आपबीती! मुकेश सिंह, घोर आस्तिक, अद्भुत संचार क्षमता है उनमें फेक एनकाउंटर! शास्त्र जरूरी हैं, विज्ञान नहीं: स्मृति ईरानी Government of India and UNDP Media Fellowships on Decentralized Planning - 2015ममता बनर्जी सारदा मीडिया की सबसे बड़ी लाभार्थीभूमि कारोबारी बना जनसंदेश का संपादकनेताओं, नौकरशाहों और दलालों के गठजोड़ की उपज है यादव सिंह मीडिया में जाब ही जाबMP govt to hold fresh meetings to discuss Majithia Wage Board दैनिक जागरण के वरिष्ठ समाचार संपादक जगदीश जोशी को पितृशोक वरिष्ठ पत्रकार आशीष मिश्र के पिताजी के निधन से पत्रकार जगत शोकाकुल‘‘सैफई महोत्सव में इस बार पंजाबी तड़का लगायेंगे हंसराज हंस’’हम सब हरामज़ादे हैं..... पुरखों की कसम खाकर कहता हूँ-डॉ.संजीव सिंगला बने द प्रेस कल्ब कालांवाली के प्रधानइंडिया न्यूज के मुख्य संपादक दीपक चौरसिया के पिता जी का देहावसानहैदराबाद में अपना कैंपस खोलेगी गूगलवाजपेयी के पीए शिवकुमार को ‘अटल सम्मान’डोरीलाल अग्रवाल राष्ट्रीय मेधावी विकलांग छात्रवृत्ति परीक्षा 24 कोप्रभात खबर देवघर के संपादक को हिंदी भी नहीं आती!इंडिया टीवी से कार्टूनिस्ट मुकेश का इस्तीफ़ासर्वोदय की पत्रिका भूमिपुत्र के संपादक रह चुके वैद्य का निधनपं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान विनय को जागरण के मालिक पहुंचे मोदी के दरवाजे, चार करोड़ दान भी दिए नईदुनिया जाने वालों को गद्दार कहा, अब खुद ही चले आए50वें हफ्ते का टीआरपीः अंबानी के प्रकोप से आईबीएन-7 गर्त में दैनिक भास्कर, ग्वालियर के संपादक सुनील शुक्ला का इस्तीफा, पहुंचे नई दुनिया भोपाल वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मिश्र को पितृशोकसहारा के साथ जुड़े रहे ताहिर अब्बास अब हमारे बीच नहीं रहेकेजी न्यूज के स्टूडियो में दिखा मीडिया का बदरंग चेहरापीएफ पर इस साल भी 8.75 प्रतिशत ब्याजदैनिक जागरण मुजफ्फरपुर के वरीय संवाददाता शिशिर कुमार दे सकते हैं इस्तीफाउपमन्‍यु केस: रेप पीड़ित छात्रा ने मुख्‍यमंत्री को भेजा पत्रमुनव्वर राणा को साहित्य अकादमी पुरस्कारममता बनर्जी ने पीएसीएल के मालिक निर्मल सिंह भंगू को लेकर उठाए सवाल, कहा गिरफ्तार करे सरकारटीटीएन से जुड़े संदीप भारद्वाज, बने डिस्ट्रिव्यूशन हेडहादसे में यू बांग्ला चैनल के संवाददाता गंभीर रूप से घायलभास्कर न्यूज बंद पर कश्मीर में माइक लिए एंठ रहा है स्टिंगरदैनिक भास्‍कर को दो और झटकाजनसंदेश प्रबंधन पर अब कसेगा पुलिस का शिकंजा, पीएफ विभाग ने थाने में दी तहरीरAll upnews का ट्रायल बुधवार सेकाका साहेब कालेलकर सम्मान से सम्मानित होंगे वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदीGermany fellowships for Indian journalistsईटीवी लांच करने जा रहा है 12 भाषाओं में न्यूज वेबसाइट दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर के विज्ञापन प्रबंधक अरविंद नारायण का इस्तीफा या अल्लाह--देखकर शर्मिंदा हूं, आहत हूंमीडिया मीमांसा! जातीय श्रेष्ठता का कुत्सित चेहरापाक गम में! प्रोड्यूसर ने कहा, उससे यह नहीं हो पाएगा बीएसईएस के एचआर हेड पर प्रमोशन देने के बहाने छेड़छाड़ का आरोपएआरवाई की एंकर सनम बलोच इतनी भावुक हो गईं कि उनके आंसू निकल पड़ेआरोपियों की गिरफ्तारी न होता देख पत्रकार उमेश राजपूत हत्या की होगी सीबीआई जांचसुब्रत से कोर्ट ने कहा, आरबीआई की अनुमति से ही विदेश से आएगा धन

फेक एनकाउंटर! शास्त्र जरूरी हैं, विज्ञान नहीं: स्मृति ईरानी ...

 फेक एनकाउंटर!   शास्त्र जरूरी हैं, विज्ञान नहीं: स्मृति ईरानी  ...
स्मृति ईरानी से इंटरव्यू के लिए समय लेने के लिए मुझे थोड़ा झूठ का सहारा लेना पड़ा। मैंने अपने नाम के आगे आचार्य लगा लिया। सोचा था डॉ. तो हूं ही, अगर पूछा तो कह दूंगा कि संस्कृत
मुकेश कुमार! संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से इंटरव्यू के लिए समय लेने के लिए मुझे थोड़ा झूठ का सहारा लेना पड़ा। मैंने अपने नाम के आगे आचार्य लगा लिया। सोचा था डॉ. तो हूं ही, अगर पूछा तो कह दूंगा कि संस्कृत में आचार्य कहा जाऊंगा। इससे वे और भी खुश हो जाएंगी। झूठ भी इसलिए बोलना पड़ा था कि लगातार विवादों में फंसने के कारण वे इंटरव्यू देने से बच रह ...

बटरिंग ' से ज्यादा कुछ नहीं चैनलों का महामंच...!! ...

बटरिंग ' से ज्यादा कुछ  नहीं चैनलों का महामंच...!! ...
क्या खबरों की दुनिया में भी कई ' उपेक्षित कोने ' हो सकते हैं। मीडिया का सूरतेहाल देख कर तो कुछ एेसा ही प्रतीत होता है। खबरों की भूख शांत करने औऱ देश- दुनिया की पल - पल की खबरों के मामले में अपडेट रहने के लिए घर पर होने के दौरान चैनलों को निहारते रहना आदत सी बन चुकी है और मजबूरी भी। लेकिन
तारकेश कुमार ओझा! क्या खबरों की दुनिया में भी कई ' उपेक्षित कोने ' हो सकते हैं। मीडिया का सूरतेहाल देख कर तो कुछ एेसा ही प्रतीत होता है। खबरों की भूख शांत करने औऱ देश- दुनिया की पल - पल की खबरों के मामले में अपडेट रहने के लिए घर पर होने के दौरान चैनलों को निहारते रहना आदत सी बन चुकी है और मजबूरी भी। लेकिन पता नहीं क्यों पिछले कुछ दिनों से मुझे ...

सम्पादक जी, ये तो ना करिए, ये देश आपका ऋणी रहेगा ...

सम्पादक जी, ये तो ना करिए, ये देश आपका ऋणी रहेगा ...
Nadim S. Akhter। चिंता मत करिए. -अच्छे दिन- आ गए हैं. क्या यूपी, क्या एमपी और क्या दिल्ली और क्या भारत-क्या इंडिया...ऐसे -अच्छे दिनों- की ख्वाहिश इस देश की जनता ने तो नहीं ही की थी. फिर ये किसके अच्छे दिन हैं?? फैसला आप कीजिए.
Nadim S. Akhter। चिंता मत करिए. -अच्छे दिन- आ गए हैं. क्या यूपी, क्या एमपी और क्या दिल्ली और क्या भारत-क्या इंडिया...ऐसे -अच्छे दिनों- की ख्वाहिश इस देश की जनता ने तो नहीं ही की थी. फिर ये किसके अच्छे दिन हैं?? फैसला आप कीजिए. ऩए-नवेले संगठन, नए-नए चेहरे टीवी की बहस में जगह पा रहे हैं. वो जितना जहर उगलेंगे, उतनी ही उनकी दुकान चलेगी. शायद -आका- ...

