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आत ...
Nadim S. Akhter के फेसबुक वाल से। बुरा मत मानिएगा लेकिन भारत में हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है. लगता है कि -पत्रकार- का पत्र कहीं
Nadim S. Akhter के फेसबुक वाल से। बुरा मत मानिएगा लेकिन भारत में हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है. लगता है कि -पत्रकार- का पत्र कहीं दूर छूट गया है, सिर्फ -कार- ही बची है. कोई चैनल बेशर्मी से भारत में गर्मी के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरता है (कम पढ़े-लिखे लोगों के मन में पाकिस्तान के खिलाफ भावनाएं भ ...

किस्से अखबारों के-44 मीडिया अध्ययन के लिए ‘केस-स्टडी’ है राज ठाकरे ...

किस्से अखबारों के-44 मीडिया अध्ययन के लिए ‘केस-स्टडी’ है राज ठाकरे ...
Sushil Upadhyay। दिल्ली के पत्रकारों की दुनिया एकदम अलग है। छोटी जगहों पर पत्रकारिता करते हुए लगता है कि दिल्ली में बैठे तमाम पत्रकार महामानव हैं, उनमें नारद, हनुमान,
Sushil Upadhyay। दिल्ली के पत्रकारों की दुनिया एकदम अलग है। छोटी जगहों पर पत्रकारिता करते हुए लगता है कि दिल्ली में बैठे तमाम पत्रकार महामानव हैं, उनमें नारद, हनुमान, व्यास और महाभारत के संजय, सभी की खूबी समाई हुई है। लेकिन, जब आप उनके साथ काम करते हैं या पत्रकारिता से संबंधित कोई मदद मांगते हैं तो वे एकदम भिन्न किस्म के जीव नजर आते हैं। इन जीवों क ...

ताक में पत्रकारिता, तकनीकी का दौर ...

ताक में पत्रकारिता, तकनीकी का दौर ...
मनोज कुमार!nसाल 1826, माह मई की 30 तारीख को ‘उदंत मार्तंड’ समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था. पराधीन
30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष मनोज कुमार!साल 1826, माह मई की 30 तारीख को ‘उदंत मार्तंड’ समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था. पराधीन भारत को स्वराज्य दिलाने की गुरुत्तर जवाबदारी तब पत्रकारिता के कांधे पर थी. कहना न होगा कि हिन्दी पत्रकारिता ने न केवल अपनी जवाबदारी पूरी निष्ठा के साथ पूर्ण किया, अपितु भविष्य ...

किस्से अखबारों के-42 योग्यता का सवाल और डिग्री की जरूरत ...

किस्से अखबारों के-42 योग्यता का सवाल और डिग्री की जरूरत ...
Sushil Upadhyay ! पत्रकारिता के साथ बरसों से एक सवाल जुड़ा हुआ है कि किसी पत्रकार की योग्यता क्या होनी चाहिए ? इसके साथ दूसरा सवाल यह है कि इस
Sushil Upadhyay ! पत्रकारिता के साथ बरसों से एक सवाल जुड़ा हुआ है कि किसी पत्रकार की योग्यता क्या होनी चाहिए ? इसके साथ दूसरा सवाल यह है कि इस योग्यता का निर्धारण कैसे हो ? और क्या किसी ऐसी संस्था या मैकेनिज्म की जरूरत है जो पत्रकारों की योग्यता को जांच-परख सके ? साल, 1993 में जब मैं नवभारत, भोपाल में काम सीखने गया तो यह बात पहले दिन ही समझ में आ ...

किस्से अखबारों के-42 माया, मोदी और मीडिया ...

किस्से अखबारों के-42 माया, मोदी और मीडिया ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। साल 2014 की खबरों को मानक मान लें तो मोटे तौर पर कह सकते हैं कि मीडिया में मोदियापा छाया रहा है। इसके बरअक्स, दूसरा तथ्य यह है कि
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। साल 2014 की खबरों को मानक मान लें तो मोटे तौर पर कह सकते हैं कि मीडिया में मोदियापा छाया रहा है। इसके बरअक्स, दूसरा तथ्य यह है कि मेनस्ट्रीम मीडिया में बसपा और उसकी प्रमुख मायावती के प्रति एक खास तरह का द्वेष और घृणा का भाव अक्सर नजर आता है। ये भाव इतने गहरे तक बैठा हुआ है कि कई बार अनजाने में ही इसकी बेहद चिंताजनक ...

किस्से अखबारों के-41: चैथा खंभा है या रेत की दीवार! ...

