दैनिक जागरण में छटनी की फिर तैयारी, सुधीर बैंसला-राजू सजवान का तबादला मध्‍यप्रदेश में नंबर वन बना हुआ है बंसल न्‍यूज ब्रेकिंग न्यूज....आनंद बाजार पत्रिका ने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों को लागू किया 32 प्रतिशत बढ़ा गूगल का मुनाफा दूरदर्शन पर प्रतिबंधित हुई हेमा, जया की फिल्में सहारा ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा एक नया प्रस्ताव EC launches Voter Educational Channelपत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश है सीरियाअकमल और उसके परिवार के सदस्यों ने किया मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहारसलीम खान ने उर्दू में शुरू की नरेंद्र मोदी की वेबसाइटद हिंदू के कैंटीन में नानवेज की मनाहीमजीठिया को लागू कराने के लिए घेराबंदी शुरू, मध्यप्रदेश में श्रमायुक्त ने जारी किया आदेश पांच दिन तक क्यों गायब थे पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार शुक्लादैनिक भास्कर के एक कर्मचारी की अपील, मजीठिया के लिए आगे आए पत्रकारयूबीआई के जरिए 'कॉल मनी' का भी धंधा करता है सहारा फिर बिक रहा चौथा खम्भासारधा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन की पत्नी और बेटेसहारा ने सुप्रीम कोर्ट से किया खाते से रोक हटाने का अनुरोधग्रेटर नोएडा से मीडियाकर्मी सौरभ श्रीवास्तव की बाइक को ले उड़े चोरScribes bodies demand implementation of Majithia Wage Boardचुनाव आयोग ने सभी मीडिया हाउसों को पत्र लिख ओपिनियन पोल पर हड़काया चुनाव में इस बार विज्ञापनी मलाई खबरिया टीवी चैनल चट कर गएSahara says sorry for slamming Sebi in newspaper ads ट्रास जेंडर के बहाने चिकोटी में मीडिया पर साधा निशाना पहले बना आईपीएस, पकड़ा गया तो पत्रकार बन हड़काने लगा पुलिस वालों को मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (8) प्रणव राय को कसकर डांटा था मनमोहन सिंह नेमीडिया पर संजय बारू के खुलासे (7) विशेष अधिकार खत्म हुए तो विफर गए संपादक मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (6) सिद्धार्थ वरदराजन को नहीं चाहते थे दीक्षितमीडिया पर संजय बारू के खुलासे (5) वीर सांघवी ने पहले से ही स्वीकृत प्रश्न पूछेमीडिया पर संजय बारू के खुलासे (4) यूपीए वन की उम्र शेखर की नजर में महज छह माहमीडिया पर संजय बारू के खुलासे (3) शिवशंकरन की नियुक्ति में हुआ मीडिया का इस्तेमाल मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (2) हिंदुस्तान टाइम की शोभना भारती ने कहा, बाल रंग रही थींमीडिया पर संजय बारू के खुलासे (1) सत्ता के निकट तीन तरह के पत्रकार सुधीर चौधरी को देखते ही मुझे गाँव का मंगरू चोर याद आता है...इंडिया टीवी के‘आप की अदालत’ को ‘पेड न्यूज’ करार देते हुए कांग्रेस पहुंची आयोग के दरवाजेआकाशवाणी पटना के उर्दू बुलेटिन ‘‘इलाकाई खबरें’’ ने पूरे किये 25 सालनक़वी जी पर ये तोहमत आँकड़ों पर खरी नहीं उतरतीThe Sun's sports editor to leave after 29 years with Murdoch's groupवाशिंगटन पोस्ट और गार्जियन को संयुक्त रूप से मिला पुलित्जर पुरस्कारआपबीतीः मेरे कर्जदार हैं सांसद व पत्रकार हरिवंश सिंह और प्रभात खबर चैनल वन के चेयरमैन जहीर अहमद, उस्मान अहमद, विवेक अग्रवाल और पप्पू सिंह के खिलाफ शिकायत यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व सीएमडी अर्चना भार्गव का कारनामापत्रकारों को ठगने में लालू और नीतीश एक जैसेचुनावी किताबों की फेहरिस्‍त में आज एक और नाम, अंबानी की पोलखोल गैस वार्सवाराणसी में तरफदारी करने आए पत्रकार राजनाथ तिवारी की पुलिस वालों ने की जमकर पिटाई शक, शक्की, शक्काइटिसकेबल संचालक पुष्कर शुक्ला हत्याकांड में धर्मेंद्र दीनू की जमानत अर्जी खारिजवाराणसी के समाचार पत्र अभिकर्ता को भातृशोककांग्रेस में वाराणसी में प्रवक्ता को लेकर ही रार, कहा मीडिया सेल ने किया तैनात दैनिक भास्कर, दिल्ली से जुडे रहे रफीक विसाल पहुंचे नई दुनिया, इंदौर

शक, शक्की, शक्काइटिस ...

शक, शक्की, शक्काइटिस ...
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी। मैं सौ फीसद पत्रकार हूँ। क्या बात है किसी को कोई शक? शक का इलाज भी होता है बशर्ते शक्की चाहे तब। हमारे इर्दगिर्द कई ऐसे भी मानव
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी। मैं सौ फीसद पत्रकार हूँ। क्या बात है किसी को कोई शक? शक का इलाज भी होता है बशर्ते शक्की चाहे तब। हमारे इर्दगिर्द कई ऐसे भी मानव प्राणी हैं, जिन्हें ‘शक्काइटिस’ नामक भयंकर बीमारी ने जकड़ रखा है। मैं चाहता हूँ कि इन लोगों को शक की इस बीमारी से निजात मिले। ऊपर वाले की मर्जी जब वह चाहेगा तभी ऐसा मुमकिन होगा। शक की बात चली ...

सवाल मीडिया के इरादे का …(2) बस बोली लगाने की देरी है ...

सवाल मीडिया के इरादे का …(2) बस बोली लगाने की देरी है ...
भारतीय पत्रकारिता आज असामान्य दौर से गुजर रही है। पत्रकारिता सिर्फ सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का जरिया नहीं रह गई है। अब सूचना और संवाद का व्यापार होने
भारतीय पत्रकारिता आज असामान्य दौर से गुजर रही है। पत्रकारिता सिर्फ सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का जरिया नहीं रह गई है। अब सूचना और संवाद का व्यापार होने लगा है। पत्रकारिता के जरिये सरकारों का गठन, उत्थान और पतन हो रहा है। एक छोटी-सी अखबारी सूचना से समाज में तनाव, विवाद और संघर्ष पैदा हो रहे हैं। इलेक्ट्रानिक माध्यमों के ब्रेकिंग न्यूज से ऐसा अनेक झड़ ...

सवाल मीडिया के इरादे का … ...