जो लोकशाही के निगहबान थे, वे बन गए चारण ...

जो लोकशाही के निगहबान थे, वे बन गए चारण ...
पुण्य प्रसून वाजपेयी! साल भर पहले राष्ट्रपति की मौजूदगी में राष्ट्रपति भवन में ही एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल ने अपना पच्चीसवां जन्मदिन मना लिया। तब कहा गया कि मनमोहन सिंह का दौर है। कुछ
पुण्य प्रसून वाजपेयी! साल भर पहले राष्ट्रपति की मौजूदगी में राष्ट्रपति भवन में ही एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल ने अपना पच्चीसवां जन्मदिन मना लिया। तब कहा गया कि मनमोहन सिंह का दौर है। कुछ भी हो सकता है। पिछले दिनों एक न्यूज चैनल ने अपने एक कार्यक्रम के 21 बरस पूरे होने का जश्न मनाया तो उसमें राष्ट्रपति समेत प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के अलावा नौकरशाह, ...

एक त्रासदी का खबरनामा ...

एक त्रासदी का खबरनामा ...
-मनोज कुमार तीस बरस का समय कम नहीं होता है। भोपाल के बरक्स देखें तो यह कल की ही बात लगती है। 2-3 दिसम्बर की वह रात और रात की तरह गुजर जाती किन्तु ऐसा हो न सका। यह तारीख न केवल भोपाल के इतिहास में बल्कि दुनिया की भीषणतम त्रासदियों में शुमार हो गया है। यह कोई मामूली दुर्घटना नहीं थी बल्कि यह त्रासदी थी। एक ऐसी त्रासदी जिसका दुख, जिसकी पीड़ा और इससे उपजी अगिनत तकलीफें हर पल इस बात का स्मरण कराती रहेंगी कि साल 1984 की वह 2-3 दिसम्बर की आधी रात कितनी भयावह थी।
-मनोज कुमार तीस बरस का समय कम नहीं होता है। भोपाल के बरक्स देखें तो यह कल की ही बात लगती है। 2-3 दिसम्बर की वह रात और रात की तरह गुजर जाती किन्तु ऐसा हो न सका। यह तारीख न केवल भोपाल के इतिहास में बल्कि दुनिया की भीषणतम त्रासदियों में शुमार हो गया है। यह कोई मामूली दुर्घटना नहीं थी बल्कि यह त्रासदी थी। एक ऐसी त्रासदी जिसका दुख, जिसकी पीड़ा और इस ...

सत्य की खोज में खड़ा सिस्टम यादव सिंह के “सत्य” में समाहित हो चुका है ...

सत्य की खोज में खड़ा सिस्टम यादव सिंह के “सत्य” में समाहित हो चुका है ...
सत्य की खोज पुलिस से शुरू होती हुई मीडिया के रास्ते चलती हुई जांच कमीशनों की दहलीज़ पार कर न्याय की तराजू पकडे अदालत की अंतिम मंजिल तक जाती है. यहाँ भी कई सीढ़ियों पर
सड़ते सिस्टम में फलते-फूलते यादव सिंह, आखिर निदान क्या है ? एनके सिंह! सत्य की खोज पुलिस से शुरू होती हुई मीडिया के रास्ते चलती हुई जांच कमीशनों की दहलीज़ पार कर न्याय की तराजू पकडे अदालत की अंतिम मंजिल तक जाती है. यहाँ भी कई सीढ़ियों पर सत्य की खोज होती है. अगर यह खोज आगे बड़ी भी तो सर्वोच्च न्यायलय की अंतिम चौखट पर जा कर ख़त्म हो जाती है. इनकम टै ...

मक्खी मीडिया बनाम मधुमक्खी मीडिया ...

मक्खी मीडिया बनाम मधुमक्खी मीडिया ...
अब यह तो मोदी ही जानते हैं कि उन्होंने मीडिया पर तंज कसने के लिए मक्खी बनाम मधु मक्खी ही क्यों चुनी .
अब यह तो मोदी ही जानते हैं कि उन्होंने मीडिया पर तंज कसने के लिए मक्खी बनाम मधु मक्खी ही क्यों चुनी . मोदी कहते हैं कि पत्रकारों को मक्खी नहीं होना चाहिए जो गंदगी पर बैठती है और गंदगी फैलाती है . पत्रकार को तो मधुमक्खी की तरह होना चाहिए जो शहद पर बैठती है और उसकी राह में आने वाले को डंक मारती है . सवाल उठता है कि अगर हर कोई शहद पर ही बैठेगा तो गंदग ...

अमित शाह ने किया ‘मैनेजमेंट गुरू नरेंद्र मोदी’ का विमोचन ...

अमित शाह ने किया ‘मैनेजमेंट गुरू नरेंद्र मोदी’ का विमोचन ...
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने डायमंड बुक्स से प्रकाशित हिमांशु शेखर की पुस्तक ‘मैनेजमेंट गुरु नरेंद्र मोदी’ का विमोचन किया. इस मौके पर श्री शाह ने ऐसी पुस्तक के प्रकाशन के लिए डायमंड बुक्स के निदेशक श्री नरेंद्र वर्मा को बधाई दी और कहा की आप आगे भी ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन करें. अमित शाह ने कहा की यह एक ऐसी पुस्तक है
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने डायमंड बुक्स से प्रकाशित हिमांशु शेखर की पुस्तक ‘मैनेजमेंट गुरु नरेंद्र मोदी’ का विमोचन किया. इस मौके पर श्री शाह ने ऐसी पुस्तक के प्रकाशन के लिए डायमंड बुक्स के निदेशक श्री नरेंद्र वर्मा को बधाई दी और कहा की आप आगे भी ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन करें. अमित शाह ने कहा की यह एक ऐसी पुस्तक है जिसमे ...

तारा शाहदेव और मीडिया का ''धर्मपरिवर्तन'' ...

तारा शाहदेव और मीडिया का ''धर्मपरिवर्तन'' ...
यह ख़बर आज के इक्का-दुक्का अख़बारों के इक्का-दुक्का संस्करणों में ही किसी कोने पर है कि रांची की सीजेएम कोर्ट ने तारा शाहदेव प्रकरण में सिर्फ ''दहेज प्रताड़ना'' के आरोप का संज्ञान लिया है। राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज़ तारा शाहदेव के जबरन धर्मपरिवर्तन की जो ख़बर महीनों मीडिया में छाई रही, अदालत ने उसका संज्ञान लेना भी ज़रूरी नहीं समझा।
Pankaj Parvez। सीबीआई ने पांच महीने की जाँच के बाद दावा किया है कि बदायूँ कांड, हत्या-बलात्कार नहीं, खुदकुशी का मामला है। मीडिया ने इस काँड की झंडागाड़ रिपोर्टिंग की थी। पेश है इसी प्रवृत्ति पर 8 नवंबर को पोस्ट की गयी एक टिप्पणी--- तारा शाहदेव और मीडिया का ''धर्मपरिवर्तन'' ---------------------------------------------------------- यह ख़बर आज क ...

पत्रकार को मातृशोक ...