किस्से अखबारों के-41: चैथा खंभा है या रेत की दीवार! ...
Sushil Upadhyay। 2014 के लोकसभा चुनाव में मीडिया, खासतौर से टीवी मीडिया ने लोकतंत्र के चैथे-खंभे की बजाय खुद को रेत की दीवार में बदल लिया है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में
Sushil Upadhyay। 2014 के लोकसभा चुनाव में मीडिया, खासतौर से टीवी मीडिया ने लोकतंत्र के चैथे-खंभे की बजाय खुद को रेत की दीवार में बदल लिया है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में एबीपी न्यूज और जी-न्यूज पर मोदी के इंटरव्यू देखने के बाद से ऐसा लग रहा है कि पत्रकार और पत्रकारिता की परिभाषा को नए सिरे से परिभाषित किया जाना चाहिए। पत्रकार की विशेषताओं का भी पुनर ...

किस्से अखबारों के-40 आरक्षण का मुद्दा और रिपोर्टिंग के मानक ...

किस्से अखबारों के-40 आरक्षण का मुद्दा और रिपोर्टिंग के मानक ...
Sushil Upadhyay! यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या मुख्यधारा का हिंदी मीडिया बुनियादी तौर पर सवर्ण मीडिया है ? सीधे तौर पर हां या ना कह देना
Sushil Upadhyay! यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या मुख्यधारा का हिंदी मीडिया बुनियादी तौर पर सवर्ण मीडिया है ? सीधे तौर पर हां या ना कह देना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन मुख्यधारा के हिंदी मीडिया में हर रोज ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाएंगे जिनसे यह पता चलता है कि संबंधित खबरों या विश्लेषणों में पीछे कौन-सा दिमाग काम कर रहा था। मीडिया के पास जब भी आरक्षण या ऐ ...

किस्से अखबारों के-39 बहुत नाशुक्रा काम है समीक्षा करना ...

किस्से अखबारों के-39 बहुत नाशुक्रा काम है समीक्षा करना ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में जिस किसी को ठिकाने लगाना हो, उसे अखबारों की समीक्षा का काम दे देते हैं। मुझे भी एक बार अमर उजाला, मेरठ में और
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में जिस किसी को ठिकाने लगाना हो, उसे अखबारों की समीक्षा का काम दे देते हैं। मुझे भी एक बार अमर उजाला, मेरठ में और एक बार अमर उजाला, देहरादून में समीक्षा का काम करना पड़ा। तथाकथित समीक्षकों को अखबार में छपी भाषायी, तथ्यात्मक और प्रस्तुति संबंधी गलतियों को छांटकर रिपोर्ट तैयार करनी होती है। इस रिपोर्ट क ...

किस्से अखबारों के-35-तनाव सहो या भगोड़े बन जाओ! ...

 किस्से अखबारों के-35-तनाव सहो या भगोड़े बन जाओ! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। सामान्यतः लोग यही कहते हैं कि सेना में काम करने के लिए बहुत ऊंचे मानसिक बल की जरूरत पड़ती है। इसके अभाव में व्यक्ति या तो आत्मघात कर लेगा
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। सामान्यतः लोग यही कहते हैं कि सेना में काम करने के लिए बहुत ऊंचे मानसिक बल की जरूरत पड़ती है। इसके अभाव में व्यक्ति या तो आत्मघात कर लेगा या फिर भगोड़ा हो जाएगा। यही बात मीडिया पर भी ज्यों की त्यों लागू होती है। मीडिया में काम करने के लिए जिन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत है, उनमें से एक है-मानसिक दबाव सहने की योग्य ...

किस्से अखबारों के-37-शशि शेखर का घृणाशास्त्री और...... ...

किस्से अखबारों के-37-शशि शेखर का घृणाशास्त्री और...... ...
अमर उजाला छोड़े हुए सात साल हो गए, हिन्दुस्तान को भी पांच साल पहले अलविदा कहा था, लेकिन दोनों अखबारों के साथ भावात्मक रिश्ता बना हुआ है, भले
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से! अमर उजाला छोड़े हुए सात साल हो गए, हिन्दुस्तान को भी पांच साल पहले अलविदा कहा था, लेकिन दोनों अखबारों के साथ भावात्मक रिश्ता बना हुआ है, भले ही यह एकतरफा क्यों न हो! यह सब वैसा ही जैसा कि अपने अतीत के प्रति एक खास तरह का आकर्षण हमेशा बना रहता है। सुबह अखबार देखता हूं तो पुराने दिनों की तरह उन कमियों की ओर ध्यान जाता ...

किस्से अखबारों के-34- वैदिक जी से वास्ता और आवरण का सच ...