सवाल मीडिया के इरादे का … ...
लोकतंत्र के तीनों स्तंभ आवश्यकतानुसार मीडिया का उपयोग करते हैं। मीडिया शांति के लिए कारगर है और अशांति के लिए भी। मीडिया न सिर्फ संघर्ष को पैदा करता और
लोकतंत्र के तीनों स्तंभ आवश्यकतानुसार मीडिया का उपयोग करते हैं। मीडिया शांति के लिए कारगर है और अशांति के लिए भी। मीडिया न सिर्फ संघर्ष को पैदा करता और बढ़ावा दे सकता है, बल्कि उसका समाधान भी कर सकता है। सवाल मीडिया के इरादे का है। मीडिया की यही शक्ति है जिसे अपने-अपने हिसाब से न सिर्फ लोकतंत्र के सभी स्तंभ उपयोग कर रहे हैं, बल्कि अन्य सामाजिक श ...

अरविंद केजरीवाल की हार में भी जीत है ...

अरविंद केजरीवाल की हार में भी जीत है  ...
हार जायें या हवा हो जायें या जीत जायें । इन तीनों स्थितियों को छोड़ दें तो अरविंद केजरीवाल ने राजनीति को बदलने का साहसिक प्रयास तो किया ही । हममें से कई
हार जायें या हवा हो जायें या जीत जायें । इन तीनों स्थितियों को छोड़ दें तो अरविंद केजरीवाल ने राजनीति को बदलने का साहसिक प्रयास तो किया ही । हममें से कई राजनीतिक व्यवस्था को लेकर मलाल करते रहते हैं लेकिन अरविंद ने कुछ कर के देखने का प्रयास किया । कुछ हज़ार लोगों को प्रेरित कर दिया कि राजनीति को बदलने की पहली शर्त होती है इरादे की ईमानदारी । अरविं ...

जी हां, सीएम के भाई का घर है यहां! ...

 जी हां, सीएम के भाई का घर है यहां! ...
प्रभात रंजन दीन। सेना ने अपनी सम्पत्ति नेताओं के हाथ गिरवी रख दी है। संवेदनशील सैन्य क्षेत्र की कोठियां धड़ल्ले से बिक रही हैं या कब्जा की जा रही हैं, सेना के
प्रभात रंजन दीन। सेना ने अपनी सम्पत्ति नेताओं के हाथ गिरवी रख दी है। संवेदनशील सैन्य क्षेत्र की कोठियां धड़ल्ले से बिक रही हैं या कब्जा की जा रही हैं, सेना के अधिकारी इस 'धंधे' में लिप्त हैं, इसलिए सब मस्त हैं। सेना की जमीन, कोठियां व अन्य सम्पत्ति रक्षा मंत्रालय की होती है और उनका प्रबंधन छावनी परिषदें देखती हैं। सेना का कानून कहता है कि उन सम्प ...

पेड न्यूज ‘खबर’ के वेश में भ्रष्टाचार (1) ...

पेड न्यूज ‘खबर’ के वेश में भ्रष्टाचार (1) ...
भारतीय प्रेस परिषद की उप-समिति की एक रिपोर्ट कहती है कि पेड न्यूज ‘खबर’ के वेश में भ्रष्टाचार का संस्थागत और संगठित रूप है। पर किसी भी समिति का काम
भारतीय प्रेस परिषद की उप-समिति की एक रिपोर्ट कहती है कि पेड न्यूज ‘खबर’ के वेश में भ्रष्टाचार का संस्थागत और संगठित रूप है। पर किसी भी समिति का काम केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि उसके मूल कारणों की तलाश करना और उसके निदान का उपाय सुझाना भी होना चाहिए। अगर अध्ययन के आधार पर पेड न्यूज की समस्या को समझने की कोशिश की जाए तो उसमें एक संदर्भ प ...

What ails media? ...

What ails media? ...
The first “victim” of Majithia Wage Board is here. The closure of a vernacular daily, simultaneously published from
Rajiv Roy : The first “victim” of Majithia Wage Board is here. The closure of a vernacular daily, simultaneously published from Guwahati and Shillong, is a clear indication of the “survival of the fittest” in today’s competitive era. The closure of the daily on April 1st went viral all over the country in the public domain as its jobless employees ...

पारदर्शिता और जवाबदेही के पैमाने पर कठघरे में मीडिया ...

पारदर्शिता और जवाबदेही के पैमाने पर कठघरे में मीडिया ...
वनिता कोहली-खांडेकर / नई दिल्ली। पिछले दिनों कामकाज के सिलसिले में ब्रिटेन के दौरे में काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जिसमें मध्यकालीन भारत में पत्रकारिता के
वनिता कोहली-खांडेकर / नई दिल्ली। पिछले दिनों कामकाज के सिलसिले में ब्रिटेन के दौरे में काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी, जिसमें मध्यकालीन भारत में पत्रकारिता के संचालन की स्मृतियों को ताजा करना भी शामिल रहा। बीबीसी के नए एकीकृत न्यूजरूम के दौरे से इतर एक बातचीत में चर्चा बीबीसी के एक कार्यक्रम पर केंद्रित हो गई, जिसमें उसने भारत में चुनावों से पहले पेड ...

मीडिया घरानों की प्रतिस्पर्धा (1) न्यूज़ पेपर और प्राइस वार ...

मीडिया घरानों की प्रतिस्पर्धा (1) न्यूज़ पेपर और प्राइस वार  ...
अखबारों के आवरण मूल्य में अस्वाभाविक कमी के पीछे भी प्रतिद्वंद्विता की असमान स्थितियां ही हैं और यह खेल मुख्यतः बड़ी पूंजीवाले संस्थान ही खेलते हैं। आजादी के
अखबारों के आवरण मूल्य में अस्वाभाविक कमी के पीछे भी प्रतिद्वंद्विता की असमान स्थितियां ही हैं और यह खेल मुख्यतः बड़ी पूंजीवाले संस्थान ही खेलते हैं। आजादी के बाद से ही इस प्रवृत्ति ने ध्यान आकर्षित किया था और प्रथम प्रेस आयोग ने सुझाव भी दिया था कि अखबारों की आवरण कीमतों का निर्धारण उनकी कुल पृष्ठों की संख्या के आधार पर निर्धारित हो। आयोग ने एका ...

द वीक के इस रिपोर्ट को भी पढ़ना चाहिए.. ...

द वीक के इस रिपोर्ट को भी पढ़ना चाहिए.. ...
मेरा सोचना सिर्फ इतना है कि टी वी के प्रायोजित प्रचार लोगों का दिमाग कैसे कुंद करता है अब जरा पढ़िए गुजरात सरकार की आर्थिक और प्रशासनिक नीति के बारे में
मेरा सोचना सिर्फ इतना है कि टी वी के प्रायोजित प्रचार लोगों का दिमाग कैसे कुंद करता है अब जरा पढ़िए गुजरात सरकार की आर्थिक और प्रशासनिक नीति के बारे में ... स्रोत : द वीक नौकरी घोटाला के उजागर होने के करीब एक सप्ताह पहले प्रो. हेमंत शाह की पुस्तक “सच्चाई गुजरात की” जो मोदी के दावों को पोल खोलती है, का विमोचन अहमदाबाद में बम्बई हाई कोर्ट के रिटा ...

मीडिया की क्रेडिबिलिटी सवालों के घेरे में ...