पत्रकार को मातृशोक ...
गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन की बैठक कचहरी स्थित कैम्प कार्यालय पर सोमवार को हुई। इसमें पत्रकार सतेन्द्र नाथ शुक्ल की माता बादामी देवी (90) के निधन पर..................................................
गाजीपुर। गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन की बैठक कचहरी स्थित कैम्प कार्यालय पर सोमवार को हुई। इसमें पत्रकार सतेन्द्र नाथ शुक्ल की माता बादामी देवी (90) के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। बादामी देवी का निधन रविवार की रात हो गया। छोटे पुत्र रविन्द्र नाथ शुक्ला ने मुखागिभन दी। इस मौके पर चन्द्र कुमार तिवारी, अनिल उपाध्याय, अशोक श्रीवास्तव, गुलाब राय, विनोद गुप ...

FAKE एनकाउंटर- -सेल्फी लेने-न लेने की खुशी और ग़म- ...

 FAKE एनकाउंटर- -सेल्फी लेने-न लेने की खुशी और ग़म- ...
न्यौता तो संपादक जी को आया था। वे जाना भी चाहते थे, मगर कोई ऐसी मजबूरी रही होगी कि जा नहीं सकते थे। लिहाजा, मन मारकर उन्होंने मेरी ड्यूटी लगा दी। अंधा क्या चाहे दो आँख और पत्रकार क्या चाहे, मोदी के साथ एक सेल्फी। बस मैंने पुरानी सदरी प्रेस करके पहनी और पहुँच गया अशोक रोड स्थित बीजेपी के दफ़्तर। बस से नहीं, टैक्सी लेकर।
न्यौता तो संपादक जी को आया था। वे जाना भी चाहते थे, मगर कोई ऐसी मजबूरी रही होगी कि जा नहीं सकते थे। लिहाजा, मन मारकर उन्होंने मेरी ड्यूटी लगा दी। अंधा क्या चाहे दो आँख और पत्रकार क्या चाहे, मोदी के साथ एक सेल्फी। बस मैंने पुरानी सदरी प्रेस करके पहनी और पहुँच गया अशोक रोड स्थित बीजेपी के दफ़्तर। बस से नहीं, टैक्सी लेकर। आख़िर प्रधानमंत्री से मिलने ...

दिल्ली के मीडियावाले भी कहीं भी चले जाते हैं ...

दिल्ली के मीडियावाले भी कहीं भी चले जाते हैं ...
उत्तर भारत संत समिति के अध्यक्ष तथा कांग्रेस हाईकमान तक अपनी सीधी पकड रखने वाले आचार्य प्रमोद कृष्णन ने नैनीताल में दिये गये एक बयान में कहा कि योगगुरू बाबा रामदेव को मुख्यमंत्री से दोस्ती मुबारक। य
देदून से चन्‍द्रशेखर जोशी की एक्‍सक्‍लूसिव रिपोर्ट उत्तर भारत संत समिति के अध्यक्ष तथा कांग्रेस हाईकमान तक अपनी सीधी पकड रखने वाले आचार्य प्रमोद कृष्णन ने नैनीताल में दिये गये एक बयान में कहा कि योगगुरू बाबा रामदेव को मुख्यमंत्री से दोस्ती मुबारक। यह कह कर उन्होंने सीधे सीधे मुख्यमंत्री पर तंज कसा कि जवाहर लाल नेहरू तथा कांग्रेस हाईकमान को स ...

जीवन सूत्र अपने को अपरिहार्य मानने की भूल न करें ...

 जीवन सूत्र अपने को अपरिहार्य मानने की भूल न करें ...
एक मनुष्य के नाते हम ऐसी कई गलतियां करते हैं जो हमारे भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों जीवन में पतन का कारण बन जाते हैं। उदाहरण के लिए हम यदि किसी संस्था के लिए काम करते हैं तो उस संस्था का विकास होता है और हमें वाहवाही मिलती है तो हम मानते हैं इसका श्रेय हमें ही मिलना चाहिए। हम कई बार अपने को अपरिहार्य मान लेते हैं।
एक मनुष्य के नाते हम ऐसी कई गलतियां करते हैं जो हमारे भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों जीवन में पतन का कारण बन जाते हैं। उदाहरण के लिए हम यदि किसी संस्था के लिए काम करते हैं तो उस संस्था का विकास होता है और हमें वाहवाही मिलती है तो हम मानते हैं इसका श्रेय हमें ही मिलना चाहिए। हम कई बार अपने को अपरिहार्य मान लेते हैं। यह सोच लेते हैं कि मेरे कारण ऐसा हुआ ...

FAKE एनकाउंटर- -डोंट फाल इन टू द ट्रैप ऑफ होप एंड चेंज-ओबामा- ...

FAKE एनकाउंटर- -डोंट फाल इन टू द ट्रैप ऑफ होप एंड चेंज-ओबामा- ...
सुबह-सुबह जब मेरे घर के सामने लंबी काली मर्सिडीज़ गाड़ी रुकी और उसमें से दो अमरीकियों को मैंने सामने खड़ा पाया तो मेरी रूह काँप गई। मुझे लगा हो न हो ये सीआईए के एजेंट होंगे और मुझे उठाकर गुआंटीनामो ले जाएंगे। वहाँ वे मुझे टॉर्चर करेंगे और कोई ऐसा गुनाह कबूल करवाएंगे, जो मैंने किया ही नहीं था। मुझे अपने वे तमाम पुराने
सुबह-सुबह जब मेरे घर के सामने लंबी काली मर्सिडीज़ गाड़ी रुकी और उसमें से दो अमरीकियों को मैंने सामने खड़ा पाया तो मेरी रूह काँप गई। मुझे लगा हो न हो ये सीआईए के एजेंट होंगे और मुझे उठाकर गुआंटीनामो ले जाएंगे। वहाँ वे मुझे टॉर्चर करेंगे और कोई ऐसा गुनाह कबूल करवाएंगे, जो मैंने किया ही नहीं था। मुझे अपने वे तमाम पुराने लेख याद आने लगे जिनमें मैंने ...

इंडियन फेडरेशन आॅफ वर्किंग जर्नलिस्ट की राष्ट्रीय कार्य परिषद की बैठक ल ...

 इंडियन फेडरेशन आॅफ वर्किंग जर्नलिस्ट की राष्ट्रीय कार्य परिषद की बैठक ल ...
भोपाल। इंडियन फेडरेशन आॅफ वर्किंग जर्नलिस्ट की राष्ट्रीय कार्य परिषद की बैठक 17 एवं 18 नवबंर को लखनऊ में आयोजित की गई है। इस संबंध में इंडियन फेडरेशन आॅफ वर्किंग जर्नलिस्ट के सेक्रेट्री जनरल श्री परमानंद पांडे के अनुसार 17 एवं 18 नवंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गांधी भवन में परिषद के 68वें सत्र की शुरूआत होगी।
भोपाल। इंडियन फेडरेशन आॅफ वर्किंग जर्नलिस्ट की राष्ट्रीय कार्य परिषद की बैठक 17 एवं 18 नवबंर को लखनऊ में आयोजित की गई है। इस संबंध में इंडियन फेडरेशन आॅफ वर्किंग जर्नलिस्ट के सेक्रेट्री जनरल श्री परमानंद पांडे के अनुसार 17 एवं 18 नवंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गांधी भवन में परिषद के 68वें सत्र की शुरूआत होगी। दो दिन तक चलने वाले इस सत्र ...

बाल पत्रकारिता : संभावना एवं चुनौतियां ...

बाल पत्रकारिता : संभावना एवं चुनौतियां ...
-मनोज कुमार बीते 5 सितम्बर 2014, शिक्षक दिवस के दिन जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बच्चों से रूबरू हो रहे थे तब उनके समक्ष देशभर से हजारों की संख्या में जिज्ञासु बच्चे सामने थे। अपनी समझ और कुछ
-मनोज कुमार बीते 5 सितम्बर 2014, शिक्षक दिवस के दिन जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बच्चों से रूबरू हो रहे थे तब उनके समक्ष देशभर से हजारों की संख्या में जिज्ञासु बच्चे सामने थे। अपनी समझ और कुछ झिझक के साथ सवाल कर रहे थे। इन्हीं हजारों बच्चों में छत्तीसगढ़ दंतेवाड़ा से एक बच्ची ने आदिवासी बहुल इलाके में उच्चशिक्षा उपलब्ध कराने संबंधी सव ...

