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अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर, पढ़िए कैसे ...

अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर,  पढ़िए कैसे  ...
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई। 42 साल तक कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग की पिछले पखवाड़े हुई मौत के बाद यह सवाल बार- बार उठ रहा था कि उसका कातिल सोहनलाल वाल्मिकी आखिर है
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई। 42 साल तक कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग की पिछले पखवाड़े हुई मौत के बाद यह सवाल बार- बार उठ रहा था कि उसका कातिल सोहनलाल वाल्मिकी आखिर है कहां ? क्या वह जिंदा भी है या नहीं ? खुद पुलिस को सोहनलाल के जिंदा होने पर शक था, पर जो काम पुलिस नहीं कर पाई, वह काम किया एक मराठी अखबार के प्रमुख संवाददाता ज्ञानेश चव्हाण ने खुद सोहनलाल क ...

किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक ...

किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक ...
पत्रकारिता की कक्षा में छात्र-छात्राएं अक्सर सफलता के गुर पूछते हैं, वे जानना चाहते हैं कि कौन-से रास्ते से चलकर वे परचम लहरा सकते हैं। उनकी इस जिज्ञासा का जवाब देना बेहद
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की कक्षा में छात्र-छात्राएं अक्सर सफलता के गुर पूछते हैं, वे जानना चाहते हैं कि कौन-से रास्ते से चलकर वे परचम लहरा सकते हैं। उनकी इस जिज्ञासा का जवाब देना बेहद कठिन है। मैं, अक्सर उनके सामने कुछ उदाहरण रखता हूं। ये उदाहरण इतिहास के किन्हीं महान पत्रकारों के नहीं हैं, वरन मेरे समकालीन उन लोगों के हैं ...

मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ...

मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ...
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। वो सच में परिवर्तन के दिन थे...मेरे निजी जीवन के परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों ने भी दस्तक देना शुरु कर दिया था।अब यह बात
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। वो सच में परिवर्तन के दिन थे...मेरे निजी जीवन के परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों ने भी दस्तक देना शुरु कर दिया था।अब यह बात और है कि मेरी ही तरह बाकी लोग भी इन परिवर्तनों को नजर अंदाज कर रहे थे या इनकी गंभीरता को हल्के से ले रहे थे।यही वह समय था जब नरसिम्हा राव के नेतृत्व में मनमोहन सिंह देश की आर्थि ...

हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आत ...

हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आत ...
Nadim S. Akhter के फेसबुक वाल से। बुरा मत मानिएगा लेकिन भारत में हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है. लगता है कि -पत्रकार- का पत्र कहीं
Nadim S. Akhter के फेसबुक वाल से। बुरा मत मानिएगा लेकिन भारत में हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है. लगता है कि -पत्रकार- का पत्र कहीं दूर छूट गया है, सिर्फ -कार- ही बची है. कोई चैनल बेशर्मी से भारत में गर्मी के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरता है (कम पढ़े-लिखे लोगों के मन में पाकिस्तान के खिलाफ भावनाएं भ ...

किस्से अखबारों के-44 मीडिया अध्ययन के लिए ‘केस-स्टडी’ है राज ठाकरे ...

किस्से अखबारों के-44 मीडिया अध्ययन के लिए ‘केस-स्टडी’ है राज ठाकरे ...
Sushil Upadhyay। दिल्ली के पत्रकारों की दुनिया एकदम अलग है। छोटी जगहों पर पत्रकारिता करते हुए लगता है कि दिल्ली में बैठे तमाम पत्रकार महामानव हैं, उनमें नारद, हनुमान,
Sushil Upadhyay। दिल्ली के पत्रकारों की दुनिया एकदम अलग है। छोटी जगहों पर पत्रकारिता करते हुए लगता है कि दिल्ली में बैठे तमाम पत्रकार महामानव हैं, उनमें नारद, हनुमान, व्यास और महाभारत के संजय, सभी की खूबी समाई हुई है। लेकिन, जब आप उनके साथ काम करते हैं या पत्रकारिता से संबंधित कोई मदद मांगते हैं तो वे एकदम भिन्न किस्म के जीव नजर आते हैं। इन जीवों क ...

ताक में पत्रकारिता, तकनीकी का दौर ...

ताक में पत्रकारिता, तकनीकी का दौर ...
मनोज कुमार!nसाल 1826, माह मई की 30 तारीख को ‘उदंत मार्तंड’ समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था. पराधीन
30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष मनोज कुमार!साल 1826, माह मई की 30 तारीख को ‘उदंत मार्तंड’ समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था. पराधीन भारत को स्वराज्य दिलाने की गुरुत्तर जवाबदारी तब पत्रकारिता के कांधे पर थी. कहना न होगा कि हिन्दी पत्रकारिता ने न केवल अपनी जवाबदारी पूरी निष्ठा के साथ पूर्ण किया, अपितु भविष्य ...

किस्से अखबारों के-42 योग्यता का सवाल और डिग्री की जरूरत ...

किस्से अखबारों के-42 योग्यता का सवाल और डिग्री की जरूरत ...
Sushil Upadhyay ! पत्रकारिता के साथ बरसों से एक सवाल जुड़ा हुआ है कि किसी पत्रकार की योग्यता क्या होनी चाहिए ? इसके साथ दूसरा सवाल यह है कि इस
Sushil Upadhyay ! पत्रकारिता के साथ बरसों से एक सवाल जुड़ा हुआ है कि किसी पत्रकार की योग्यता क्या होनी चाहिए ? इसके साथ दूसरा सवाल यह है कि इस योग्यता का निर्धारण कैसे हो ? और क्या किसी ऐसी संस्था या मैकेनिज्म की जरूरत है जो पत्रकारों की योग्यता को जांच-परख सके ? साल, 1993 में जब मैं नवभारत, भोपाल में काम सीखने गया तो यह बात पहले दिन ही समझ में आ ...