मीडिया की क्रेडिबिलिटी सवालों के घेरे में  ...
आजादी मिलने से लेकर अभी तक मीडिया को लेकर सोच में काफी बदलाव आया है। मीडिया पहले समाज सेवा के तौर पर देखा जाता था धीरे-धीरे बिजनेस बन गया और
आजादी मिलने से लेकर अभी तक मीडिया को लेकर सोच में काफी बदलाव आया है। मीडिया पहले समाज सेवा के तौर पर देखा जाता था धीरे-धीरे बिजनेस बन गया और बिजनेस होते हुए भी लोकतंत्र के चौथे पिलर के तौर पर मीडिया अहम भूमिका निभाता रहा। हालांकि कई मौके ऐसे भी आए हैं जब मीडिया पर निष्पक्ष नहीं होने के आरोप लगे हैं औऱ क्रेडिबिलिटी सवालों के घेरे में आई है लेकिन क्य ...

पेड न्यूज और मीडिया की नैतिकता ...

पेड न्यूज और मीडिया की नैतिकता ...
जो स्थिति समाचारपत्र,मीडिया उद्योग को लेकर है वही स्थिति पत्रकारिता के मानदंडों को लेकर है। सरकारें तब मीडिया पर बरसती हैं जब सत्ताधारी दलों को लगता है कि वे
जो स्थिति समाचारपत्र,मीडिया उद्योग को लेकर है वही स्थिति पत्रकारिता के मानदंडों को लेकर है। सरकारें तब मीडिया पर बरसती हैं जब सत्ताधारी दलों को लगता है कि वे घिर गए हैं। दूसरी ओर मालिकों, पत्रकारों द्वारा लगातार तर्क दिया जाता है कि वे स्वयं अपने लिए आचार संहिता बनाएंगे और अपनाएंगे। विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का यह स्टैंड है पर यह लागू कितना ...

शास्त्रीय गायक पंडित पशुपति नाथ का निधन ...

शास्त्रीय गायक पंडित पशुपति नाथ का निधन ...
वाराणसी। प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. पशुपति नाथ मिश्र का रविवार को सुबह दस बजे बीएचयू अस्पताल में निधन हो गया। सीने में संक्रमण से पीड़ित 75 वर्षीय पं. मिश्र
वाराणसी। प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं. पशुपति नाथ मिश्र का रविवार को सुबह दस बजे बीएचयू अस्पताल में निधन हो गया। सीने में संक्रमण से पीड़ित 75 वर्षीय पं. मिश्र को तीन दिन से आईसीयू में रखा गया था। सोमवार की सुबह साढ़े 10 बजे हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार होगा। निधन के बाद रामापुरा आवास पर पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए कलाकारों का तांता लग गय ...

न्यूज़ चैनल्स के धनकुबेरों का बही खाता ? ज़रूरी है ! ...

 न्यूज़ चैनल्स के धनकुबेरों  का बही खाता ? ज़रूरी है ! ...
REEL PICTURE:- न्यूज़ चैनल्स पर मठाधीशनुमा बड़े-बड़े पत्रकार, भ्रष्टाचार के दायरे से इतर, 20-30 साल या 30-40 साल सार्वजनिक जीवन में रहने वाले किसी
REEL PICTURE:- न्यूज़ चैनल्स पर मठाधीशनुमा बड़े-बड़े पत्रकार, भ्रष्टाचार के दायरे से इतर, 20-30 साल या 30-40 साल सार्वजनिक जीवन में रहने वाले किसी नेता के पास 4-5 करोड़ की संपत्ति होने की खबर को ऐसा कह कर बताते हैं मानो ये अरबों-खरबों के बराबर है ! बड़े-बड़े पैनल डिस्कशन कराये जाते हैं कि आखिर नेता करोड़पति कैसे हो जा रहे हैं ? अंदाज़ कुछ ऐसा रहता है, ज ...

एमजे अकबर ने खुशवंत सिंह के बारे में क्या लिखा पढिए ...

एमजे अकबर ने खुशवंत सिंह के बारे में क्या लिखा पढिए ...
खुशवंत सिंह कभी पत्रकारिता वाले पत्रकार नहीं थे, वे एक लेखकीय पत्रकार थे. वे अखबारी लेखन में कलात्मक दास्तानगोई का पुट लेकर आये. टाइम्स ऑफ इंडिया समूह
खुशवंत सिंह कभी पत्रकारिता वाले पत्रकार नहीं थे, वे एक लेखकीय पत्रकार थे. वे अखबारी लेखन में कलात्मक दास्तानगोई का पुट लेकर आये. टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के मुख्य प्रकाशन इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया के संपादक बनने के लिए जब उन्हें आमंत्रित किया गया, तब तक ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ के साथ वे एक उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके थे. लेकिन य ...

हिम्मत हो तो कहिये खुशवंत का जीवन शब्दों का मायाजाल रहा, वो भी दिल्ली वा ...

हिम्मत हो तो कहिये खुशवंत का जीवन शब्दों का मायाजाल रहा, वो भी दिल्ली वा ...
मरने के बाद सरदार खुशवंत सिंह की तारीफ का एंगल समझ में नही आया। बड़ी-बड़ी फोटो और एक जैसे चर्चे, किसी को जैसे पता ही नही की क्या कहे? सही भी है
मरने के बाद सरदार खुशवंत सिंह की तारीफ का एंगल समझ में नही आया। बड़ी-बड़ी फोटो और एक जैसे चर्चे, किसी को जैसे पता ही नही की क्या कहे? सही भी है आखिर खुशवंत ने या उनके परिवार ने इस देश को दिया ही क्या। लेकिन चूँकि छपना है सो सब के सब लग गए अपने छपास के ट्रीटमेंट में। एक ने तो हद ही कर दी, अमर उजाला के गोरखपुर संस्करण में एक ने कहा कि खुशवंत इसलिए मह ...

चैनलों के पर्दे पर उत्तर पूर्व ...

चैनलों के पर्दे पर उत्तर पूर्व ...
अरुणाचल प्रदेश के छात्र नीडो तानिया की दिल्ली के पाश बाजार लाजपतनगर में नस्लीय हत्या और उसकी न्यूज मीडिया में कवरेज ने पिछले साल अक्टूबर में कोई पन्द्रह
आनंद प्रधान की रिपोर्ट। अरुणाचल प्रदेश के छात्र नीडो तानिया की दिल्ली के पाश बाजार लाजपतनगर में नस्लीय हत्या और उसकी न्यूज मीडिया में कवरेज ने पिछले साल अक्टूबर में कोई पन्द्रह दिनों के लिए अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर की यात्रा की दिला दी. ईटानगर के पास रानो हिल्स स्थित राजीव गाँधी विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को पत्रकारिता पढ़ाने गया थ ...

यह क्षुद्र बुद्धि समझती क्यों नहीं! ...

यह क्षुद्र बुद्धि समझती क्यों नहीं!  ...
प्रभात रंजन दीन। हर दिन शब्दों की बुनावट, हर दिन शब्दों की काटपीट, हर दिन शब्दों का संपादन, हर दिन मन में संपादक होने का भाव... यह क्षुद्र बुद्धि इन सबसे
प्रभात रंजन दीन। हर दिन शब्दों की बुनावट, हर दिन शब्दों की काटपीट, हर दिन शब्दों का संपादन, हर दिन मन में संपादक होने का भाव... यह क्षुद्र बुद्धि इन सबसे उबरती ही नहीं। मुझे नहीं मालूम कि क्या लिखता हूं, क्या होता है, कुछ होता भी नहीं, फिर भी मन पता नहीं किस संसार में जीता है, लगता है कि लिखने से बहुत कुछ होता है। मुझे नहीं मालूम कि लिखने का कि ...