कैलाश सत्यार्थी के नाम- हुनर को खत्म करने की साजिश ...

कैलाश सत्यार्थी के नाम- हुनर को खत्म करने की साजिश ...
(कॅंवल भारती)। जिन्होंने भी दलित लेखक श्योराजसिंह बेचैन की आत्मकथा ‘मेरा बचपन मेरे कंधों पर’ पढ़ी है, वे जानते होंगे कि किस तरह लेखक ने मृतक पशुओं को उठाने और उनकी खाल उतारने से लेकर खेत-खलिहानों तक में मजदूरी करके अपना और अपने भाई-बहनों का पेट पाला था। मेरा सवाल यहाँ यह है कि अगर बालश्रम कानून के तहत उस बालक को मजदूरी करने से रोक दिया गया होता, तो उसका और उसके परिवार का क्या हुआ होता?
(कॅंवल भारती)। जिन्होंने भी दलित लेखक श्योराजसिंह बेचैन की आत्मकथा ‘मेरा बचपन मेरे कंधों पर’ पढ़ी है, वे जानते होंगे कि किस तरह लेखक ने मृतक पशुओं को उठाने और उनकी खाल उतारने से लेकर खेत-खलिहानों तक में मजदूरी करके अपना और अपने भाई-बहनों का पेट पाला था। मेरा सवाल यहाँ यह है कि अगर बालश्रम कानून के तहत उस बालक को मजदूरी करने से रोक दिया गया होता, ...

जिंदल स्टील के खिलाफ सीबीआई ने शुरू की जांच ...

जिंदल स्टील के खिलाफ सीबीआई ने शुरू की जांच ...
नई दिल्ली। सीबीआई ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ ताजा जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि जिंदल स्टील ने पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मिलकर खनन के लिए झारखंड में वन भूमि उपयोग में फेरबदल किया है।
नई दिल्ली। सीबीआई ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ ताजा जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि जिंदल स्टील ने पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मिलकर खनन के लिए झारखंड में वन भूमि उपयोग में फेरबदल किया है। सीबीआई सूत्रों ने कहा कि जेएसपीएल और पर्यावरण मंत्रालय ने कथित तौर पर अनियमितताएं बरतते हुए 2007-13 के बीच सारं ...

जुकरबर्ग को आप जानते हैं? मैं नहीं जानता ...

जुकरबर्ग को आप जानते हैं? मैं नहीं जानता  ...
जुकरबर्ग को आप जानते हैं? मैं नहीं जानता और न ही मेरी जानने में कोई रुचि है। दरअसल, पिछले दिनों ये कोई जुकरबर्ग नाम के शख्स ने हिन्दी पत्रकारों के साथ
मनोज कुमार,वरिष्ठ पत्रकार, मध्यप्रदेश जुकरबर्ग को आप जानते हैं? मैं नहीं जानता और न ही मेरी जानने में कोई रुचि है। दरअसल, पिछले दिनों ये कोई जुकरबर्ग नाम के शख्स ने हिन्दी पत्रकारों के साथ जो व्यवहार किया, वह अनपेक्षित नहीं था। वास्तव में ये महाशय भारत में तो आये नहीं थे। इनका वेलकम तो इंडिया में हो रहा था। फिर ये भारतीय पत्रकारों को क्यो ...

मैंने संघ क्यों छोड़ा? ...

मैंने संघ क्यों छोड़ा? ...
विकास पाठक, सहायक प्रोफ़ेसर, शारदा यूनिवर्सिटी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी अपने को 'राष्ट्रवादी' विचारधारा से संचालित संगठन बताते हैं.
विकास पाठक, सहायक प्रोफ़ेसर, शारदा यूनिवर्सिटी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी अपने को 'राष्ट्रवादी' विचारधारा से संचालित संगठन बताते हैं. मेरे विचार से भारत में 'राष्ट्रवाद' की विचारधारा की जनक भाजपा से ज़्यादा कांग्रेस रही है.वहीं, संघ की विचारधारा एक समुदाय मात्र को मजबूत करने वाली प्रतीत होती है.भारत जैसी सांस्कृतिक विविधता वाले ...

वर्तमान राजनीति में पत्रकार क्या करे ...

वर्तमान राजनीति में पत्रकार क्या करे ...
कई बार विचार आता है कि फेसबुक पर राजनीति पर कम से कम लिखूं। अखबारों में तो लिखता ही रहता हूं। बहस में भी बोलना ही पड़ता है। इसका पहला कारण तो यह है कि दुर्भाग्य से देश के सारे मुद्दे पर राजनीति के हाबी हो जाने से हमारा समाज कई प्रकार के संकटों का शिकार हुआ। इनमें सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक...सभी प्रकार के संकट हैं।
Awadhesh Kumar। मित्रों, कई बार विचार आता है कि फेसबुक पर राजनीति पर कम से कम लिखूं। अखबारों में तो लिखता ही रहता हूं। बहस में भी बोलना ही पड़ता है। इसका पहला कारण तो यह है कि दुर्भाग्य से देश के सारे मुद्दे पर राजनीति के हाबी हो जाने से हमारा समाज कई प्रकार के संकटों का शिकार हुआ। इनमें सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक...सभी प्रकार के संकट हैं। ...

एक पत्रकार की नजर से देखिए गांधी मैदान को ...

एक पत्रकार की नजर से देखिए गांधी मैदान को ...
Gyaneshwar Vatsyayan। खबरों का योद्धा हूं । सोमवार को पटना की सड़कों पर आंखें बहुत कुछ पढ़ रही थी । सरकार का खूनी चेहरा/इरादा/पागलपन साफ दिख रहा था । नेपथ्‍य में गांधी मैदान का दशहरा हादसा था । आंखों की स्‍टडी को तुलनात्‍मक भी रखना था ।
Gyaneshwar Vatsyayan। खबरों का योद्धा हूं । सोमवार को पटना की सड़कों पर आंखें बहुत कुछ पढ़ रही थी । सरकार का खूनी चेहरा/इरादा/पागलपन साफ दिख रहा था । नेपथ्‍य में गांधी मैदान का दशहरा हादसा था । आंखों की स्‍टडी को तुलनात्‍मक भी रखना था । बगैर तस्‍वीरों की बात नहीं बनती । इस पोस्‍ट के साथ कुल आठ तस्‍वीरें हैं । सबों को बहुत ध्‍यान से देखियेगा । ...

थानवी साहब के सवाल का प्रदीप ने यूं दिया जवाब ...

थानवी साहब के सवाल का प्रदीप ने यूं दिया जवाब ...
Om Thanvi (थानवी साहब के सवाल)। अमेरिका के राष्ट्रपति हर शनिवार रेडियो पर मन की बात कहते हैं, "वीकली एड्रेस" नाम से। शायद उससे थोड़ी प्रेरणा नरेंद्र
Om Thanvi (थानवी साहब के सवाल)। अमेरिका के राष्ट्रपति हर शनिवार रेडियो पर मन की बात कहते हैं, "वीकली एड्रेस" नाम से। शायद उससे थोड़ी प्रेरणा नरेंद्र मोदी लेते आए हैं। पर हमारे प्रधानमंत्री ने अपने पहले रेडियो प्रसारण के लिए विजयदशमी का दिन चुना, जो हिन्दू त्योहार है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्थापना दिवस भी है। बहरहाल उन्होंने "मन की बात" में ...

मीडिया जगत में स्त्री शरीर को कैश कराने की होड़ कितनी सही कितनी गलत ....? ...