किस्से अखबारों के-42 माया, मोदी और मीडिया ...

किस्से अखबारों के-42 माया, मोदी और मीडिया ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। साल 2014 की खबरों को मानक मान लें तो मोटे तौर पर कह सकते हैं कि मीडिया में मोदियापा छाया रहा है। इसके बरअक्स, दूसरा तथ्य यह है कि
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। साल 2014 की खबरों को मानक मान लें तो मोटे तौर पर कह सकते हैं कि मीडिया में मोदियापा छाया रहा है। इसके बरअक्स, दूसरा तथ्य यह है कि मेनस्ट्रीम मीडिया में बसपा और उसकी प्रमुख मायावती के प्रति एक खास तरह का द्वेष और घृणा का भाव अक्सर नजर आता है। ये भाव इतने गहरे तक बैठा हुआ है कि कई बार अनजाने में ही इसकी बेहद चिंताजनक ...

किस्से अखबारों के-41: चैथा खंभा है या रेत की दीवार! ...

किस्से अखबारों के-41: चैथा खंभा है या रेत की दीवार! ...
Sushil Upadhyay। 2014 के लोकसभा चुनाव में मीडिया, खासतौर से टीवी मीडिया ने लोकतंत्र के चैथे-खंभे की बजाय खुद को रेत की दीवार में बदल लिया है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में
Sushil Upadhyay। 2014 के लोकसभा चुनाव में मीडिया, खासतौर से टीवी मीडिया ने लोकतंत्र के चैथे-खंभे की बजाय खुद को रेत की दीवार में बदल लिया है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में एबीपी न्यूज और जी-न्यूज पर मोदी के इंटरव्यू देखने के बाद से ऐसा लग रहा है कि पत्रकार और पत्रकारिता की परिभाषा को नए सिरे से परिभाषित किया जाना चाहिए। पत्रकार की विशेषताओं का भी पुनर ...

किस्से अखबारों के-40 आरक्षण का मुद्दा और रिपोर्टिंग के मानक ...

किस्से अखबारों के-40 आरक्षण का मुद्दा और रिपोर्टिंग के मानक ...
Sushil Upadhyay! यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या मुख्यधारा का हिंदी मीडिया बुनियादी तौर पर सवर्ण मीडिया है ? सीधे तौर पर हां या ना कह देना
Sushil Upadhyay! यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या मुख्यधारा का हिंदी मीडिया बुनियादी तौर पर सवर्ण मीडिया है ? सीधे तौर पर हां या ना कह देना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन मुख्यधारा के हिंदी मीडिया में हर रोज ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाएंगे जिनसे यह पता चलता है कि संबंधित खबरों या विश्लेषणों में पीछे कौन-सा दिमाग काम कर रहा था। मीडिया के पास जब भी आरक्षण या ऐ ...

किस्से अखबारों के-39 बहुत नाशुक्रा काम है समीक्षा करना ...

किस्से अखबारों के-39 बहुत नाशुक्रा काम है समीक्षा करना ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में जिस किसी को ठिकाने लगाना हो, उसे अखबारों की समीक्षा का काम दे देते हैं। मुझे भी एक बार अमर उजाला, मेरठ में और
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में जिस किसी को ठिकाने लगाना हो, उसे अखबारों की समीक्षा का काम दे देते हैं। मुझे भी एक बार अमर उजाला, मेरठ में और एक बार अमर उजाला, देहरादून में समीक्षा का काम करना पड़ा। तथाकथित समीक्षकों को अखबार में छपी भाषायी, तथ्यात्मक और प्रस्तुति संबंधी गलतियों को छांटकर रिपोर्ट तैयार करनी होती है। इस रिपोर्ट क ...

किस्से अखबारों के-35-तनाव सहो या भगोड़े बन जाओ! ...

 किस्से अखबारों के-35-तनाव सहो या भगोड़े बन जाओ! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। सामान्यतः लोग यही कहते हैं कि सेना में काम करने के लिए बहुत ऊंचे मानसिक बल की जरूरत पड़ती है। इसके अभाव में व्यक्ति या तो आत्मघात कर लेगा
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। सामान्यतः लोग यही कहते हैं कि सेना में काम करने के लिए बहुत ऊंचे मानसिक बल की जरूरत पड़ती है। इसके अभाव में व्यक्ति या तो आत्मघात कर लेगा या फिर भगोड़ा हो जाएगा। यही बात मीडिया पर भी ज्यों की त्यों लागू होती है। मीडिया में काम करने के लिए जिन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत है, उनमें से एक है-मानसिक दबाव सहने की योग्य ...

किस्से अखबारों के-37-शशि शेखर का घृणाशास्त्री और...... ...

किस्से अखबारों के-37-शशि शेखर का घृणाशास्त्री और...... ...
अमर उजाला छोड़े हुए सात साल हो गए, हिन्दुस्तान को भी पांच साल पहले अलविदा कहा था, लेकिन दोनों अखबारों के साथ भावात्मक रिश्ता बना हुआ है, भले
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से! अमर उजाला छोड़े हुए सात साल हो गए, हिन्दुस्तान को भी पांच साल पहले अलविदा कहा था, लेकिन दोनों अखबारों के साथ भावात्मक रिश्ता बना हुआ है, भले ही यह एकतरफा क्यों न हो! यह सब वैसा ही जैसा कि अपने अतीत के प्रति एक खास तरह का आकर्षण हमेशा बना रहता है। सुबह अखबार देखता हूं तो पुराने दिनों की तरह उन कमियों की ओर ध्यान जाता ...