किस्से अखबारों के-34- वैदिक जी से वास्ता और आवरण का सच ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की दुनिया में कुछ ऐसे नाम हैं, जो कभी मेरी पसंद का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उनसे गाहे-बगाहे वास्ता पड़ता रहा। इन्हीें में से एक नाम डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का भी है।
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की दुनिया में कुछ ऐसे नाम हैं, जो कभी मेरी पसंद का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उनसे गाहे-बगाहे वास्ता पड़ता रहा। इन्हीें में से एक नाम डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का भी है। वैदिक जी साल 1994 में प्रेस क्लब, हरिद्वार द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस समारोह में मुझे उनके हाथ गोल्ड मेडल ...

किस्से अखबारों के-30- ऐसी-वैसी भाषा, कैसी-कैसी भाषा! ...

किस्से अखबारों के-30- ऐसी-वैसी भाषा, कैसी-कैसी भाषा! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। मीडिया की दुनिया में रहते हुए दो बार शशिशेखर जी के साथ काम करने का मौका मिला। पहले अमर उजाला और फिर हिन्दुस्तान में। उनके नाम के
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। मीडिया की दुनिया में रहते हुए दो बार शशिशेखर जी के साथ काम करने का मौका मिला। पहले अमर उजाला और फिर हिन्दुस्तान में। उनके नाम के साथ जी लगाने पर कुछ लोगों को एतराज हो सकता है, लेकिन मेरा मन कई कारणों से उनका सम्मान करता हूं। शशिशेखर को भले ही कितनी भी गालियां दी जाएं, लेकिन वे हिंदी के उन संपादकों में हैं जिन्हों ...

मीडिया की मंडी में हम-16- तालठोंक मामले का क्या हश्र हुआ ...

मीडिया की मंडी में हम-16- तालठोंक मामले का क्या हश्र हुआ ...
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। तो मित्रों मैं 1992 में जयपुर हाइकोर्ट में करप्शन,वकीलों की नाराजगी और मुझ पर अवमानना के मुद्दे की चर्चा कर रहा था।मेरा सोशल एक्टिविस्ट सक्रिय
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। तो मित्रों मैं 1992 में जयपुर हाइकोर्ट में करप्शन,वकीलों की नाराजगी और मुझ पर अवमानना के मुद्दे की चर्चा कर रहा था।मेरा सोशल एक्टिविस्ट सक्रिय हो गया था...मैं प्रेस कांफ्रेंस में मुखर हर वकील से ,उसके घर जाकर मिला....उनके द्वारा जजों पर लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों के सबूत इकठ्ठे किए। स्टोरी लिखी और भेज दी। हमारे ब ...

मीडिया की मंडी में हम-15 ...

मीडिया की मंडी में हम-15  ...
dhiraj kulshrestha! माया ज्वॉइन करते ही अगले महीने मैंने एक दुस्साहसी स्टोरी लिख दी.......\"अदालत कटघरे में\"।इस स्टोरी में न्यायपालिका
मेरा सोशल एक्टिविस्ट जाग गया dhiraj kulshrestha! माया ज्वॉइन करते ही अगले महीने मैंने एक दुस्साहसी स्टोरी लिख दी.......\"अदालत कटघरे में\"।इस स्टोरी में न्यायपालिका में और खास तौर पर हाईकोर्ट की जयपुर बैंच के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।इस स्टोरी को माया ने प्रमुखता से छापा और वह अंक एक ही दिन में बाजार में बिक गया।हर तरफ...खास तौर से ज्यूड ...

कितना मजबूत है लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ? ...

कितना मजबूत है लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ? ...
Dinesh Chandra के फेसबुक वाल से। आज़ादी के बाद से लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ भली भांति फलफूल गए ।लेकिन चौथा स्तम्भ शायद भीतर ही भीतर गल गया।आज मिडिया की जो तरक्की नज़र
Dinesh Chandra के फेसबुक वाल से। आज़ादी के बाद से लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ भली भांति फलफूल गए ।लेकिन चौथा स्तम्भ शायद भीतर ही भीतर गल गया।आज मिडिया की जो तरक्की नज़र आती है वो बस कुछ बड़े मिडिया हाउस है ।जो बड़े कॉरपोरेट घरानों या राजनेताओं से जुड़े है। वो समाचार पत्र जो स्थानीय स्तर पर निकलते हैं आज मरने की कगार पर हैं।कुछ सिधार चुके कुछ जीने क ...

तो जल्द ही अभिजात्य वर्ग की गिरफ्त में होगी पत्रकारिता भी....!! ...