ये मीडिया मैनेज नहीं तो और क्या ? ...

ये मीडिया मैनेज नहीं तो और क्या ? ...
चुनावी अंधड़ चल रहा है ! कुछ उड़ जाने वाले हैं और कुछ उड़ा देने वाले हैं ! कुछ का कहना है कि मोदी नाम की "सुनामी" आयी हुई है ! मसलन हर रैली का लाइव
चुनावी अंधड़ चल रहा है ! कुछ उड़ जाने वाले हैं और कुछ उड़ा देने वाले हैं ! कुछ का कहना है कि मोदी नाम की "सुनामी" आयी हुई है ! मसलन हर रैली का लाइव कवरेज, सोने-उठने बैठने तक की खबर ! कोई तीखे सवाल नहीं ! विरोधियों की ज़बर्दस्ती आलोचना ! ये सारा कुछ चल रहा है टी.वी. न्यूज़ चैनल्स के ज़रिये ! हर रैली में करोड़ों रुपये फूंकने वाले मोदी, गरीबों को कभी य ...

2014 में विज्ञापन बाजार में 12 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी की संभावना ...

2014 में विज्ञापन बाजार में 12 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी की संभावना ...
ऐसा लग रहा है कि वर्ष 2014 में विज्ञापन बाजार में 12 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी, जबकि पिछले दो वर्षों के दौरान इसमें 5 से 7 फीसदी बढ़ोतरी ही दर्ज की
ऐसा लग रहा है कि वर्ष 2014 में विज्ञापन बाजार में 12 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी, जबकि पिछले दो वर्षों के दौरान इसमें 5 से 7 फीसदी बढ़ोतरी ही दर्ज की गई। सभी अनुमानों में यही तस्वीर उभर रही है। 83,000 करोड़ रुपये के मीडिया एवं मनोरंजन कारोबार (एमएंडई) में इन दिनों तमाम निराशाजनक संकेतों के बीच क्या यह एक अच्छी और सकारात्मक खबर नहीं है? वहीं ...

‘सुबह स्टंट! शाम को फ्लाइट’! सुबह आरोप, शाम को उड़ान! ...

‘सुबह स्टंट! शाम को फ्लाइट’! सुबह आरोप, शाम को उड़ान! ...
पहले बनाता है, फिर मिटाता है. बनाना और मिटाना उसका दैनिक काम है. वह हमें संसार की ही नहीं खुद अपनी भी क्षणभंगुरता को यथावत दिखाता है.
पहले बनाता है, फिर मिटाता है. बनाना और मिटाना उसका दैनिक काम है. वह हमें संसार की ही नहीं खुद अपनी भी क्षणभंगुरता को यथावत दिखाता है. वह अपने ही सीनों का स्वयंभक्षी है. उसके बनाए सबसे सुंदर सीन उसकी सबसे बेहतरीन खुराक होते हैं. अगर वह ऐसा न करे तो नए सीन किस तरह बनाए? हम बीते शुक्रवार की शाम का एक उदाहरण देखें: एक बड़े मीडिया हाउस ने एक विचार ...

मीडिया की जवाबदेही का दौर ...

मीडिया की जवाबदेही का दौर ...
आम चुनाव के माहौल में मीडिया को कोसने का चलन एक आम बात है। बड़े राजनीतिक दलों से लेकर छोटे-छोटे दल भी इसमें शामिल हैं। पिछले दो चुनावों के दौरान
राममोहन पाठक, वरिष्ठ पत्रकार। नया दौर मीडिया की जवाबदेही का दौर है। इसलिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की यह चिंता स्वाभाविक है कि मीडिया इस दौर में ‘पेड न्यूज’ (धन के बदले खबरें प्रकाशित करना) को बढ़ावा दे रहा है। पत्रकारिता के पवित्र पेशे में इसे गिरावट मानते हुए राष्ट्रपति ने इससे मुक्ति के लिए आत्म-सुधार की प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी है। इंडियन न् ...

धारिणी को दरिद्र मत बनाओ! ...

धारिणी को दरिद्र मत बनाओ! ...
प्रभात रंजन दीन। सहारा समूह के अभिभावक सुब्रत राय आखिरकार गिरफ्तार हो गए। निवेशकों को पैसा लौटाने का मामला इतनी हील-हुज्जतों के बाद इस परिणाम पर
प्रभात रंजन दीन। सहारा समूह के अभिभावक सुब्रत राय आखिरकार गिरफ्तार हो गए। निवेशकों को पैसा लौटाने का मामला इतनी हील-हुज्जतों के बाद इस परिणाम पर पहुंचा है। परिणति तो अभी शेष है। अब सुब्रत राय को सुप्रीम कोर्ट में पुलिस पेश करेगी। लखनऊ पुलिस की कृपा पर वे चार दिन काटेंगे और चार मार्च को न्याय की सर्वोच्च पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। यही पीठ ...

छत्तीसगढ़ में बिना बिजनेस नहीं हो पाती पत्रकारिता ...

छत्तीसगढ़ में बिना बिजनेस नहीं हो पाती पत्रकारिता ...
शैलेंद्र ठाकुर : मैंने पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2002 में दंतेवाडा से ही की. बगैर किसी अनुभव के सीधे ‘नवभारत’ में सिटी रिपोर्टर की नौकरी मिल गई. 12 सौ रुपए
शैलेंद्र ठाकुर : मैंने पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2002 में दंतेवाडा से ही की. बगैर किसी अनुभव के सीधे ‘नवभारत’ में सिटी रिपोर्टर की नौकरी मिल गई. 12 सौ रुपए मासिक मानदेय से शुरुआत हुई थी. 2 साल दंतेवाडा में काम करने के बाद ‘नवभारत’ के जगदलपुर संभागीय कार्यालय में 5 साल काम करने का मौका मिला. इसके बाद दंतेवाडा कार्यालय में बतौर जिला प्रतिनिधि वाप ...

मैजिक की टक्कर से पत्रकार की मौत ...

मैजिक की टक्कर से पत्रकार की मौत ...
सामूहिक विवाह कार्यक्रम की कवरेज लौट रहे एक पत्रकार की सड़क हादसे में मौत हो गई। घटना रविवार देर रात की है। उधर, पत्रकार की बाइक को टक्कर मारने के बाद अनियंत्रित होकर पलटी मैजिक को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है।
प्रतापगढ़ : सामूहिक विवाह कार्यक्रम की कवरेज लौट रहे एक पत्रकार की सड़क हादसे में मौत हो गई। घटना रविवार देर रात की है। उधर, पत्रकार की बाइक को टक्कर मारने के बाद अनियंत्रित होकर पलटी मैजिक को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। मानिकपुर थाना क्षेत्र के लाटतारा गांव निवासी रमेश मौर्य (34) पुत्र शिवशंकर मौर्य माता-पिता के इकलौते बेटे थे। रविवार को रात लग ...