किस्से अखबारों के-34- वैदिक जी से वास्ता और आवरण का सच ...

किस्से अखबारों के-34- वैदिक जी से वास्ता और आवरण का सच ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की दुनिया में कुछ ऐसे नाम हैं, जो कभी मेरी पसंद का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उनसे गाहे-बगाहे वास्ता पड़ता रहा। इन्हीें में से एक नाम डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का भी है।
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की दुनिया में कुछ ऐसे नाम हैं, जो कभी मेरी पसंद का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उनसे गाहे-बगाहे वास्ता पड़ता रहा। इन्हीें में से एक नाम डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का भी है। वैदिक जी साल 1994 में प्रेस क्लब, हरिद्वार द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस समारोह में मुझे उनके हाथ गोल्ड मेडल ...

किस्से अखबारों के-30- ऐसी-वैसी भाषा, कैसी-कैसी भाषा! ...

किस्से अखबारों के-30- ऐसी-वैसी भाषा, कैसी-कैसी भाषा! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। मीडिया की दुनिया में रहते हुए दो बार शशिशेखर जी के साथ काम करने का मौका मिला। पहले अमर उजाला और फिर हिन्दुस्तान में। उनके नाम के
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। मीडिया की दुनिया में रहते हुए दो बार शशिशेखर जी के साथ काम करने का मौका मिला। पहले अमर उजाला और फिर हिन्दुस्तान में। उनके नाम के साथ जी लगाने पर कुछ लोगों को एतराज हो सकता है, लेकिन मेरा मन कई कारणों से उनका सम्मान करता हूं। शशिशेखर को भले ही कितनी भी गालियां दी जाएं, लेकिन वे हिंदी के उन संपादकों में हैं जिन्हों ...

मीडिया की मंडी में हम-16- तालठोंक मामले का क्या हश्र हुआ ...

मीडिया की मंडी में हम-16- तालठोंक मामले का क्या हश्र हुआ ...
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। तो मित्रों मैं 1992 में जयपुर हाइकोर्ट में करप्शन,वकीलों की नाराजगी और मुझ पर अवमानना के मुद्दे की चर्चा कर रहा था।मेरा सोशल एक्टिविस्ट सक्रिय
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। तो मित्रों मैं 1992 में जयपुर हाइकोर्ट में करप्शन,वकीलों की नाराजगी और मुझ पर अवमानना के मुद्दे की चर्चा कर रहा था।मेरा सोशल एक्टिविस्ट सक्रिय हो गया था...मैं प्रेस कांफ्रेंस में मुखर हर वकील से ,उसके घर जाकर मिला....उनके द्वारा जजों पर लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों के सबूत इकठ्ठे किए। स्टोरी लिखी और भेज दी। हमारे ब ...

मीडिया की मंडी में हम-15 ...

मीडिया की मंडी में हम-15  ...
dhiraj kulshrestha! माया ज्वॉइन करते ही अगले महीने मैंने एक दुस्साहसी स्टोरी लिख दी.......\"अदालत कटघरे में\"।इस स्टोरी में न्यायपालिका
मेरा सोशल एक्टिविस्ट जाग गया dhiraj kulshrestha! माया ज्वॉइन करते ही अगले महीने मैंने एक दुस्साहसी स्टोरी लिख दी.......\"अदालत कटघरे में\"।इस स्टोरी में न्यायपालिका में और खास तौर पर हाईकोर्ट की जयपुर बैंच के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।इस स्टोरी को माया ने प्रमुखता से छापा और वह अंक एक ही दिन में बाजार में बिक गया।हर तरफ...खास तौर से ज्यूड ...

कितना मजबूत है लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ? ...

कितना मजबूत है लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ? ...
Dinesh Chandra के फेसबुक वाल से। आज़ादी के बाद से लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ भली भांति फलफूल गए ।लेकिन चौथा स्तम्भ शायद भीतर ही भीतर गल गया।आज मिडिया की जो तरक्की नज़र
Dinesh Chandra के फेसबुक वाल से। आज़ादी के बाद से लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ भली भांति फलफूल गए ।लेकिन चौथा स्तम्भ शायद भीतर ही भीतर गल गया।आज मिडिया की जो तरक्की नज़र आती है वो बस कुछ बड़े मिडिया हाउस है ।जो बड़े कॉरपोरेट घरानों या राजनेताओं से जुड़े है। वो समाचार पत्र जो स्थानीय स्तर पर निकलते हैं आज मरने की कगार पर हैं।कुछ सिधार चुके कुछ जीने क ...

तो जल्द ही अभिजात्य वर्ग की गिरफ्त में होगी पत्रकारिता भी....!! ...

तो जल्द ही अभिजात्य वर्ग की गिरफ्त में होगी पत्रकारिता भी....!! ...
तारकेश कुमार ओझा ! क्या गीत - संगीत व कला से लेकर राजनीति के बाद अब लेखन व पत्रकारिता के क्षेत्र में भी जल्द ही ताकतवर अभिजात्य वर्ग का क
​ तारकेश कुमार ओझा ! क्या गीत - संगीत व कला से लेकर राजनीति के बाद अब लेखन व पत्रकारिता के क्षेत्र में भी जल्द ही ताकतवर अभिजात्य वर्ग का कब्जा होने वाला है। क्या बड़े - बड़े लिक्खाड़ इस वर्ग के पीछे वैसे ही घूमते रहने को मजबूर होंगे , जैसा राजनीति के क्षेत्र में देखने को मिलता है। क्या यह क्षेत्र अब तक इस वर्ग की धमक से काफी हद तक इस वजह से ...

शेखर ने मानी भूल ...