मीडिया जगत में स्त्री शरीर को कैश कराने की होड़ कितनी सही कितनी गलत ....? ...
सौंदर्य और आकर्षण का अटूट रिश्ता है, सौंदर्य से दुनियाँ के समृद्ध साहित्य अटे पड़े है, चाहे पूरब हो या पश्चिम सभी जगह कवियों ने साहित्यकारों ने, चित्रकारों ने यहाँ
सौंदर्य और आकर्षण का अटूट रिश्ता है, सौंदर्य से दुनियाँ के समृद्ध साहित्य अटे पड़े है, चाहे पूरब हो या पश्चिम सभी जगह कवियों ने साहित्यकारों ने, चित्रकारों ने यहाँ तक की ऋषि मुनियो ने भी सौंदर्य को अपना आधार बनाया! किसी ने प्रकृति की गोद में जाकर प्रकृति के सौंदर्य में ईश्वर को ढूंढा और पाया तो किसी ने स्त्री सौंदर्य में ही समूची प्रकृति को ढून ...

अब श्रीलंका के अखबार सीलोन टुडे ने जोड़ा एक नया आयाम ...

अब श्रीलंका के अखबार सीलोन टुडे  ने जोड़ा एक नया आयाम  ...
जब त्रि-आयामी यानी थ्री-डी सिनेमा आया, तो यह दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना। थ्री-डी तकनीकी के इफेक्ट को महसूस करने के लिए खास चश्मे बने और दर्शकों
जब त्रि-आयामी यानी थ्री-डी सिनेमा आया, तो यह दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना। थ्री-डी तकनीकी के इफेक्ट को महसूस करने के लिए खास चश्मे बने और दर्शकों को दिए गए। यह दृश्य माध्यम में थ्रिल और सनसनी का दौर था। सिनेमा के परदे से निकलकर यह तकनीक अखबारों और पत्रिकाओं तक भी पहुंची, हालांकि वहां इसने इतनी सनसनी नहीं पैदा की। लेकिन अब श्रीलंका के अखबार सीलो ...

बेस्ट नहीं , ब्रेस्ट मीडिया ...

बेस्ट नहीं , ब्रेस्ट मीडिया  ...
बेस्ट होता है सबसे बढ़िया , ब्रेस्ट औरत के स्तन को कहते हैं ! हालिया "नंगई" करने में माहिर, "टाइम्स ऑफ इंडिया" नाम के "बेस्ट" अंगरेजी अखबार, ने "ब्रेस्ट"
बेस्ट होता है सबसे बढ़िया , ब्रेस्ट औरत के स्तन को कहते हैं ! हालिया "नंगई" करने में माहिर, "टाइम्स ऑफ इंडिया" नाम के "बेस्ट" अंगरेजी अखबार, ने "ब्रेस्ट" जर्नलिज़्म की अपनी शातिराना परम्परा को जारी रखा ! बॉलीवुड की अदाकारा दीपिका पादुकोण के आंशिक स्तनों का पूरा प्रदर्शन करने की चाह में आलोचना का पात्र भी बना ! लोगों ने गरियाया भी ! ...

बचना - बढ़ना हिंदी का ....!! ...

बचना - बढ़ना हिंदी का ....!! ...
मेरे छोटे से शहर में जब पहली बार माल खुला , तो शहरवासियों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं था। क्योंकि यहां सब कुछ अप्रत्याशित औऱ अकल्पनीय था। इसमें
तारकेश कुमार ओझा। मेरे छोटे से शहर में जब पहली बार माल खुला , तो शहरवासियों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं था। क्योंकि यहां सब कुछ अप्रत्याशित औऱ अकल्पनीय था। इसमें पहुंचने पर लोगों को किसी सपनीली दुनिया में चले जाने का भान होता। बड़ी - बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों की चकाचौंध भरे विज्ञापन लोगों को हैरत में डाल देते थे। लेकिन इसमें एक ख ...

हिन्दी के लिये रुदन ...

हिन्दी के लिये रुदन  ...
हिन्दी के प्रति निष्ठा जताने वालों के लिये हर साल सितम्बर की 14 तारीख रुदन का दिन होता है। इस एक दिनी विलाप के लिये वे पूरे वर्ष भीतर ही भीतर तैयारी करते हैं
-मनोज कुमार हिन्दी के प्रति निष्ठा जताने वालों के लिये हर साल सितम्बर की 14 तारीख रुदन का दिन होता है। इस एक दिनी विलाप के लिये वे पूरे वर्ष भीतर ही भीतर तैयारी करते हैं लेकिन अनुभव हुआ है कि सालाना तैयारी हिन्दी में न होकर लगभग घृणा की जाने वाली भाषा अंग्रेजी में होती है। हिन्दी को प्रतिष्ठापित करने की कोशिश स्वाधीनता के पूर्व से हो रही है और ...

हरियाणवी दंगल में अपना-अपना मीडिया ...

हरियाणवी दंगल में अपना-अपना मीडिया ...
लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव। इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भारत में जिस चुनाव आयोग की है, उसकी ईमानदारी की साख दुनिया भर
खुशदीप सहगल इस गड़बड़झाले में कैसे बन पाएगी स्वतंत्र राय सवाल सिर्फ निष्पक्षता और शुचिता का ही नहीं, चुनाव में सभी प्रत्याशियोंं को प्रचार के समान अवसर मुहैया कराने का भी है लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव। इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भारत में जिस चुनाव आयोग की है, उसकी ईमानदारी की साख दुनिया भर में है। लेकि ...

TRAI Report on Media Ownership ...

TRAI Report on Media Ownership ...
The Telecom Regulatory Authority of India recently released its report on media ownership to a studied indifference from the print media which otherwise debates this issue vigorously. Why have the newspapers avoided a serious and vigorous engagement with the report’s consequential recommendations?
The Telecom Regulatory Authority of India recently released its report on media ownership to a studied indifference from the print media which otherwise debates this issue vigorously. Why have the newspapers avoided a serious and vigorous engagement with the report’s consequential recommendations? Given the general tone of public discussions ...

भारतीय मीडिया में खबरों का ज्वार - भाटा...!! ...

भारतीय मीडिया में खबरों का ज्वार - भाटा...!! ...
तारकेश कुमार ओझा। पता नहीं क्यों मुझे भारतीय मीडिया का मिजाज भारत - पाकिस्तान सीमा की तरह विरोधाभासी व अबूझ प्रतीत होता है। भारत - पाक की सीमा
तारकेश कुमार ओझा। पता नहीं क्यों मुझे भारतीय मीडिया का मिजाज भारत - पाकिस्तान सीमा की तरह विरोधाभासी व अबूझ प्रतीत होता है। भारत - पाक की सीमा में कब बम - गोलियां बरसने लगे और कब दोनों देशों के सैन्य अधिकारी आपस में हाथ मिलाते नजर आ जाएं, कहना मुश्किल है। अभी कुछ दिन पहले तक चैनलों पर सीमा में तनाव की इतनी खबरें चली कि लगने लगा कि दोनों देशों ...

हिंदी के अच्छे पत्रकार वही साबित हुए जिनकी अंग्रेजी पर भी सामान पकड़ हो ...

हिंदी के अच्छे पत्रकार वही साबित हुए जिनकी अंग्रेजी पर भी सामान पकड़ हो  ...
हो सकता है कि मेरे कहने से हिंदी भाषी आहत महसूस करें, लेकिन गौर करें तो हिंदी के अच्छे संपादक वही हुए हैं जिनका हिंदी के साथ अंग्रेजी पर समान अधिकार रहा।
हो सकता है कि मेरे कहने से हिंदी भाषी आहत महसूस करें, लेकिन गौर करें तो हिंदी के अच्छे संपादक वही हुए हैं जिनका हिंदी के साथ अंग्रेजी पर समान अधिकार रहा। स्वर्गीय अज्ञेय,मनोहर श्याम जोशी, राजेंद्र माथुर, प्रभाष जोशी से लेकर मौजूदा वक्त में प्रमोद जोशी और नीलाभ मिश्र पर ध्यान दें तो यह बात समान रूप से लागू होती है। शुष्क आंकड़ों और नीतियों को सम ...