उत्तर पूर्व के साथ भेदभाव में मीडिया भी शामिल है ...

उत्तर पूर्व के साथ भेदभाव में मीडिया भी शामिल है ...
देश की राजधानी में उत्तर पूर्व के लोगों के साथ होनेवाला नस्ली भेदभाव एक ऐसा बर्बर और कड़वा सच है जिसे जानते सब हैं लेकिन सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करने के
देश की राजधानी में उत्तर पूर्व के लोगों के साथ होनेवाला नस्ली भेदभाव एक ऐसा बर्बर और कड़वा सच है जिसे जानते सब हैं लेकिन सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करने के लिए कम ही तैयार होते हैं. चाहे पुलिस-प्रशासन हो या मीडिया या फिर सिविल सोसायटी- सब अलग-अलग कारणों से उससे आँख चुराते हैं या बहुत दबी जुबान में चर्चा करते हैं. अफ़सोस की बात यह है कि दिल्ली और देश क ...

चेहरे के पीछे एक कलंकित और चेहरा है आलोक धन्वा का ...

चेहरे के पीछे एक कलंकित और चेहरा है आलोक धन्वा का ...
बिहार सरकार ने पिछले दिनों साहित्यकार व कवि आलोक धन्वा को संगीत नाटक अकादमी का अध्यक्ष मनोनित किया। पर सरकार और सभ्य समाज के कम ही लोग जानते होंगे
पढिए आलोक धन्वा की कहानी उनकी पूर्व पत्नी की जुबानी बिहार सरकार ने पिछले दिनों साहित्यकार व कवि आलोक धन्वा को संगीत नाटक अकादमी का अध्यक्ष मनोनित किया। पर सरकार और सभ्य समाज के कम ही लोग जानते होंगे कि आलोक धन्वा के चरित्र औश्र चेहरे के पीछे छिपा एक और चरित्र और चेहरा है। अपनी उम्र से आधी उम्र वाली और कभी पटना में पत्रकारिता करने वाली क्रा ...

(2 ) पत्रकारिता के जरिए पहाड़ ढाहने का दंभ भरने वाले भाइयों के लिए ...

 (2 ) पत्रकारिता के जरिए पहाड़ ढाहने का दंभ भरने वाले भाइयों के लिए ...
जन-सामान्य पत्रकारिता के नाम पर जो कुछ भी बाहर से देखता-समझता है, वह असलियत नहीं है, वह तो एक ‘सम्मोहन’ है, वास्तविकता इससे परे है। आम तौर
जन-सामान्य पत्रकारिता के नाम पर जो कुछ भी बाहर से देखता-समझता है, वह असलियत नहीं है, वह तो एक ‘सम्मोहन’ है, वास्तविकता इससे परे है। आम तौर पर पत्रकारिता दिशाहीन हो गई है। इसके लिए पत्रकारों को जिम्मेवार ठहराया जाता है। यह ठीक है कि व्यक्ति से समाज प्रभावित होता है। पत्रकार भी इसी समाज का अंग है। समाज का प्रभाव भी उस पर पड़ना स्वाभाविक है। ...

(1) पत्रकारिता के जरिए पहाड़ ढाहने का दंभ भरने वाले भाइयों के लिए ...

(1) पत्रकारिता के जरिए पहाड़ ढाहने का दंभ भरने वाले भाइयों के लिए  ...
अक्सर जब हम कुछ शुद्धात्म पत्रकारों (ये वे पत्रकार हैं जिन्होंने अपनी सार्थक भूमिका तलाशने की खूब कोशिशें की हैं) के साथ मीडिया पर गंभीर चर्चा पर आगे बढ़ते हैं
अक्सर जब हम कुछ शुद्धात्म पत्रकारों (ये वे पत्रकार हैं जिन्होंने अपनी सार्थक भूमिका तलाशने की खूब कोशिशें की हैं) के साथ मीडिया पर गंभीर चर्चा पर आगे बढ़ते हैं तो वे बेहद संजीदगी से उस चर्चा पर यह कहकर विराम लगा देते हैं कि यार, बस अब मीडिया के मूल चरित्र पर कोई बात मत करो!! गुस्सा आता है। यह प्रतिक्रिया अनायास ही नहीं होती है। वे पत्रकार सा ...

P SAINATH ON THE MEDIA’S COMPULSION TO LIE ...

P SAINATH ON THE MEDIA’S COMPULSION TO LIE ...
“Journalism is the service of power. Either state power, money power or more increasingly the service of corporate
“Journalism is the service of power. Either state power, money power or more increasingly the service of corporate power. Alex Carey summed it all up years ago when he wrote, ‘The 20th century has been characterised by three developments of great political importance – The growth of democracy, the growth of corporate power and the growth of cor ...

राजकीय सम्मान के साथ अमरकांत को अंतिम विदाई ...

राजकीय सम्मान के साथ अमरकांत को अंतिम विदाई ...
हिन्दी साहित्य के अग्रणी कथाकार और भारतीय समाज के दुख-दर्द को सहज-सजग तरीके से चित्रित करने वाले शब्द शिल्पी अमरकांत को मंगलवार दोपहर राजकीय ................................................
हिन्दी साहित्य के अग्रणी कथाकार और भारतीय समाज के दुख-दर्द को सहज-सजग तरीके से चित्रित करने वाले शब्द शिल्पी अमरकांत को मंगलवार दोपहर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। तेलियरगंज स्थित शंकरघाट के विद्युत शवदाह गृह में हरदिल अजीज रचनाकार को विदा करने के लिए हर वर्ग और उम्र के लोग मौजूद रहे। शवदाह गृह के चबूतरे पर रखे जाने के बाद एसपी सिटी की अ ...

साहित्य अकादमी के पूर्व चेयरमैन का निधन ...

साहित्य अकादमी के पूर्व चेयरमैन का निधन ...
हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व चेयरमैन रणधीर ¨सह शास्त्री निवासी बंचारी का मंगलवार को देहात हो गया।
हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व चेयरमैन रणधीर ¨सह शास्त्री निवासी बंचारी का मंगलवार को देहात हो गया। लगभग 82 वर्षीय रणधीर शास्त्री पिछले कई दिनों से अस्वस्थ होने के कारण फरीदाबाद के निजी अस्पताल में उपचाराधीन थे। उनके निधन पर विधायक जगदीश नायर, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, राजगोपाल, देवेश कुमार, डिगंबर बंचारी, राजेंद्र नंबरदार, अरुण कुमार, युद्धवीर जेल ...

मीडिया कारोबार के खिलाफ मंत्रालय ने उठाए नकारात्मक कदम ...

मीडिया कारोबार के खिलाफ मंत्रालय ने उठाए नकारात्मक कदम  ...
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पिछले कुछ समय से मानसिक रोगी की तरह व्यवहार कर रहा है। करीब 83,000 करोड़ रुपये मूल्य के मीडिया एवं मनोरंजन कारोबार के
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पिछले कुछ समय से मानसिक रोगी की तरह व्यवहार कर रहा है। करीब 83,000 करोड़ रुपये मूल्य के मीडिया एवं मनोरंजन कारोबार के लिए नीति निर्माता की भूमिका निभाने वाले इस मंत्रालय ने पिछले कुछ महीनों में कई फौरी और नकारात्मक कदम उठाए हैं। इनमें से कुछ कदम तो ऐसे हैं, जो मंत्रालय द्वारा अभी तक किए गए अच्छे काम पर पानी फेर सकते हैं। ...