तो जल्द ही अभिजात्य वर्ग की गिरफ्त में होगी पत्रकारिता भी....!! ...
तारकेश कुमार ओझा ! क्या गीत - संगीत व कला से लेकर राजनीति के बाद अब लेखन व पत्रकारिता के क्षेत्र में भी जल्द ही ताकतवर अभिजात्य वर्ग का क
​ तारकेश कुमार ओझा ! क्या गीत - संगीत व कला से लेकर राजनीति के बाद अब लेखन व पत्रकारिता के क्षेत्र में भी जल्द ही ताकतवर अभिजात्य वर्ग का कब्जा होने वाला है। क्या बड़े - बड़े लिक्खाड़ इस वर्ग के पीछे वैसे ही घूमते रहने को मजबूर होंगे , जैसा राजनीति के क्षेत्र में देखने को मिलता है। क्या यह क्षेत्र अब तक इस वर्ग की धमक से काफी हद तक इस वजह से ...

शेखर ने मानी भूल ...

शेखर ने मानी भूल ...
रामबहादुर राय! शेखर गुप्ता ने आखिरकार अपनी भूल मान ली है, पर एक गहरी हिचकिचाहट और बहुत चालाकी के साथ।
रामबहादुर राय! शेखर गुप्ता ने आखिरकार अपनी भूल मान ली है, पर एक गहरी हिचकिचाहट और बहुत चालाकी के साथ। अपने कॉलम में उन्होंने 18 फरवरी को लिखा था- ’27 साल गुजर चुके हैं। मैं इलाहाबाद की अपनी रिपोर्टर डायरी से एक अंश जाहिर कर ही सकता हूं। वीपी.सिंह ने चुनावों की साफ-सुथरी फंडिंग और कम से कम खर्च करने पर जोर दिया था। मोटरसाइकल पर प्रचार करना उनका ...

मजीठिया वेज बोर्ड: अफवाहों से बचें, विशेष जांच टीम से हकीकत बयां करें ...

मजीठिया वेज बोर्ड: अफवाहों से बचें, विशेष जांच टीम से हकीकत बयां करें ...
मेरे एक मित्र और वरिष्ठ पत्रकार उस दिन तो फोन कनेक्ट होते ही बिफर पड़े। अत्यंत विचलित और अधीरज भरे लहजे में बोलने लगे, च्मैने अपनी रिट पिटीशन
मेरे एक मित्र और वरिष्ठ पत्रकार उस दिन तो फोन कनेक्ट होते ही बिफर पड़े। अत्यंत विचलित और अधीरज भरे लहजे में बोलने लगे, च्मैने अपनी रिट पिटीशन के लिए वकील साहब को पे स्लिप और दूसरे जरूरी कागजात तो दे दिए थे। सुप्रीम कोर्ट में उसे जज साहब को दिखाया क्यों नहीं? दूसरे साथियों ने भी पे स्लिप समेत सारे कागजात-डाक्यूमेंट केस के साथ संलग्न करने के लिए दिए ...

मीडिया की मंडी में हम-14 ...

मीडिया की मंडी में हम-14 ...
Dhiraj Kulshreshtha. जयपुर दूरदर्शन से जुड़ने के बाद भी फ्रीलांसिंग जारी थी.......’माया’ में नियमित लेखन भी।फरवरी 1992 में माया का नियमित संवाददाता बन गया......पत्रकार ओम
हमारी टीम उन प्रतिक्रियाओं का आनंद उठाती थी ----------------------------------------------------------------------- Dhiraj Kulshreshtha. जयपुर दूरदर्शन से जुड़ने के बाद भी फ्रीलांसिंग जारी थी.......’माया’ में नियमित लेखन भी।फरवरी 1992 में माया का नियमित संवाददाता बन गया......पत्रकार ओम सैनी ब्यूरो चीफ थे,श्रीपाल शक्तावत साथ में संवाददाता थे औ ...

मीडिया की मंडी में हम-13 ...

मीडिया की मंडी में हम-13 ...
dhiraj kulshreshtha। ये मार्च या अप्रैल 1990 था,जब मैं जयपुर दूरदर्शन समाचार विभाग से नियमित जुड़ा था।एक कैजुअल सब एडिटर कम ट्रांसलेटर के रूप में......हर महीने दस दिन
dhiraj kulshreshtha। ये मार्च या अप्रैल 1990 था,जब मैं जयपुर दूरदर्शन समाचार विभाग से नियमित जुड़ा था।एक कैजुअल सब एडिटर कम ट्रांसलेटर के रूप में......हर महीने दस दिन की बुकिंग मिलती थी....उससे एक मुश्त कमरे का किराया और भोजन सहित छोटा-मोटा खर्च निकल जाता था,ये बहुत बड़ा सहारा था।साथ ही यह उम्मीद भी, कि कभी मौका लगा तो दूरदर्शन में स्थायी हो जाएंग ...

रवीश कुमार : क्या मीडिया बचा सकता था गजेंद्र की जान? ...