आपबीतीः तो मनोज झा ने तो पिंकू की अंगुठी उतरवा दी ...

आपबीतीः तो मनोज झा ने तो पिंकू की अंगुठी उतरवा दी ...
मेरठ में एक मुहल्ला है, उमेश नगर। 2000 में अमर उजाला में काम करने के दौरान वहां कमरा लिया था। पड़ोस में आसपास ही पुराने दोस्त मुकेश सिंह, सतीश सिंह,
मेरठ में एक मुहल्ला है, उमेश नगर। 2000 में अमर उजाला में काम करने के दौरान वहां कमरा लिया था। पड़ोस में आसपास ही पुराने दोस्त मुकेश सिंह, सतीश सिंह, संजय श्रीवास्तव, दीपक सती, संजीव सिंह पुंडीर, दिनेश उप्रैती रहते थे। सभी अमर उजाला में काम करते थे। एक परिवार की तरह रहते थे। सुबह हो या शाम या दोपहर..कोई किसी के घर चला जाता था, चाय नाश्ता या भो ...

पुरस्कारों में भी चल रहा है खेल, एक हाथ से दे दूजे हाथ से ले ...

पुरस्कारों में भी चल रहा है खेल, एक हाथ से दे दूजे हाथ से ले ...
छब्बीस अगस्त को टीवी पर एक समाचार चैनल में नीचे की पट्टी पर हिंदी के कुछ लेखकों को मिले पुरस्कारों की सूचना देख रहा था। फेसबुक पर तो हर रोज कोई न कोई
छब्बीस अगस्त को टीवी पर एक समाचार चैनल में नीचे की पट्टी पर हिंदी के कुछ लेखकों को मिले पुरस्कारों की सूचना देख रहा था। फेसबुक पर तो हर रोज कोई न कोई लेखक अपने पुरस्कृत होने का जश्न मनाता हुआ दिखाई देता है। अगर हिसाब लगाया जाए तो अभी देश के गांव, प्रखंड, जिलों, कस्बों, महानगरों में हिंदी के लेखकों को मिलने वाले पुरस्कारों की संख्या हजारों में होगी। ...

​कंपनी या कारू का खजाना...? ...

​कंपनी या कारू का खजाना...? ...
तारकेश कुमार ओझा। एक कंपनी के कई कारोबार। कारोबार में शामिल पत्र - पत्रिकाओं का भी व्यापार। महिलाओं की एक पत्रिका की संपादिका का मासिक वेतन साढ़े सात
तारकेश कुमार ओझा। एक कंपनी के कई कारोबार। कारोबार में शामिल पत्र - पत्रिकाओं का भी व्यापार। महिलाओं की एक पत्रिका की संपादिका का मासिक वेतन साढ़े सात लाख रुपए तो समाचार पत्र समूह के सीईओ का साढ़े सोलह लाख से कुछ कम। पढ़ने - सुनने में यह भले यह अविश्सनीय सा लगे, लेकिन है पूरे सोलह आने सच। वह भी अपने ही देश में। हम बात कर रहे हैं हजारों करोड़ रुपयो ...

वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्रा की आपबीती, पढिए ...

वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्रा की आपबीती, पढिए ...
Vikas Mishra: करीब आठ साल बाद किराए के मकान में आया हूं। आठ साल खुद के फ्लैट में रहा। उससे पहले लंबा वक्त किराए के मकान में गुजरा है। तरह तरह
Vikas Mishra: करीब आठ साल बाद किराए के मकान में आया हूं। आठ साल खुद के फ्लैट में रहा। उससे पहले लंबा वक्त किराए के मकान में गुजरा है। तरह तरह के मकान, तरह तरह के मकान मालिक। हर घर में कई-कई कहानी। ये संयोग ही है कि हमेशा मकान मालिक के तौर पर बड़े अच्छे लोग मिले। मकान-मालिक और किराएदार का रिश्ता बस एक दिन का होता था, जब किराया देता था। बाकी तो घर ...

जेम्स फोले को गीदड़ पत्रकारिता की श्रद्धांजलि ...

जेम्स फोले को गीदड़ पत्रकारिता की श्रद्धांजलि ...
अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोले मार दिए गए ! क़त्ल का अंदाज़ वहशियाना था ! बकरे की गर्दन माफ़िक उनकी गर्दन को रेता गया ! दुनिया भर में इसकी खूब निंदा हो
अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोले मार दिए गए ! क़त्ल का अंदाज़ वहशियाना था ! बकरे की गर्दन माफ़िक उनकी गर्दन को रेता गया ! दुनिया भर में इसकी खूब निंदा हो रही है ! अब दुसरे पत्रकार स्टीवन जोएल सोटलॉफ की कटी गर्दन की ख़बर का इंतज़ार है ! दुनिया के तमाम देशों के गृह-युद्ध या आतंकवादी घटनाओं को, घटना स्थल से लाइव कवरेज के चक्कर में सैकड़ों साहसी शेर-नुमा पत्रक ...

मीडिया के गेंग्स आफ वासेपुर ...

मीडिया के गेंग्स आफ वासेपुर ...
कभी केजरीवाल की सुपारी ली तो कभी मोदी की. कभी आसाराम की धोती के हर धागे खोलकर चीथड़े चीथड़े कर दिए. तो कभी बलात्कार का बलात्कार ही कर डाला.
· कभी केजरीवाल की सुपारी ली तो कभी मोदी की. कभी आसाराम की धोती के हर धागे खोलकर चीथड़े चीथड़े कर दिए. तो कभी बलात्कार का बलात्कार ही कर डाला. मूड हुआ तो कभी खबर ही छोड़ दी . तो कभी खबर समझे ही नही. कभी दो टके के एंकर को हीरो बना दिया और कभी दो टके के हीरो से एंकरिंग करा दी. जो जितना घटिया उतना ही बढ़िया. ये हाल हे फिल्मसिटी के गेंग्स आफ वासेपुर ...

जब रात 10 बजे प्रधानमंत्री सो जाते थे तो मतंग सिंह सरकार चलाते थे ...

जब रात 10 बजे प्रधानमंत्री सो जाते थे तो मतंग सिंह सरकार चलाते थे ...
लक्ष्मी अय्यर का फोन आया। उसने कहा कि सुना है कि मतंग सिंह के घर पर सीबीआई का छापा पड़ा है। जरा पता लगाइए। मैंने सीबीआई कवर करने वाले मित्र पत्रकार नीलू रंजन से संपर्क साधा तो पता चला
लक्ष्मी अय्यर का फोन आया। उसने कहा कि सुना है कि मतंग सिंह के घर पर सीबीआई का छापा पड़ा है। जरा पता लगाइए। मैंने सीबीआई कवर करने वाले मित्र पत्रकार नीलू रंजन से संपर्क साधा तो पता चला कि मतंग सिंह और उनकी बीवी रही मनोरंजन सिंह समेत उनसे जुड़े 28 लोगों व ठिकानों पर छापे मारे गए हैं। तलाशी चल रही थी। यह छापे कलकत्ता की शारदा कंपनी से संबंध रखने के सिलस ...

क्यों नपुंसक हैं पत्रकार? ...