शेखर ने मानी भूल ...
रामबहादुर राय! शेखर गुप्ता ने आखिरकार अपनी भूल मान ली है, पर एक गहरी हिचकिचाहट और बहुत चालाकी के साथ।
रामबहादुर राय! शेखर गुप्ता ने आखिरकार अपनी भूल मान ली है, पर एक गहरी हिचकिचाहट और बहुत चालाकी के साथ। अपने कॉलम में उन्होंने 18 फरवरी को लिखा था- ’27 साल गुजर चुके हैं। मैं इलाहाबाद की अपनी रिपोर्टर डायरी से एक अंश जाहिर कर ही सकता हूं। वीपी.सिंह ने चुनावों की साफ-सुथरी फंडिंग और कम से कम खर्च करने पर जोर दिया था। मोटरसाइकल पर प्रचार करना उनका ...

मजीठिया वेज बोर्ड: अफवाहों से बचें, विशेष जांच टीम से हकीकत बयां करें ...

मजीठिया वेज बोर्ड: अफवाहों से बचें, विशेष जांच टीम से हकीकत बयां करें ...
मेरे एक मित्र और वरिष्ठ पत्रकार उस दिन तो फोन कनेक्ट होते ही बिफर पड़े। अत्यंत विचलित और अधीरज भरे लहजे में बोलने लगे, च्मैने अपनी रिट पिटीशन
मेरे एक मित्र और वरिष्ठ पत्रकार उस दिन तो फोन कनेक्ट होते ही बिफर पड़े। अत्यंत विचलित और अधीरज भरे लहजे में बोलने लगे, च्मैने अपनी रिट पिटीशन के लिए वकील साहब को पे स्लिप और दूसरे जरूरी कागजात तो दे दिए थे। सुप्रीम कोर्ट में उसे जज साहब को दिखाया क्यों नहीं? दूसरे साथियों ने भी पे स्लिप समेत सारे कागजात-डाक्यूमेंट केस के साथ संलग्न करने के लिए दिए ...

मीडिया की मंडी में हम-14 ...

मीडिया की मंडी में हम-14 ...
Dhiraj Kulshreshtha. जयपुर दूरदर्शन से जुड़ने के बाद भी फ्रीलांसिंग जारी थी.......’माया’ में नियमित लेखन भी।फरवरी 1992 में माया का नियमित संवाददाता बन गया......पत्रकार ओम
हमारी टीम उन प्रतिक्रियाओं का आनंद उठाती थी ----------------------------------------------------------------------- Dhiraj Kulshreshtha. जयपुर दूरदर्शन से जुड़ने के बाद भी फ्रीलांसिंग जारी थी.......’माया’ में नियमित लेखन भी।फरवरी 1992 में माया का नियमित संवाददाता बन गया......पत्रकार ओम सैनी ब्यूरो चीफ थे,श्रीपाल शक्तावत साथ में संवाददाता थे औ ...

मीडिया की मंडी में हम-13 ...

मीडिया की मंडी में हम-13 ...
dhiraj kulshreshtha। ये मार्च या अप्रैल 1990 था,जब मैं जयपुर दूरदर्शन समाचार विभाग से नियमित जुड़ा था।एक कैजुअल सब एडिटर कम ट्रांसलेटर के रूप में......हर महीने दस दिन
dhiraj kulshreshtha। ये मार्च या अप्रैल 1990 था,जब मैं जयपुर दूरदर्शन समाचार विभाग से नियमित जुड़ा था।एक कैजुअल सब एडिटर कम ट्रांसलेटर के रूप में......हर महीने दस दिन की बुकिंग मिलती थी....उससे एक मुश्त कमरे का किराया और भोजन सहित छोटा-मोटा खर्च निकल जाता था,ये बहुत बड़ा सहारा था।साथ ही यह उम्मीद भी, कि कभी मौका लगा तो दूरदर्शन में स्थायी हो जाएंग ...

रवीश कुमार : क्या मीडिया बचा सकता था गजेंद्र की जान? ...

रवीश कुमार : क्या मीडिया बचा सकता था गजेंद्र की जान? ...
दक्षिण वियतनाम की एक सड़क पर नंगी भागती किम फुक (Kim Phuc) की उस तस्वीर को कौन भूल सकता है। नौ साल की किम के साथ कुछ और बच्चे भाग रहे हैं। सड़क के अंतिम छोर पर बम धमाके के
दक्षिण वियतनाम की एक सड़क पर नंगी भागती किम फुक (Kim Phuc) की उस तस्वीर को कौन भूल सकता है। नौ साल की किम के साथ कुछ और बच्चे भाग रहे हैं। सड़क के अंतिम छोर पर बम धमाके के बाद उठा हुआ काले धुएं का गुबार है। युद्ध की तबाही का यह काला सच दुनिया के सामने नहीं आता, अगर फोटोग्राफर निक ने हिम्मत करके वह तस्वीर न ली होती। निक ने न सिर्फ तस्वीर ली, बल्कि क ...

वीके सिंह विवाद के पीछे मीडिया का दोहरा रवैया ...

वीके सिंह विवाद के पीछे मीडिया का दोहरा रवैया  ...
विदेश राज्य मंत्री जनरल (से.नि.) वीके सिंह एक बार फिर विवादों में हैं। पाकिस्तान उच्चायोग द्वारा आयोजित पाकिस्तान दिवस के कार्यक्रम में पहुंचे वीके सिंह ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर
विदेश राज्य मंत्री जनरल (से.नि.) वीके सिंह एक बार फिर विवादों में हैं। पाकिस्तान उच्चायोग द्वारा आयोजित पाकिस्तान दिवस के कार्यक्रम में पहुंचे वीके सिंह ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर मीडिया के लिए सुर्खियां बटोरी थीं। इस बार उन्होंने मीडिया के लिए गाली का प्रयोग कर खुद के लिए सियासी रूप से मुश्किलें मोल ले ली हैं। हालांकि सोशल मीडिया प ...