रवीश कुमार : क्या मीडिया बचा सकता था गजेंद्र की जान? ...
दक्षिण वियतनाम की एक सड़क पर नंगी भागती किम फुक (Kim Phuc) की उस तस्वीर को कौन भूल सकता है। नौ साल की किम के साथ कुछ और बच्चे भाग रहे हैं। सड़क के अंतिम छोर पर बम धमाके के
दक्षिण वियतनाम की एक सड़क पर नंगी भागती किम फुक (Kim Phuc) की उस तस्वीर को कौन भूल सकता है। नौ साल की किम के साथ कुछ और बच्चे भाग रहे हैं। सड़क के अंतिम छोर पर बम धमाके के बाद उठा हुआ काले धुएं का गुबार है। युद्ध की तबाही का यह काला सच दुनिया के सामने नहीं आता, अगर फोटोग्राफर निक ने हिम्मत करके वह तस्वीर न ली होती। निक ने न सिर्फ तस्वीर ली, बल्कि क ...

वीके सिंह विवाद के पीछे मीडिया का दोहरा रवैया ...

वीके सिंह विवाद के पीछे मीडिया का दोहरा रवैया  ...
विदेश राज्य मंत्री जनरल (से.नि.) वीके सिंह एक बार फिर विवादों में हैं। पाकिस्तान उच्चायोग द्वारा आयोजित पाकिस्तान दिवस के कार्यक्रम में पहुंचे वीके सिंह ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर
विदेश राज्य मंत्री जनरल (से.नि.) वीके सिंह एक बार फिर विवादों में हैं। पाकिस्तान उच्चायोग द्वारा आयोजित पाकिस्तान दिवस के कार्यक्रम में पहुंचे वीके सिंह ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर मीडिया के लिए सुर्खियां बटोरी थीं। इस बार उन्होंने मीडिया के लिए गाली का प्रयोग कर खुद के लिए सियासी रूप से मुश्किलें मोल ले ली हैं। हालांकि सोशल मीडिया प ...

मीडिया प्रेस से जुड़ो फिर मजे करोगे जैसे कि वह....... ...

मीडिया प्रेस से जुड़ो फिर मजे करोगे जैसे कि वह....... ...
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी। आप पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, जाहिर सी बात है कि जीवन यापन की चिन्ता से ग्रस्त होंगे। यह तो अच्छा है कि अभी तक अकेले हैं, कहीं आप शादी-शुदा होते तो कुछ और बात होती।
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी। आप पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, जाहिर सी बात है कि जीवन यापन की चिन्ता से ग्रस्त होंगे। यह तो अच्छा है कि अभी तक अकेले हैं, कहीं आप शादी-शुदा होते तो कुछ और बात होती। पढ़े-लिखे हैं और चिन्ताग्रस्त हैं, ऐसे में रातों को नींद नहीं आती होगी, आप एक काम करिए कलम-कागज लेकर बैठ जाइए, बस कुछ ही दिनों में आप को लिखने की आदत पड़ जाएगी। ...

नारी-अस्मिता वोट बैंक नहीं जिसे..... ...

नारी-अस्मिता वोट बैंक नहीं जिसे..... ...
कौन कहता है कि महिलाएँ सशक्त नहीं हैं। मेरा अपना मानना है कि आदिकाल से ही महिलाओं की ही चलती आ रही है। ‘स्त्री-शक्ति’ की पूजा की जाती है। देवता भी इस शक्ति के आगे नतमस्तक थे।
-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी कौन कहता है कि महिलाएँ सशक्त नहीं हैं। मेरा अपना मानना है कि आदिकाल से ही महिलाओं की ही चलती आ रही है। ‘स्त्री-शक्ति’ की पूजा की जाती है। देवता भी इस शक्ति के आगे नतमस्तक थे। महिलाओं के बारे में नकारात्मक सोच वाले ही ऐसा कह सकते हैं कि नारी ‘अबला’ होती है। कितने उदाहरण दूँ, कितनों के नाम गिनाऊँ। सशक्त नारियों के बा ...

​क्रिकेट में स्विंग तो राजनीति में स्टिंग ...!!​ ...

​क्रिकेट में स्विंग तो राजनीति में स्टिंग ...!!​ ...
तारकेश कुमार ओझा! जीवन में पहली बार स्टिंग की चर्चा सुनी तो मुझे लगा कि यह देश में धर्म का रूप ले चुके क्रिकेट की कोई न
तारकेश कुमार ओझा! जीवन में पहली बार स्टिंग की चर्चा सुनी तो मुझे लगा कि यह देश में धर्म का रूप ले चुके क्रिकेट की कोई नई विद्या होगी। क्योंकि क्रिकेट की कमेंटरी के दौरान मैं अक्सर सुनता था कि फलां गेंदबाज गेंद को अच्छी तरह से स्विंग करा रहा है या पिच पर गेंद अच्छे से स्विंग नहीं हो रही है वगैरह - वगैरह। लेकिन चैनलों के जरिए समझ बढ़ने पर पता चल ...

पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश पत्रकारों के लिए ख ...

पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश पत्रकारों के लिए ख ...
पत्रकारों के हितों की पैरोकार न्यूयॉर्क की संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) की एक रिपोर्ट में उन देशों का उल्लेख है, जो पत्रकारों के लिए काम करने के लिहाज से सबसे खतरनाक हैं.
पत्रकारों के हितों की पैरोकार न्यूयॉर्क की संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) की एक रिपोर्ट में उन देशों का उल्लेख है, जो पत्रकारों के लिए काम करने के लिहाज से सबसे खतरनाक हैं. इस सूची में भारत सहित दक्षिण एशिया के छह देश पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश शामिल हैं. सीपीजे की रिपोर्ट में भारत 13 देशों की सूची में फि ...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल ...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल ...
मनोज कुमार! मानव समाज ने स्वयं को अनुशासित रखने के लिये अधिकार और दायित्व शब्द का निर्माण किया है किन्तु य
मनोज कुमार! मानव समाज ने स्वयं को अनुशासित रखने के लिये अधिकार और दायित्व शब्द का निर्माण किया है किन्तु यही दो शब्द वह अपनी सुविधा से उपयोग करता है. पुरुष प्रधान समाज की बात होती है तो अधिकार शब्द प्राथमिक हो जाता है और जब स्त्री की बात होती है तो दायित्व उसके लिये प्रथम. शायद समाज के निर्माण के साथ ही हम स्त्री को दायित्व का पाठ पढ़ाते आ रहे ह ...

मदर टेरेसा जैसा काम क्यों नहीं करता संघ? ...

मदर टेरेसा जैसा काम क्यों नहीं करता संघ? ...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिन्दुत्व की विचारधारा से जुड़े तमाम लोगों को नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब उन्हें वे बातें खुल कर कहने की छूट मिल गई है जो वे पहले नहीं कह पाते थे।
डॉ संदीप पाण्डेय, सीएनएस। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिन्दुत्व की विचारधारा से जुड़े तमाम लोगों को नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब उन्हें वे बातें खुल कर कहने की छूट मिल गई है जो वे पहले नहीं कह पाते थे। इनमें से कई बातें विवादास्पद हैं। इधर अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थानों पर हमले भी बढ़ गए हैं। हमला करने वाले भी निडर ...

वर्तमान मीडिया में महिलाओं को नहीं पचा पा रहे हैं पुरूष ...

वर्तमान मीडिया में महिलाओं को नहीं पचा पा रहे हैं पुरूष ...
काश! मुझ जैसी हर साधारण एवं महत्वाकांक्षी लड़की को अच्छे माँ-बाप एवं उत्साहवर्धन करने वाला समाज तथा मेरे
काश! मुझ जैसी हर साधारण एवं महत्वाकांक्षी लड़की को अच्छे माँ-बाप एवं उत्साहवर्धन करने वाला समाज तथा मेरे शैक्षिक गुरू व पत्रकारिता गुरूकुल के गुरू की मानिन्द लोगों का सानिध्य, स्नेह एवं आशीर्वाद मिले, तभी पत्रकारिता के क्षेत्र में महिलाएँ छू सकेंगी उचाईयाँ। -रीता विश्वकर्मा पत्रकारिता (मीडिया/प्रेस) में महिलाओं का प्रवेश और योगदान बड़े शहरों म ...

तौबा करिए ऐसे छपास रोगियों से ...

तौबा करिए ऐसे छपास रोगियों से ...
-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी आप लेखक, विचारक पत्रकार रिपोर्टर हैं। आप को छपास रोग है, अपने ऊल-जुलूल आलेख एक साथ चार-पाँच
-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी आप लेखक, विचारक पत्रकार रिपोर्टर हैं। आप को छपास रोग है, अपने ऊल-जुलूल आलेख एक साथ चार-पाँच सौ लोगों लोगों को ई-मेल करते हैं। आपका वही मेल मुझे भी मिला है। धन्यवाद कहूँ या फिर अपना सिर पीटूँ। बहरहाल! इसको आप अपनी प्रॉब्लम न समझें- यह मेरी समस्या है मैं निबट लूँगा। एक बात कहना चाहूँगा, वह यह कि... खैर छोड़िये बस ऐसे भे ...