मदारी की तरह मीडिया को नचाने में लगी हैं राजनीतिक पार्टियां ...

मदारी की तरह मीडिया को नचाने में लगी हैं  राजनीतिक पार्टियां  ...
मदारी जिस तरह बंदर नचाता है, उसी तरह राजनीतिक पार्टियां मीडिया को नचाने में लगी हैं। एक बड़ा रंगमंच सजा है। जनता न्यूज चैनल देखकर कहती है कि यही
मदारी जिस तरह बंदर नचाता है, उसी तरह राजनीतिक पार्टियां मीडिया को नचाने में लगी हैं। एक बड़ा रंगमंच सजा है। जनता न्यूज चैनल देखकर कहती है कि यही सबसे बड़ी ताकत है। हम इस सिस्टम के भीतर बैठे हैं, हम देख रहे हैं मीडिया की ताकत की सच्चाई को। जो मजा दे रहा है, जिसे देखकर मजा मिल रहा है, उसे दिखाया जा रहा है। अगर पत्रकार हैं तो दिल पर हाथ रखकर बोलिए ...

दो अखबारों के सम्पादकों ने मेरा यह लेख छापने से मना कर दिया ...

दो अखबारों के सम्पादकों ने मेरा यह लेख छापने से मना कर दिया ...
Gunjan Sinha। दो अखबारों के सम्पादकों ने मेरा यह लेख छापने से मना कर दिया । लेकिन कोई न सुने तो अकेले में गाना, - कोई न छापे, फेसबुक से कौन रोक
Gunjan Sinha। दो अखबारों के सम्पादकों ने मेरा यह लेख छापने से मना कर दिया । लेकिन कोई न सुने तो अकेले में गाना, - कोई न छापे, फेसबुक से कौन रोक सकता है? पढ़ना है पढ़िए, न पढ़ना है तो मत पढ़िए। - आभासी दौर : अस्मिता की त्रासदी... इंटरनेट के एड्रेस बार में टाइप करिये - 'सुनंदा' – और सुझाव बजबजाने लगते हैं -'सुनंदा पुष्कर हॉट'। यू ट्यूब पर ...

पत्रकार से बेहतर जिंदगी बिता रहे हैं फल-सब्जीवाले ...

पत्रकार से बेहतर जिंदगी बिता रहे हैं फल-सब्जीवाले ...
मैं व्यक्तिगत तौर पर फल-सब्जी वाले से लेकर तमाम रेहड़ी वालों की मेहनत का कद्रदान हूं। हमेशा उनकी मदद करने को इच्छुक रहता हूं। आज रविवार को फुर्सत के
कारोबार से कमाई एक लाख महीना मगर आयकर चोरी ताल ठोककर 0 फल वाले की कमाई एक लाख महीना मगर इनकम टैक्स से परहेज 0 मगर 30 हजार कमाने वाले पत्रकार-इंजीनियर आयकर भरने को मजबूर 0 आयकर विभाग डिफॉल्टर के पीछे मगर उसके जाल में नए आयकरदाता नहीं राय तपन भारती, आर्थिक पत्रकार/दिल्ली मैं व्यक्तिगत तौर पर फल-सब्जी वाले से लेकर तमाम रेहड़ी वालों की ...

बिना एक पैसा खर्च के राज्यसभा! ...

बिना एक पैसा खर्च के राज्यसभा! ...
।। हरिवंश।।। न कोई पूर्व सूचना थी, न आभास या एहसास कि बिहार जद (यू) से राज्यसभा जाना होगा. अब तक पत्रकारिता में, बाहर से राजनीति का दरस-परस
-राजनीतिक पाठशाला के आरंभिक अनुभव- ।। हरिवंश।।। न कोई पूर्व सूचना थी, न आभास या एहसास कि बिहार जद (यू) से राज्यसभा जाना होगा. अब तक पत्रकारिता में, बाहर से राजनीति का दरस-परस होता था, घेरे के (राजनीति) बाहर की दुनिया की. दर्शक की भूमिका में. पत्रकारिता में रहते देखा, सुना और पढ़ा कि मौजूदा राजनीति में राज्यसभा वगैरह जाना कितना कठिन हो गया है ...

इंडियन एक्सप्रेस ने छापा जशोदाबेन का इंटरव्यू, अब पति (मोदी) क्या लौटें ...

इंडियन एक्सप्रेस ने छापा जशोदाबेन का इंटरव्यू,  अब पति (मोदी) क्या लौटें ...
आज इंडियन एक्सप्रेस में उस अभागी स्त्री जशोदाबेन का इंटरव्यू है, जिससे 17 साल की उम्र में नरेन्द्र मोदी ने शादी की। जल्दी ही उसे अपनी किस्मत पर छोड़ कर मोदी
आज इंडियन एक्सप्रेस में उस अभागी स्त्री जशोदाबेन का इंटरव्यू है, जिससे 17 साल की उम्र में नरेन्द्र मोदी ने शादी की। जल्दी ही उसे अपनी किस्मत पर छोड़ कर मोदी 'देश भ्रमण' को निकल गए और कभी नहीं लौटे। ससुराल जाने पर बहू को यह कर वापस भेज दिया गया कि अभी जाओ पढ़ो। वह लौटी, मदद मांगकर पढ़ाई पूरी की, नौकरी की और अकेले रहते रिटायर हो गई। कहती हैं, अब पति ...

काजल की कोठरी में केजरीवाल...!! ...

 काजल की कोठरी में केजरीवाल...!! ...
तारकेश। बीवी का मारा बेचारा किसी से अपनी दुर्दशा कह नहीं सकता। इसी तरह सत्ता को कोस कर सत्ता पाने वाला भी यह कहने की हालत में नहीं रहता कि सब कुछ इत
तारकेश। बीवी का मारा बेचारा किसी से अपनी दुर्दशा कह नहीं सकता। इसी तरह सत्ता को कोस कर सत्ता पाने वाला भी यह कहने की हालत में नहीं रहता कि सब कुछ इतना आसान नहीं है। व्यवहारिक जिंदगी में कई बार एेसा होता है कि हमें बाहर से जो चीज जैसी दिखाई देती है, वह वस्तुतः वैसी होती नहीं। खरी बात यह कि सत्ता हो या राजनीति बाहर रहते हुए निंदा - आलोचना करना जितना ...

मेले का मोह त्यागें और अकेले चल पड़ें... ...

मेले का मोह त्यागें और अकेले चल पड़ें... ...
प्रभात रंजन दीन। जीवन में कुछ भी आखिरी नहीं होता और न जीवन में कुछ प्रारम्भ होता है। ये अंत और प्रारम्भ, सब मनोवैज्ञानिक झमेला है। प्रकृति का चक्र इतना
प्रभात रंजन दीन। जीवन में कुछ भी आखिरी नहीं होता और न जीवन में कुछ प्रारम्भ होता है। ये अंत और प्रारम्भ, सब मनोवैज्ञानिक झमेला है। प्रकृति का चक्र इतना भरमाता है कि कभी अंत और प्रारम्भ का अंतर दिखता है तो कभी अंत और प्रारम्भ एक-दूसरे में विलीन हो जाता है। यही कभी मेला लगता है तो कभी झमेला। 1950 में एक फिल्म आई थी 'मेला'। बाद की पीढिय़ों ने भी व ...