मीडिया प्रेस से जुड़ो फिर मजे करोगे जैसे कि वह....... ...

मीडिया प्रेस से जुड़ो फिर मजे करोगे जैसे कि वह....... ...
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी। आप पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, जाहिर सी बात है कि जीवन यापन की चिन्ता से ग्रस्त होंगे। यह तो अच्छा है कि अभी तक अकेले हैं, कहीं आप शादी-शुदा होते तो कुछ और बात होती।
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी। आप पढ़े-लिखे बेरोजगार हैं, जाहिर सी बात है कि जीवन यापन की चिन्ता से ग्रस्त होंगे। यह तो अच्छा है कि अभी तक अकेले हैं, कहीं आप शादी-शुदा होते तो कुछ और बात होती। पढ़े-लिखे हैं और चिन्ताग्रस्त हैं, ऐसे में रातों को नींद नहीं आती होगी, आप एक काम करिए कलम-कागज लेकर बैठ जाइए, बस कुछ ही दिनों में आप को लिखने की आदत पड़ जाएगी। ...

नारी-अस्मिता वोट बैंक नहीं जिसे..... ...

नारी-अस्मिता वोट बैंक नहीं जिसे..... ...
कौन कहता है कि महिलाएँ सशक्त नहीं हैं। मेरा अपना मानना है कि आदिकाल से ही महिलाओं की ही चलती आ रही है। ‘स्त्री-शक्ति’ की पूजा की जाती है। देवता भी इस शक्ति के आगे नतमस्तक थे।
-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी कौन कहता है कि महिलाएँ सशक्त नहीं हैं। मेरा अपना मानना है कि आदिकाल से ही महिलाओं की ही चलती आ रही है। ‘स्त्री-शक्ति’ की पूजा की जाती है। देवता भी इस शक्ति के आगे नतमस्तक थे। महिलाओं के बारे में नकारात्मक सोच वाले ही ऐसा कह सकते हैं कि नारी ‘अबला’ होती है। कितने उदाहरण दूँ, कितनों के नाम गिनाऊँ। सशक्त नारियों के बा ...

​क्रिकेट में स्विंग तो राजनीति में स्टिंग ...!!​ ...

​क्रिकेट में स्विंग तो राजनीति में स्टिंग ...!!​ ...
तारकेश कुमार ओझा! जीवन में पहली बार स्टिंग की चर्चा सुनी तो मुझे लगा कि यह देश में धर्म का रूप ले चुके क्रिकेट की कोई न
तारकेश कुमार ओझा! जीवन में पहली बार स्टिंग की चर्चा सुनी तो मुझे लगा कि यह देश में धर्म का रूप ले चुके क्रिकेट की कोई नई विद्या होगी। क्योंकि क्रिकेट की कमेंटरी के दौरान मैं अक्सर सुनता था कि फलां गेंदबाज गेंद को अच्छी तरह से स्विंग करा रहा है या पिच पर गेंद अच्छे से स्विंग नहीं हो रही है वगैरह - वगैरह। लेकिन चैनलों के जरिए समझ बढ़ने पर पता चल ...

पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश पत्रकारों के लिए ख ...

पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश पत्रकारों के लिए ख ...
पत्रकारों के हितों की पैरोकार न्यूयॉर्क की संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) की एक रिपोर्ट में उन देशों का उल्लेख है, जो पत्रकारों के लिए काम करने के लिहाज से सबसे खतरनाक हैं.
पत्रकारों के हितों की पैरोकार न्यूयॉर्क की संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) की एक रिपोर्ट में उन देशों का उल्लेख है, जो पत्रकारों के लिए काम करने के लिहाज से सबसे खतरनाक हैं. इस सूची में भारत सहित दक्षिण एशिया के छह देश पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश शामिल हैं. सीपीजे की रिपोर्ट में भारत 13 देशों की सूची में फि ...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल ...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल ...
मनोज कुमार! मानव समाज ने स्वयं को अनुशासित रखने के लिये अधिकार और दायित्व शब्द का निर्माण किया है किन्तु य
मनोज कुमार! मानव समाज ने स्वयं को अनुशासित रखने के लिये अधिकार और दायित्व शब्द का निर्माण किया है किन्तु यही दो शब्द वह अपनी सुविधा से उपयोग करता है. पुरुष प्रधान समाज की बात होती है तो अधिकार शब्द प्राथमिक हो जाता है और जब स्त्री की बात होती है तो दायित्व उसके लिये प्रथम. शायद समाज के निर्माण के साथ ही हम स्त्री को दायित्व का पाठ पढ़ाते आ रहे ह ...

मदर टेरेसा जैसा काम क्यों नहीं करता संघ? ...

मदर टेरेसा जैसा काम क्यों नहीं करता संघ? ...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिन्दुत्व की विचारधारा से जुड़े तमाम लोगों को नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब उन्हें वे बातें खुल कर कहने की छूट मिल गई है जो वे पहले नहीं कह पाते थे।
डॉ संदीप पाण्डेय, सीएनएस। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिन्दुत्व की विचारधारा से जुड़े तमाम लोगों को नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब उन्हें वे बातें खुल कर कहने की छूट मिल गई है जो वे पहले नहीं कह पाते थे। इनमें से कई बातें विवादास्पद हैं। इधर अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थानों पर हमले भी बढ़ गए हैं। हमला करने वाले भी निडर ...

वर्तमान मीडिया में महिलाओं को नहीं पचा पा रहे हैं पुरूष ...