साक्षरता और परम्परा के मेल से बचेगा पानी ...

साक्षरता और परम्परा के मेल से बचेगा पानी ...
-मनोज कुमार करीब तीन दशकों से जल संकट को लेकर विश्वव्यापी बहस छिड़ चुकी है। यहां तक कहा जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध पानी के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। स्थिति की गंभीरता को नकारा नहीं जा सकता है।
-मनोज कुमार करीब तीन दशकों से जल संकट को लेकर विश्वव्यापी बहस छिड़ चुकी है। यहां तक कहा जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध पानी के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। स्थिति की गंभीरता को नकारा नहीं जा सकता है। इस दिशा में राज्य सरकार अपने अपने स्तर पर पहल कर रही हैं और जल संरक्षण की दिशा में नागरिकों को जागरूक बनाया जा रहा है। जल संरक्षण की दिशा में उपाय बरतने ...

The media we don’t see ...

The media we don’t see ...
A fortnight before the Delhi assembly polls, an editor of a leading Hindi News Channel, India TV’s Rajat Sharma, concluded his prime time bulletin with an air of
A fortnight before the Delhi assembly polls, an editor of a leading Hindi News Channel, India TV’s Rajat Sharma, concluded his prime time bulletin with an air of undignified judgment. He called Arvind Kejriwal an ‘anarchist’, who does not have the requisite “manners for public discourse”. “Why would Kiran Bedi accept an offer for debate by an an ...

एक गांधी का ‘महात्मा’ हो जाना ...

एक गांधी का ‘महात्मा’ हो जाना ...
-मनोज कुमार! संसार में एक ही व्यक्ति हुआ है जिसे नाम से नहीं काम से पहचाना गया. समाज के द्वारा स्वस्फूर्त रूप प्रदान की गई उपाधि ‘महात्मा’ ने उनके नाम का स्थान लिया और वे नाम से ऊपर उठ गये. सौ
-मनोज कुमार! संसार में एक ही व्यक्ति हुआ है जिसे नाम से नहीं काम से पहचाना गया. समाज के द्वारा स्वस्फूर्त रूप प्रदान की गई उपाधि ‘महात्मा’ ने उनके नाम का स्थान लिया और वे नाम से ऊपर उठ गये. सौ बरस से अधिक समय से हम किसी को जानते हैं तो वे हैं महात्मा गांधी. बहुतेरों को यह स्मरण भी नहीं होगा कि दरअसल, उनका नाम महात्मा गांधी नहीं बल्कि मोहनदास करमच ...

मीडिया की मंडी में हम-5 ...

 मीडिया की मंडी में हम-5 ...
! यूं कहें तो मेरी शुरुआत जयपुर की लोकल रिपोर्टिंग से हुई,इसका फायदा यह हुआ कि मैंने जयपुर को जल्दी से समझा और जयपुर ने मुझे। कल्चरल रिपोर्टिंग मेरी प्रिय बीट थी, वह इकबाल खान के पास थी पर उनके अवकाश पर होने पर इसे चुराने का मौका मैंने कभी
Dhiraj Kulshreshtha! यूं कहें तो मेरी शुरुआत जयपुर की लोकल रिपोर्टिंग से हुई,इसका फायदा यह हुआ कि मैंने जयपुर को जल्दी से समझा और जयपुर ने मुझे। कल्चरल रिपोर्टिंग मेरी प्रिय बीट थी, वह इकबाल खान के पास थी पर उनके अवकाश पर होने पर इसे चुराने का मौका मैंने कभी नहीं छोड़ा। विश्वास कुमार चीफ रिपोर्टर थे और राजस्थान की पत्रकारिता के स्टार रिपोर्टर भी।उन ...

वाराणसी में आतंकी हमले में मारे गये पत्रकारों को दी गई श्रद्धांजलि ...