कठखोदी की चोंच में फंसा लोकतंत्र... ...

 कठखोदी की चोंच में फंसा लोकतंत्र... ...
प्रभात रंजन दीन। कठखोदी की चोंच में लोकतंत्र... जबसे 'आम आदमी पार्टी' ने दिल्ली विधानसभा में जीत और अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की
प्रभात रंजन दीन। कठखोदी की चोंच में लोकतंत्र... जबसे 'आम आदमी पार्टी' ने दिल्ली विधानसभा में जीत और अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल की है, तबसे लेकर आज मुख्यमत्री का जनता दरबार होने तक जो कुछ भी हुआ, यही लगा कि कठखोदी की चोंच में लोकतंत्र फंस गया है। आप सब जानते ही होंगे कि कठखोदी चिडिय़ा एक जगह स्थिर नहीं बैठती और जिस भी डाल या लक ...

पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है? ...

पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है?  ...
‘पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है?’ हिंदी के महान कवि मुक्तिबोध 1960 के दशक में अपने मित्रों से यह सवाल उनकी विचारधारा के संबंध में पूछते थे। आज हम यही
-प्रमोद रंजन इमां मुझे रोके हैं, जो है खींचे मुझे कुफ्र काबा मेरे पीछे है, कलीसा मेरे आगे! - मिर्जा गालिब ‘पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है?’ हिंदी के महान कवि मुक्तिबोध 1960 के दशक में अपने मित्रों से यह सवाल उनकी विचारधारा के संबंध में पूछते थे। आज हम यही सवाल आम आदमी पार्टी (आप) से पूछना चाहते हैं। लगभग एक साल पहले बनी इस पार् ...

एक हाइप्रोफाइल मौत और मीडिया ...

एक हाइप्रोफाइल मौत और मीडिया ...
सुनंदा पुष्कर की दिल्ली के एक होटल में रहस्यमयी हालात में मृत्यु ऐसी दुखद खबर है, जिसका सच जानने की अभिरुचि एक बड़े वर्ग में है. केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की
सुनंदा पुष्कर की दिल्ली के एक होटल में रहस्यमयी हालात में मृत्यु ऐसी दुखद खबर है, जिसका सच जानने की अभिरुचि एक बड़े वर्ग में है. केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी होने के अलावा सुनंदा की अपनी पहचान भी रही है. इस नाते मीडिया उस खबर की छानबीन करे, तो इसमें सामान्यत: आपत्ति का कोई कारण नजर नहीं आयेगा. किंतु क्या यह भारत के लिए इतनी बड़ी घटना ह ...

आप अब आम नहीं रही ...

आप अब आम नहीं रही  ...
कोई इंसान व्यक्तिगत तौर पर ईमानदार है इस बात का महत्व है ! मगर सार्वजनिक जीवन में निजी ईमानदारी तभी मायने रखती जब उसका उपयोग सार्वजनिक जीवन
कोई इंसान व्यक्तिगत तौर पर ईमानदार है इस बात का महत्व है ! मगर सार्वजनिक जीवन में निजी ईमानदारी तभी मायने रखती जब उसका उपयोग सार्वजनिक जीवन में हो ! लेकिन अरविन्द केजरीवाल और उनकी "आप" यहाँ पर विभाजन रेखा खींच बैठे हैं ! शुरूवात शीला दीक्षित से करते हैं! ये वहीं शीला जी हैं जिन पर और जिनकी सरकार पर केजरीवाल ने बे-ईमानी का आरोप बुरी तरह लगाया ! मग ...

आशुतोष, ‘आप’ और मीडिया ...

आशुतोष, ‘आप’ और मीडिया ...
आज टीवी मीडिया के दिग्गज पत्रकार आशुतोष का इस्तीफा सोशल मीडिया और टीवी पर छाया रहा। कई लोगों ने उनके इस्तीफे और आप से जुड़ने की अटकलों पर सवाल
आज टीवी मीडिया के दिग्गज पत्रकार आशुतोष का इस्तीफा सोशल मीडिया और टीवी पर छाया रहा। कई लोगों ने उनके इस्तीफे और आप से जुड़ने की अटकलों पर सवाल उठाए। अन्य का ये कहना था कि ये सैद्धांतिक रूप से एक सही फैसला था जो सही समय पर लिया गया। पर क्या इससे आप को दी गई मीडिया कवरेज पर सवाल उठाना वाजिब है? 8 दिसंबर के बाद से आम आदमी पार्टी मीडिया में छ ...

आप का तिलिस्म और खतरे की घंटी ...

आप का तिलिस्म और खतरे की घंटी ...
विंस्टन चर्चिल कहते थे कि राजनीति में एक हफ्ता लंबा समय होता है। यही बात अब भारतीय राजनीति में भी सही साबित हो रही है। आठ दिसंबर के बाद के चार हफ्तों
आशुतोष । विंस्टन चर्चिल कहते थे कि राजनीति में एक हफ्ता लंबा समय होता है। यही बात अब भारतीय राजनीति में भी सही साबित हो रही है। आठ दिसंबर के बाद के चार हफ्तों में राजनीति काफी बदल गई है। मतगणना के समय किसी ने सोचा नहीं था कि राजनीति में कोई बड़ा बदलाव आने वाला है। लेकिन आम आदमी पार्टी यानी 'आप' की जीत ने पूरा माहौल बदल दिया है। एक साल पहले बनी पार् ...

कारपोरेट मीडिया पर अभी भी आप की रणनीति स्पष्ट नहीं ...

कारपोरेट मीडिया पर अभी भी आप की रणनीति स्पष्ट नहीं ...
उद्योग जगत में कॉन्ट्रैक्ट नौकरी का चलन जड़ तक पहुंच चुका है। ऐसे में उसे खत्म करने का आप का वादा केवल वादा ही रह जाएगा क्योंकि इस मामले में उसे
उद्योग जगत में कॉन्ट्रैक्ट नौकरी का चलन जड़ तक पहुंच चुका है। ऐसे में उसे खत्म करने का आप का वादा केवल वादा ही रह जाएगा क्योंकि इस मामले में उसे कॉर्पोरेट मीडिया को भी आड़े-हाथों लेना पड़ेगा। अभी तक केजरीवाल और उनकी पार्टी ने कॉर्पोरेट मीडिया में चल रहे श्रम कानूनों के उल्लंघन और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट नहीं की है। शिव ...

सोना वाले शोभन सरकार को मीडिया ने क्यों भुला दिया भाई ??!! ...