वर्तमान मीडिया में महिलाओं को नहीं पचा पा रहे हैं पुरूष ...
काश! मुझ जैसी हर साधारण एवं महत्वाकांक्षी लड़की को अच्छे माँ-बाप एवं उत्साहवर्धन करने वाला समाज तथा मेरे
काश! मुझ जैसी हर साधारण एवं महत्वाकांक्षी लड़की को अच्छे माँ-बाप एवं उत्साहवर्धन करने वाला समाज तथा मेरे शैक्षिक गुरू व पत्रकारिता गुरूकुल के गुरू की मानिन्द लोगों का सानिध्य, स्नेह एवं आशीर्वाद मिले, तभी पत्रकारिता के क्षेत्र में महिलाएँ छू सकेंगी उचाईयाँ। -रीता विश्वकर्मा पत्रकारिता (मीडिया/प्रेस) में महिलाओं का प्रवेश और योगदान बड़े शहरों म ...

तौबा करिए ऐसे छपास रोगियों से ...

तौबा करिए ऐसे छपास रोगियों से ...
-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी आप लेखक, विचारक पत्रकार रिपोर्टर हैं। आप को छपास रोग है, अपने ऊल-जुलूल आलेख एक साथ चार-पाँच
-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी आप लेखक, विचारक पत्रकार रिपोर्टर हैं। आप को छपास रोग है, अपने ऊल-जुलूल आलेख एक साथ चार-पाँच सौ लोगों लोगों को ई-मेल करते हैं। आपका वही मेल मुझे भी मिला है। धन्यवाद कहूँ या फिर अपना सिर पीटूँ। बहरहाल! इसको आप अपनी प्रॉब्लम न समझें- यह मेरी समस्या है मैं निबट लूँगा। एक बात कहना चाहूँगा, वह यह कि... खैर छोड़िये बस ऐसे भे ...

साक्षरता और परम्परा के मेल से बचेगा पानी ...

साक्षरता और परम्परा के मेल से बचेगा पानी ...
-मनोज कुमार करीब तीन दशकों से जल संकट को लेकर विश्वव्यापी बहस छिड़ चुकी है। यहां तक कहा जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध पानी के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। स्थिति की गंभीरता को नकारा नहीं जा सकता है।
-मनोज कुमार करीब तीन दशकों से जल संकट को लेकर विश्वव्यापी बहस छिड़ चुकी है। यहां तक कहा जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध पानी के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। स्थिति की गंभीरता को नकारा नहीं जा सकता है। इस दिशा में राज्य सरकार अपने अपने स्तर पर पहल कर रही हैं और जल संरक्षण की दिशा में नागरिकों को जागरूक बनाया जा रहा है। जल संरक्षण की दिशा में उपाय बरतने ...

The media we don’t see ...

The media we don’t see ...
A fortnight before the Delhi assembly polls, an editor of a leading Hindi News Channel, India TV’s Rajat Sharma, concluded his prime time bulletin with an air of
A fortnight before the Delhi assembly polls, an editor of a leading Hindi News Channel, India TV’s Rajat Sharma, concluded his prime time bulletin with an air of undignified judgment. He called Arvind Kejriwal an ‘anarchist’, who does not have the requisite “manners for public discourse”. “Why would Kiran Bedi accept an offer for debate by an an ...

एक गांधी का ‘महात्मा’ हो जाना ...

एक गांधी का ‘महात्मा’ हो जाना ...
-मनोज कुमार! संसार में एक ही व्यक्ति हुआ है जिसे नाम से नहीं काम से पहचाना गया. समाज के द्वारा स्वस्फूर्त रूप प्रदान की गई उपाधि ‘महात्मा’ ने उनके नाम का स्थान लिया और वे नाम से ऊपर उठ गये. सौ
-मनोज कुमार! संसार में एक ही व्यक्ति हुआ है जिसे नाम से नहीं काम से पहचाना गया. समाज के द्वारा स्वस्फूर्त रूप प्रदान की गई उपाधि ‘महात्मा’ ने उनके नाम का स्थान लिया और वे नाम से ऊपर उठ गये. सौ बरस से अधिक समय से हम किसी को जानते हैं तो वे हैं महात्मा गांधी. बहुतेरों को यह स्मरण भी नहीं होगा कि दरअसल, उनका नाम महात्मा गांधी नहीं बल्कि मोहनदास करमच ...

मीडिया की मंडी में हम-5 ...

 मीडिया की मंडी में हम-5 ...
! यूं कहें तो मेरी शुरुआत जयपुर की लोकल रिपोर्टिंग से हुई,इसका फायदा यह हुआ कि मैंने जयपुर को जल्दी से समझा और जयपुर ने मुझे। कल्चरल रिपोर्टिंग मेरी प्रिय बीट थी, वह इकबाल खान के पास थी पर उनके अवकाश पर होने पर इसे चुराने का मौका मैंने कभी
Dhiraj Kulshreshtha! यूं कहें तो मेरी शुरुआत जयपुर की लोकल रिपोर्टिंग से हुई,इसका फायदा यह हुआ कि मैंने जयपुर को जल्दी से समझा और जयपुर ने मुझे। कल्चरल रिपोर्टिंग मेरी प्रिय बीट थी, वह इकबाल खान के पास थी पर उनके अवकाश पर होने पर इसे चुराने का मौका मैंने कभी नहीं छोड़ा। विश्वास कुमार चीफ रिपोर्टर थे और राजस्थान की पत्रकारिता के स्टार रिपोर्टर भी।उन ...

वाराणसी में आतंकी हमले में मारे गये पत्रकारों को दी गई श्रद्धांजलि ...