वाराणसी में आतंकी हमले में मारे गये पत्रकारों को दी गई श्रद्धांजलि  ...
वाराणसी। डा. सम्पूर्णानंद की पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा व विचारमंच के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को शाम पांच बजे तेलियाबाग पार्क में लगी सम्पूर्णानंद की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। कायस्थ विचार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता श्रीवास्तव के नेतृत्व में लोगों ने पेरिस में हुए आतंकी हमले में मारे गये पत्रकारों को कैंडिल जलाकर श्रद्धांजलि दी।
वाराणसी। डा. सम्पूर्णानंद की पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा व विचारमंच के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को शाम पांच बजे तेलियाबाग पार्क में लगी सम्पूर्णानंद की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। कायस्थ विचार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता श्रीवास्तव के नेतृत्व में लोगों ने पेरिस में हुए आतंकी हमले में मारे गये पत्रकारों को कैंडिल जल ...
Latest News दैनिक जागरण लुधियाना यूनिट के चार दर्जन से अधिक कर्मचारियों ने भी ठोंकी ताल हमें क्यों चाहिए मजीठिया भाग-3A: इकरारनामा वर्किंग जर्नलिस्ट अब ललित मोदी ने दैनिक भास्कर समूह को भी लपेटा भारतीय अखबार ही गलती करते हैं ऐसा नहीं है, न्यूयॉर्क टाइम से भी ये गलती हुई है दैनिक जागरण, इलाहाबाद के नये जनरल मैनेजर का तुगलकी फरमान भाजपा के एमजे अकबर राज्यसभा उपचुनाव जीते नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया की सफाई सुब्रत राय के खिलाफ वारंट पर रोक की अवधि बढ़ी जागरण के जिंदा/हिन्दुस्तान के मुर्दा पत्रकार दैनिक जागरण्‍ा, नोएडा में करो या मरो का आहवान फोटो जर्नलिस्ट तुषार राय दैनिक भास्कर संग जुडे दैनिक जागरण उदय नहीं अस्त होने को आतुर दैनिक जागरण धनबाद में तैनात होंगे विष्णु त्रिपाठी के खास सिपलाहकार जागरण में सांकेतिक हड़ताल का आज दूसरा दिन दैनिक जागरण में कर्मचारियों की काली पट्टी से प्रबंधन की नींद उड़ी सीईओ राहुल यादव को निकाला गया अमर उजाला, देहरादून से पुरुषोतम कुमार का कानपुर स्थानांतरण, होंगे कांपैक्ट के प्रभारी दैनिक जागरण में सांकेतिक हड़ताल शुरू, कर्मचारियों ने बांधी काली पट्टी वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र आर्य अब हमारे बीच नहीं रहे पत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’ टीम इंडिया का मजाक बनाने वाले अखबार ने जताया खेद हमें क्यों चाहिए मजीठिया भाग-3, पद: चीफ सब! वेतन- 95000!! मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों के क्रियान्वयन के सम्बन्ध में एक जुलाई से जन सुनवाई दैनिक भास्कर, होशंगाबाद के रिपोर्टर ने प्राचार्य से क्या कहा, सुनिए पूरा टेप दैनिक जागरण, धर्मशाला में प्रताड़ना से दुखी रिपोर्टर,सवांद सहयाेगियों का इस्तीफा जागरण में भारी फेरबदल की तैयारी, कई को दिखाए जाएंगे बाहर के रास्ते होशंगाबाद भास्कर के रिपोर्टर ने संपादक के नाम पर मांगी LED निरुपमा पाठक के साथ इंसाफ नहीं हुआ हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं दैनिक जागरण में हड़ताल की सूचना पर मीडिया घराने बनाने लगे नई रणनीति प्रसून शुक्ला ETV में सलाहकार संपादक बने ये देखिए बांग्लादेशी अखबार, टीम इंडिया को कर दिया गंजा मध्य प्रदेश में अब पत्रकार पर जानलेवा हमला पत्रकार निरुपमा की मौत के मामले में प्रियभांशु निर्दोष करार दुष्कर्म के आरोपों में फंसे निम्स के चेयरमैन बीएस तोमर मामले में पूछताछ को रांची पहुंची राजस्था जनवरी से टूट जाएगाी सीएनएन और टीवी 18 की दोस्ती Vishwas lodges complaint against TV news channel बक्सर के उमाशंकर पांडेय को किसान चैनल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अब हर साल होगा पत्रकारों का पुलिस वेरिफिकेशन काठमांडू में वयोवृद्ध पत्रकार रामाशीष का निधन गाजियाबाद में पत्रकार और उसके परिवार पर हमले के आरोपी तीन लोग गिरफ्तार नेट न्यूट्रीलिटी’ का अनसुलझा सवाल दैनिक जागरण मेरठ में भगदड, कुछ तो चले गए, कुछ जाने को तैयार उत्तर प्रदेश में एक और पत्रकार पर जान लेवा हमला अब पत्रकारों को कार्ड देने के पहले होगी पुलिसिया जांच मुंबई में एक साप्ताहिक के संपादक को पुलिस ने गिरफ्तार किया संदीप हत्याकाण्ड में क्राइम न्यूज ब्यूरो इण्डिया का डायेक्टर ब्रजेश गिरफ्तार दैनिक जागरण, अलीगढ़ में प्रताड़ना से दुखी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर का इस्तीफा हमें क्यों चाहिए मजीठिया भाग-2, जानने के लिए यहां क्लिक करें:- Deccan Chronicle chief photographer attacked by UDF supporters