 क्यों नपुंसक हैं पत्रकार? ...
Arun Srivastava। किसी शायर ने कहा है, ‘खुदा के घर से कुछ गधे फरार हो गए, कुछ पकड़े गए बाकी पत्रकार हो गए।’ यह कहावत कम से कम कॉरपोरेट जगत
Arun Srivastava। किसी शायर ने कहा है, ‘खुदा के घर से कुछ गधे फरार हो गए, कुछ पकड़े गए बाकी पत्रकार हो गए।’ यह कहावत कम से कम कॉरपोरेट जगत के पत्रकारों के लिए तो लागू होती ही है। कारपोरेट या सम्पादक अक्सर कहता है कि कार्यालय आने का समय होता है जाने का नहीं, लेकिन वह कॉरपोरेट क्षेत्र की सुविधाओं को ताक पर रखता है। आज कुछ अखबारों के मालिक कॉरपोरेट जग ...

संजय सिन्हा की आपबीतीः जो करने से खुशी मिले वही कर गुजरिए ...

संजय सिन्हा की आपबीतीः जो करने से खुशी मिले वही कर गुजरिए ...
मुझे सच में नहीं पता कि मेरी सैलरी कितनी है। मोटे तौर पर जानता हूं कि इतने पैसे हर महीने एकाउंट में पहुंचते है, पर उसमें कुछ कटता-छंटता होगा तो मुझे नहीं
मुझे सच में नहीं पता कि मेरी सैलरी कितनी है। मोटे तौर पर जानता हूं कि इतने पैसे हर महीने एकाउंट में पहुंचते है, पर उसमें कुछ कटता-छंटता होगा तो मुझे नहीं पता चलता। मेरी दिलचस्पी नहीं है इस बात को जानने में। मेरी दिलचस्पी सिर्फ इस बात में है कि मैं जो काम कर रहा हूं, उस काम को मैं सचमुच करना चाहता हूं कि नहीं, और फिर घर चलाने, दोस्तों पर खर्च कर ...

अखबारों ने गांव में बदला खबरों का कलेवर ...

 अखबारों ने गांव में बदला खबरों का कलेवर ...
कुछ साल पहले पंजाब के एक हिंदी अखबार के पहले पेज पर चार तस्वीरों के साथ एक खबर छपी थी, जिसका शीर्षक था ‘मुझे घर जाने दो, नहीं तो जान दे दूंगी.’
।। प्रमोद जोशी ।। वरिष्ठ पत्रकार कुछ साल पहले पंजाब के एक हिंदी अखबार के पहले पेज पर चार तस्वीरों के साथ एक खबर छपी थी, जिसका शीर्षक था ‘मुझे घर जाने दो, नहीं तो जान दे दूंगी.’ खबर एक छोटे शहर की थी, जहां की पुलिस सार्वजनिक स्थानों पर घूमते जोड़ों की पकड़-धकड़ कर रही थी. खबर के साथ लगी पहली तीन तस्वीरों में एक लड़की पुलिस वालों से बात करती ...

दहशत भरी ज़िंदगी.. एक डर ये भी.... ...

दहशत भरी ज़िंदगी.. एक डर ये भी.... ...
एक तो विकासशील देश का तमगा और उस पर दिन ब दिन घटते नैतिक मूल्यों के साथ ज़ीरो जेंडर सेंस्टिविटी, आज यही हमारे समाज की पहचान है। हम उसी
ज़िंदगी में हर छोटी बड़ी बात चाहें वो ग़म हो या खुशी जब हम बांटना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने मां-बाप की तरफ देखते हैं, क्योंकि यही वो आंखे होती हैं जिनमें खुशियों की चमक सबसे तेज़ नज़र आती है, और यही वो आंचल होता है जिसमें दुनिया भर के ग़मों को छिपा लेने की कूवत होती है, इसे हम normal life कहते हैं, लेकिन यही नॉर्मल लाइफ जब आपको हिस्से में ना हो त ...

फिर वही, एक विनम्र जिद्दी धुन ...

फिर वही, एक विनम्र जिद्दी धुन ...
इस तरह अनुराधा के जीवन की वह यात्रा शुरू हुई जो लगभग दो साल बाद जाकर एक महत्वपूर्ण कृति के सामने आने के साथ खत्म हुई. काम कठिन था या नहीं कहना
"सब बात करते हैं. कोई नहीं करता ये काम. मैं करके देखती हूं....." इस तरह अनुराधा के जीवन की वह यात्रा शुरू हुई जो लगभग दो साल बाद जाकर एक महत्वपूर्ण कृति के सामने आने के साथ खत्म हुई. काम कठिन था या नहीं कहना मुश्किल है. लेकिन कुछ लोगों ने उसे असंभव बना दिया था. सारे लोग मान चुके थे कि एक दशक में जो काम नहीं हो पाया, वह नहीं हो पाएगा. श ...

कस्तूरचंद गुप्त: मध्यप्रदेश की पत्रकारिता की पाठशाला ...

कस्तूरचंद गुप्त: मध्यप्रदेश  की पत्रकारिता की पाठशाला  ...
राजेन्द्र अग्रवालः मिशन से प्रोफेशन में बदलने वाली पत्रकारिता का जब जब उल्लेख होता है तब तब कस्तूरचंद गुप्त का स्मरण सहज ही हो जाता है। अपने समय के
राजेन्द्र अग्रवालः मिशन से प्रोफेशन में बदलने वाली पत्रकारिता का जब जब उल्लेख होता है तब तब कस्तूरचंद गुप्त का स्मरण सहज ही हो जाता है। अपने समय के प्रतिबद्ध पत्रकार श्री गुप्त पूरे जीवनकाल पत्रकारिता को समाजसेवा का आधार मानते रहे हैं। उनका मानना था कि समाज में जब सुनवाई की एक ऐसी जटिल प्रक्रिया है जहां एक गरीब पीड़ित व्यक्ति नहीं पहुंच सकता है, ...

मैकाले की संतानें का अंग्रेजी अखबारों और चैनलों में संपादक बनकर नई ‘बाबू ...

मैकाले की संतानें का अंग्रेजी अखबारों और चैनलों में संपादक बनकर नई ‘बाबू ...
इन दिनों अंग्रेजी वाले हिंदी से अचानक बहुत प्यार करने लगे हैं. भारतीय नस्ल के अंग्रेजों का हिंदी के प्रति ऐसा विकट अनुराग देखकर डर लगता है. लगता है कि
इन दिनों अंग्रेजी वाले हिंदी से अचानक बहुत प्यार करने लगे हैं. भारतीय नस्ल के अंग्रेजों का हिंदी के प्रति ऐसा विकट अनुराग देखकर डर लगता है. लगता है कि अपनी खाल, बाल और चाल बदलकर मैकाले की संतानें अंग्रेजी अखबारों और चैनलों में संपादक या एंकर बनकर नई ‘बाबूगीरी’ कर रही हों. अंग्रेजी मीडिया को आखिर हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं के लिए ऐसी चिंता क्यों हो ...

मीडिया के योगी, गरीब विरोधी - नरेंद्र मोदी ...

मीडिया के योगी, गरीब विरोधी - नरेंद्र मोदी  ...
सरकारी गुणा-गणित के मुताबिक़ , भारत के, गाँव और शहर में रहने वाला व्यक्ति गर 30 व् 40 रुपये रोज़ कमाता है, तो वो गरीब नहीं है ! अब इस तीस और
सरकारी गुणा-गणित के मुताबिक़ , भारत के, गाँव और शहर में रहने वाला व्यक्ति गर 30 व् 40 रुपये रोज़ कमाता है, तो वो गरीब नहीं है ! अब इस तीस और चालीस रुपये का हिसाब देख लें ! दाल 80 रुपये, आटा 30 रुपये, टमाटर 90 , चावल 30, प्याज 70, आलू 30, दूध 40 रुपये और इन सबको आम आदमी तक पहुंचाने वाला डीज़ल-पेट्रोल-गैस अपने-अपने हिसाब से ! 30-40 वाला नंगा, नहाये क् ...

जिस मीडिया के चहेते थे उसी से दूरी -अजॉय बोस ...