वाराणसी में आतंकी हमले में मारे गये पत्रकारों को दी गई श्रद्धांजलि  ...
वाराणसी। डा. सम्पूर्णानंद की पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा व विचारमंच के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को शाम पांच बजे तेलियाबाग पार्क में लगी सम्पूर्णानंद की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। कायस्थ विचार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता श्रीवास्तव के नेतृत्व में लोगों ने पेरिस में हुए आतंकी हमले में मारे गये पत्रकारों को कैंडिल जलाकर श्रद्धांजलि दी।
वाराणसी। डा. सम्पूर्णानंद की पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा व विचारमंच के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को शाम पांच बजे तेलियाबाग पार्क में लगी सम्पूर्णानंद की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। कायस्थ विचार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता श्रीवास्तव के नेतृत्व में लोगों ने पेरिस में हुए आतंकी हमले में मारे गये पत्रकारों को कैंडिल जल ...

मांझी के ईद-गिर्द सिमटता मीडिया व राजनीति ...

मांझी के ईद-गिर्द सिमटता मीडिया व राजनीति ...
संजय कुमार! बिहार में राजनीतिक और प्रशासनिक कवायद सिर्फ एक ही व्यक्ति के ईद-गिर्द सिमटती जा रही है। वह है मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, जो अपने बयानों से खासे चर्चित हैं। इनके बयान राजनीतिक गलियारे को गरम करने के लिए काफी होते हैं। इसमें मीडिया की भूमिका अहम है। जाहिर
संजय कुमार! बिहार में राजनीतिक और प्रशासनिक कवायद सिर्फ एक ही व्यक्ति के ईद-गिर्द सिमटती जा रही है। वह है मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, जो अपने बयानों से खासे चर्चित हैं। इनके बयान राजनीतिक गलियारे को गरम करने के लिए काफी होते हैं। इसमें मीडिया की भूमिका अहम है। जाहिर है ऐसे में विकास कार्य और जनसमस्याओं का समाधान कैसे हो सकता है? खुद ...

FAKEएनकाउंटर ! ये डाउट तो मुझे भी है-अन्ना हज़ारे ...

FAKEएनकाउंटर ! ये डाउट तो मुझे भी है-अन्ना हज़ारे ...
फ्लाइट से पुणे और फिर वहाँ से टैक्सी लेकर जब मैं रालेगन सिद्धि पहुँचा तो दिन ढल चुका था। अन्ना हज़ारे के आश्रम में उस समय सन्नाटा पसरा हुआ था। पक्षियों की चहचहाहट के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं
फ्लाइट से पुणे और फिर वहाँ से टैक्सी लेकर जब मैं रालेगन सिद्धि पहुँचा तो दिन ढल चुका था। अन्ना हज़ारे के आश्रम में उस समय सन्नाटा पसरा हुआ था। पक्षियों की चहचहाहट के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं पड़ रहा था। मैंने इस तरह की वीरानगी की अपेक्षा नहीं की थी। मुझे लगा था कि चहल-पहल होगी, मुलाकातियों की भीड़भाड़ होगी। मगर कुछ भी न था। मैंने वहाँ गाँधी टोपी ...

मीडिया का मजा ...

मीडिया का मजा ...
मनोज कुमार! गांव-देहात में एक पुरानी कहावत है गरीब की लुगाई, गांव भर की भौजाई. शायद हमारे मीडिया का भी यही हाल हो चुका है. मीडिया गरीब की लुगाई भले ही न हो लेकिन गांव भर की भौजाई तो बन ही चुकी है और इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है. मीडिया
मनोज कुमार! गांव-देहात में एक पुरानी कहावत है गरीब की लुगाई, गांव भर की भौजाई. शायद हमारे मीडिया का भी यही हाल हो चुका है. मीडिया गरीब की लुगाई भले ही न हो लेकिन गांव भर की भौजाई तो बन ही चुकी है और इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है. मीडिया का जितना उपयोग बल्कि इसे दुरूपयोग कहें तो ज्यादा बेहतर है, हमारे देश में सब लोग अपने अपने स्तर पर कर रहे ...

फेक एनकाउंटर! शास्त्र जरूरी हैं, विज्ञान नहीं: स्मृति ईरानी ...

 फेक एनकाउंटर!   शास्त्र जरूरी हैं, विज्ञान नहीं: स्मृति ईरानी  ...
स्मृति ईरानी से इंटरव्यू के लिए समय लेने के लिए मुझे थोड़ा झूठ का सहारा लेना पड़ा। मैंने अपने नाम के आगे आचार्य लगा लिया। सोचा था डॉ. तो हूं ही, अगर पूछा तो कह दूंगा कि संस्कृत
मुकेश कुमार! संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से इंटरव्यू के लिए समय लेने के लिए मुझे थोड़ा झूठ का सहारा लेना पड़ा। मैंने अपने नाम के आगे आचार्य लगा लिया। सोचा था डॉ. तो हूं ही, अगर पूछा तो कह दूंगा कि संस्कृत में आचार्य कहा जाऊंगा। इससे वे और भी खुश हो जाएंगी। झूठ भी इसलिए बोलना पड़ा था कि लगातार विवादों में फंसने के कारण वे इंटरव्यू देने से बच रह ...

बटरिंग ' से ज्यादा कुछ नहीं चैनलों का महामंच...!! ...