सोना वाले शोभन सरकार को मीडिया ने क्यों भुला दिया भाई ??!! ...
आज लगभग सभी अखबारों ने क्रायोजनिक इंजन के सहारे GSLV D5 के लॉन्च की खबर को पेज-1 पर प्रमुखता दी है. Times of India ने तो अंदर एक पूरा पेज दिया है, जो पढ़ने
आज लगभग सभी अखबारों ने क्रायोजनिक इंजन के सहारे GSLV D5 के लॉन्च की खबर को पेज-1 पर प्रमुखता दी है. Times of India ने तो अंदर एक पूरा पेज दिया है, जो पढ़ने लायक है. पता नहीं हिन्दी टीवी चैनल्स में शाम की मीटिंग में क्या होता है??!!! अरे भाई, मोदी और केजरीवाल फिनॉमिना से भी कभी बाहर निकलेंगे आप??!! मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर क्रायोजनिक इंज ...

पत्रकारिता की गुणवत्ता के सुधार के लिए मालिक करें 10 फीसदी राशि खर्च ...

पत्रकारिता की गुणवत्ता के सुधार के लिए मालिक करें 10 फीसदी राशि खर्च  ...
भारत में पत्रकारिता की गुणवत्ता के सुधार के बारे में मेरा मानना है कि देश के मीडिया मालिकों और प्रकाशकों को अपने कुल राजस्व का कम से कम 10 फीसदी हि
वनिता कोहली खांडेकर / नई दिल्ली। देश के 83 हजार करोड़ रुपये के मीडिया और मनोरंजन उद्योग के बारे में इस साल कुछ उम्मीदें मैं भी पाल रही हूं। भारत में पत्रकारिता की गुणवत्ता के सुधार के बारे में मेरा मानना है कि देश के मीडिया मालिकों और प्रकाशकों को अपने कुल राजस्व का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा संपादकीय कर्मचारियों मसलन संवाददाताओं, संपादकों, उप सं ...

एक पत्रकार का अपहरण-(आपबीती)-(2) ...

एक पत्रकार का अपहरण-(आपबीती)-(2) ...
फिर अपराधी दोनों को कुछ दूर खेतों में ले गए और पूछ ताछ करने लगे। उनमें से एक मनोज जी को गलियाने लगा।-
अरुण सेठी। फिर अपराधी दोनों को कुछ दूर खेतों में ले गए और पूछ ताछ करने लगे। उनमें से एक मनोज जी को गलियाने लगा।- ‘‘साला, बड़का मैनेजर बनता है, बैंक में लॉन लेने के लिए जाते है तो टहलाता है, बाबा बनता है, अब बताओ।" उसकी बातों से लगा कि वे पीएनबी बैंक का मैजेनर समझ कर दोनों का अपहरण किया है। यह बात भी समझ आ गई कि ये लोग मुझसे तुरंत पहले निकले ...
Latest News दैनिक जागरण में छटनी की फिर तैयारी, सुधीर बैंसला-राजू सजवान का तबादला मध्‍यप्रदेश में नंबर वन बना हुआ है बंसल न्‍यूज ब्रेकिंग न्यूज....आनंद बाजार पत्रिका ने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों को लागू किया 32 प्रतिशत बढ़ा गूगल का मुनाफा दूरदर्शन पर प्रतिबंधित हुई हेमा, जया की फिल्में सहारा ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा एक नया प्रस्ताव EC launches Voter Educational Channel पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश है सीरिया अकमल और उसके परिवार के सदस्यों ने किया मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार सलीम खान ने उर्दू में शुरू की नरेंद्र मोदी की वेबसाइट द हिंदू के कैंटीन में नानवेज की मनाही मजीठिया को लागू कराने के लिए घेराबंदी शुरू, मध्यप्रदेश में श्रमायुक्त ने जारी किया आदेश पांच दिन तक क्यों गायब थे पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार शुक्ला दैनिक भास्कर के एक कर्मचारी की अपील, मजीठिया के लिए आगे आए पत्रकार यूबीआई के जरिए 'कॉल मनी' का भी धंधा करता है सहारा फिर बिक रहा चौथा खम्भा सारधा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन की पत्नी और बेटे सहारा ने सुप्रीम कोर्ट से किया खाते से रोक हटाने का अनुरोध ग्रेटर नोएडा से मीडियाकर्मी सौरभ श्रीवास्तव की बाइक को ले उड़े चोर Scribes bodies demand implementation of Majithia Wage Board चुनाव आयोग ने सभी मीडिया हाउसों को पत्र लिख ओपिनियन पोल पर हड़काया चुनाव में इस बार विज्ञापनी मलाई खबरिया टीवी चैनल चट कर गए Sahara says sorry for slamming Sebi in newspaper ads ट्रास जेंडर के बहाने चिकोटी में मीडिया पर साधा निशाना पहले बना आईपीएस, पकड़ा गया तो पत्रकार बन हड़काने लगा पुलिस वालों को मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (8) प्रणव राय को कसकर डांटा था मनमोहन सिंह ने मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (7) विशेष अधिकार खत्म हुए तो विफर गए संपादक मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (6) सिद्धार्थ वरदराजन को नहीं चाहते थे दीक्षित मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (5) वीर सांघवी ने पहले से ही स्वीकृत प्रश्न पूछे मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (4) यूपीए वन की उम्र शेखर की नजर में महज छह माह मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (3) शिवशंकरन की नियुक्ति में हुआ मीडिया का इस्तेमाल मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (2) हिंदुस्तान टाइम की शोभना भारती ने कहा, बाल रंग रही थीं मीडिया पर संजय बारू के खुलासे (1) सत्ता के निकट तीन तरह के पत्रकार सुधीर चौधरी को देखते ही मुझे गाँव का मंगरू चोर याद आता है... इंडिया टीवी के‘आप की अदालत’ को ‘पेड न्यूज’ करार देते हुए कांग्रेस पहुंची आयोग के दरवाजे आकाशवाणी पटना के उर्दू बुलेटिन ‘‘इलाकाई खबरें’’ ने पूरे किये 25 साल नक़वी जी पर ये तोहमत आँकड़ों पर खरी नहीं उतरती The Sun's sports editor to leave after 29 years with Murdoch's group वाशिंगटन पोस्ट और गार्जियन को संयुक्त रूप से मिला पुलित्जर पुरस्कार आपबीतीः मेरे कर्जदार हैं सांसद व पत्रकार हरिवंश सिंह और प्रभात खबर चैनल वन के चेयरमैन जहीर अहमद, उस्मान अहमद, विवेक अग्रवाल और पप्पू सिंह के खिलाफ शिकायत यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व सीएमडी अर्चना भार्गव का कारनामा पत्रकारों को ठगने में लालू और नीतीश एक जैसे चुनावी किताबों की फेहरिस्‍त में आज एक और नाम, अंबानी की पोलखोल गैस वार्स वाराणसी में तरफदारी करने आए पत्रकार राजनाथ तिवारी की पुलिस वालों ने की जमकर पिटाई शक, शक्की, शक्काइटिस केबल संचालक पुष्कर शुक्ला हत्याकांड में धर्मेंद्र दीनू की जमानत अर्जी खारिज वाराणसी के समाचार पत्र अभिकर्ता को भातृशोक कांग्रेस में वाराणसी में प्रवक्ता को लेकर ही रार, कहा मीडिया सेल ने किया तैनात दैनिक भास्कर, दिल्ली से जुडे रहे रफीक विसाल पहुंचे नई दुनिया, इंदौर