जिस मीडिया के चहेते थे उसी से दूरी -अजॉय बोस ...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय मीडिया के बीच बढ़ती दूरियां इसलिए अचरज का विषय है, क्योंकि महज चंद माह पहले तक मोदी मीडिया के सबसे चहेते नेता हुआ करते थे। वास्तव में लंबे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय मीडिया के बीच बढ़ती दूरियां इसलिए अचरज का विषय है, क्योंकि महज चंद माह पहले तक मोदी मीडिया के सबसे चहेते नेता हुआ करते थे। वास्तव में लंबे और सरगर्मियों से भरपूर चुनाव प्रचार अभियान के दौरान तो मोदी के अनेक विरोधियों ने मीडिया (खासतौर पर टीवी मीडिया) पर यह इल्जाम भी लगाया था कि वे भाजपा के इस ताकतवर नेता के पक्ष म ...

कश्मीर पर मेरे कहे को पहले समझें तो सही ! ...

कश्मीर पर मेरे कहे को पहले समझें तो सही ! ...
वेद प्रताप वैदिक। पहले हाफिज सईद से मेरी मुलाकात पर संसद में हंगामा हुआ और फिर कश्मीर पर मेरे विचारों को लेकर। मुझे दुख है कि हमारे नेताओं ने इन दोनों मुद्दों पर ठंडे दिमाग से
वेद प्रताप वैदिक। पहले हाफिज सईद से मेरी मुलाकात पर संसद में हंगामा हुआ और फिर कश्मीर पर मेरे विचारों को लेकर। मुझे दुख है कि हमारे नेताओं ने इन दोनों मुद्दों पर ठंडे दिमाग से क्यों नहीं सोचा? वे कुछ अनैतिक टीवी चैनलों के कुप्रचार के शिकार क्यों बन गए? आज तक दुनिया के किसी भी देश की संसद किसी पत्रकार या विशेषज्ञ की मुलाकात पर कभी इस तरह ठप नहीं हुई ...

बेनेट कोलमैन, वैदिक के अधर्म में मारा गया धर्मयुग ...

बेनेट कोलमैन, वैदिक के अधर्म में मारा गया धर्मयुग ...
दक्षिणी दिल्ली में प्रेस इन्क्लेव पत्रकारों की एक कॉलोनी है। इसी कॉलोनी के एक फ्लैट में रघुवीर सहाय रहते थे। यहीं दिसंबर, 1990 में उनकी मृत्यु हुई। इसी कॉलोनी
♦ आलोक श्रीवास्‍तव दक्षिणी दिल्ली में प्रेस इन्क्लेव पत्रकारों की एक कॉलोनी है। इसी कॉलोनी के एक फ्लैट में रघुवीर सहाय रहते थे। यहीं दिसंबर, 1990 में उनकी मृत्यु हुई। इसी कॉलोनी में दिल्ली के कई नामी-गिरामी पत्रकार रहते हैं। 11 अगस्त, 1996 को इस कॉलोनी में अचानक दिल्ली के पत्रकारों का आना-जाना बढ़ गया। बड़े-बड़े पत्रकार – हां, बेशक हिंदी के। मही ...
Latest News आपबीती! मुकेश सिंह, घोर आस्तिक, अद्भुत संचार क्षमता है उनमें फेक एनकाउंटर! शास्त्र जरूरी हैं, विज्ञान नहीं: स्मृति ईरानी Government of India and UNDP Media Fellowships on Decentralized Planning - 2015 ममता बनर्जी सारदा मीडिया की सबसे बड़ी लाभार्थी भूमि कारोबारी बना जनसंदेश का संपादक नेताओं, नौकरशाहों और दलालों के गठजोड़ की उपज है यादव सिंह मीडिया में जाब ही जाब MP govt to hold fresh meetings to discuss Majithia Wage Board दैनिक जागरण के वरिष्ठ समाचार संपादक जगदीश जोशी को पितृशोक वरिष्ठ पत्रकार आशीष मिश्र के पिताजी के निधन से पत्रकार जगत शोकाकुल ‘‘सैफई महोत्सव में इस बार पंजाबी तड़का लगायेंगे हंसराज हंस’’ हम सब हरामज़ादे हैं..... पुरखों की कसम खाकर कहता हूँ- डॉ.संजीव सिंगला बने द प्रेस कल्ब कालांवाली के प्रधान इंडिया न्यूज के मुख्य संपादक दीपक चौरसिया के पिता जी का देहावसान हैदराबाद में अपना कैंपस खोलेगी गूगल वाजपेयी के पीए शिवकुमार को ‘अटल सम्मान’ डोरीलाल अग्रवाल राष्ट्रीय मेधावी विकलांग छात्रवृत्ति परीक्षा 24 को प्रभात खबर देवघर के संपादक को हिंदी भी नहीं आती! इंडिया टीवी से कार्टूनिस्ट मुकेश का इस्तीफ़ा सर्वोदय की पत्रिका भूमिपुत्र के संपादक रह चुके वैद्य का निधन पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान विनय को जागरण के मालिक पहुंचे मोदी के दरवाजे, चार करोड़ दान भी दिए नईदुनिया जाने वालों को गद्दार कहा, अब खुद ही चले आए 50वें हफ्ते का टीआरपीः अंबानी के प्रकोप से आईबीएन-7 गर्त में दैनिक भास्कर, ग्वालियर के संपादक सुनील शुक्ला का इस्तीफा, पहुंचे नई दुनिया भोपाल वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मिश्र को पितृशोक सहारा के साथ जुड़े रहे ताहिर अब्बास अब हमारे बीच नहीं रहे केजी न्यूज के स्टूडियो में दिखा मीडिया का बदरंग चेहरा पीएफ पर इस साल भी 8.75 प्रतिशत ब्याज दैनिक जागरण मुजफ्फरपुर के वरीय संवाददाता शिशिर कुमार दे सकते हैं इस्तीफा उपमन्‍यु केस: रेप पीड़ित छात्रा ने मुख्‍यमंत्री को भेजा पत्र मुनव्वर राणा को साहित्य अकादमी पुरस्कार ममता बनर्जी ने पीएसीएल के मालिक निर्मल सिंह भंगू को लेकर उठाए सवाल, कहा गिरफ्तार करे सरकार टीटीएन से जुड़े संदीप भारद्वाज, बने डिस्ट्रिव्यूशन हेड हादसे में यू बांग्ला चैनल के संवाददाता गंभीर रूप से घायल भास्कर न्यूज बंद पर कश्मीर में माइक लिए एंठ रहा है स्टिंगर दैनिक भास्‍कर को दो और झटका जनसंदेश प्रबंधन पर अब कसेगा पुलिस का शिकंजा, पीएफ विभाग ने थाने में दी तहरीर All upnews का ट्रायल बुधवार से काका साहेब कालेलकर सम्मान से सम्मानित होंगे वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी Germany fellowships for Indian journalists ईटीवी लांच करने जा रहा है 12 भाषाओं में न्यूज वेबसाइट दैनिक जागरण, मुजफ्फरपुर के विज्ञापन प्रबंधक अरविंद नारायण का इस्तीफा या अल्लाह--देखकर शर्मिंदा हूं, आहत हूं मीडिया मीमांसा! जातीय श्रेष्ठता का कुत्सित चेहरा पाक गम में! प्रोड्यूसर ने कहा, उससे यह नहीं हो पाएगा बीएसईएस के एचआर हेड पर प्रमोशन देने के बहाने छेड़छाड़ का आरोप एआरवाई की एंकर सनम बलोच इतनी भावुक हो गईं कि उनके आंसू निकल पड़े आरोपियों की गिरफ्तारी न होता देख पत्रकार उमेश राजपूत हत्या की होगी सीबीआई जांच सुब्रत से कोर्ट ने कहा, आरबीआई की अनुमति से ही विदेश से आएगा धन