बटरिंग ' से ज्यादा कुछ  नहीं चैनलों का महामंच...!! ...
क्या खबरों की दुनिया में भी कई ' उपेक्षित कोने ' हो सकते हैं। मीडिया का सूरतेहाल देख कर तो कुछ एेसा ही प्रतीत होता है। खबरों की भूख शांत करने औऱ देश- दुनिया की पल - पल की खबरों के मामले में अपडेट रहने के लिए घर पर होने के दौरान चैनलों को निहारते रहना आदत सी बन चुकी है और मजबूरी भी। लेकिन
तारकेश कुमार ओझा! क्या खबरों की दुनिया में भी कई ' उपेक्षित कोने ' हो सकते हैं। मीडिया का सूरतेहाल देख कर तो कुछ एेसा ही प्रतीत होता है। खबरों की भूख शांत करने औऱ देश- दुनिया की पल - पल की खबरों के मामले में अपडेट रहने के लिए घर पर होने के दौरान चैनलों को निहारते रहना आदत सी बन चुकी है और मजबूरी भी। लेकिन पता नहीं क्यों पिछले कुछ दिनों से मुझे ...

सम्पादक जी, ये तो ना करिए, ये देश आपका ऋणी रहेगा ...

सम्पादक जी, ये तो ना करिए, ये देश आपका ऋणी रहेगा ...
Nadim S. Akhter। चिंता मत करिए. -अच्छे दिन- आ गए हैं. क्या यूपी, क्या एमपी और क्या दिल्ली और क्या भारत-क्या इंडिया...ऐसे -अच्छे दिनों- की ख्वाहिश इस देश की जनता ने तो नहीं ही की थी. फिर ये किसके अच्छे दिन हैं?? फैसला आप कीजिए.
Nadim S. Akhter। चिंता मत करिए. -अच्छे दिन- आ गए हैं. क्या यूपी, क्या एमपी और क्या दिल्ली और क्या भारत-क्या इंडिया...ऐसे -अच्छे दिनों- की ख्वाहिश इस देश की जनता ने तो नहीं ही की थी. फिर ये किसके अच्छे दिन हैं?? फैसला आप कीजिए. ऩए-नवेले संगठन, नए-नए चेहरे टीवी की बहस में जगह पा रहे हैं. वो जितना जहर उगलेंगे, उतनी ही उनकी दुकान चलेगी. शायद -आका- ...

जो लोकशाही के निगहबान थे, वे बन गए चारण ...

जो लोकशाही के निगहबान थे, वे बन गए चारण ...
पुण्य प्रसून वाजपेयी! साल भर पहले राष्ट्रपति की मौजूदगी में राष्ट्रपति भवन में ही एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल ने अपना पच्चीसवां जन्मदिन मना लिया। तब कहा गया कि मनमोहन सिंह का दौर है। कुछ
पुण्य प्रसून वाजपेयी! साल भर पहले राष्ट्रपति की मौजूदगी में राष्ट्रपति भवन में ही एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल ने अपना पच्चीसवां जन्मदिन मना लिया। तब कहा गया कि मनमोहन सिंह का दौर है। कुछ भी हो सकता है। पिछले दिनों एक न्यूज चैनल ने अपने एक कार्यक्रम के 21 बरस पूरे होने का जश्न मनाया तो उसमें राष्ट्रपति समेत प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के अलावा नौकरशाह, ...

एक त्रासदी का खबरनामा ...

एक त्रासदी का खबरनामा ...
-मनोज कुमार तीस बरस का समय कम नहीं होता है। भोपाल के बरक्स देखें तो यह कल की ही बात लगती है। 2-3 दिसम्बर की वह रात और रात की तरह गुजर जाती किन्तु ऐसा हो न सका। यह तारीख न केवल भोपाल के इतिहास में बल्कि दुनिया की भीषणतम त्रासदियों में शुमार हो गया है। यह कोई मामूली दुर्घटना नहीं थी बल्कि यह त्रासदी थी। एक ऐसी त्रासदी जिसका दुख, जिसकी पीड़ा और इससे उपजी अगिनत तकलीफें हर पल इस बात का स्मरण कराती रहेंगी कि साल 1984 की वह 2-3 दिसम्बर की आधी रात कितनी भयावह थी।
-मनोज कुमार तीस बरस का समय कम नहीं होता है। भोपाल के बरक्स देखें तो यह कल की ही बात लगती है। 2-3 दिसम्बर की वह रात और रात की तरह गुजर जाती किन्तु ऐसा हो न सका। यह तारीख न केवल भोपाल के इतिहास में बल्कि दुनिया की भीषणतम त्रासदियों में शुमार हो गया है। यह कोई मामूली दुर्घटना नहीं थी बल्कि यह त्रासदी थी। एक ऐसी त्रासदी जिसका दुख, जिसकी पीड़ा और इस ...

सत्य की खोज में खड़ा सिस्टम यादव सिंह के “सत्य” में समाहित हो चुका है ...

सत्य की खोज में खड़ा सिस्टम यादव सिंह के “सत्य” में समाहित हो चुका है ...
सत्य की खोज पुलिस से शुरू होती हुई मीडिया के रास्ते चलती हुई जांच कमीशनों की दहलीज़ पार कर न्याय की तराजू पकडे अदालत की अंतिम मंजिल तक जाती है. यहाँ भी कई सीढ़ियों पर
सड़ते सिस्टम में फलते-फूलते यादव सिंह, आखिर निदान क्या है ? एनके सिंह! सत्य की खोज पुलिस से शुरू होती हुई मीडिया के रास्ते चलती हुई जांच कमीशनों की दहलीज़ पार कर न्याय की तराजू पकडे अदालत की अंतिम मंजिल तक जाती है. यहाँ भी कई सीढ़ियों पर सत्य की खोज होती है. अगर यह खोज आगे बड़ी भी तो सर्वोच्च न्यायलय की अंतिम चौखट पर जा कर ख़त्म हो जाती है. इनकम टै ...

मक्खी मीडिया बनाम मधुमक्खी मीडिया ...

मक्खी मीडिया बनाम मधुमक्खी मीडिया ...
अब यह तो मोदी ही जानते हैं कि उन्होंने मीडिया पर तंज कसने के लिए मक्खी बनाम मधु मक्खी ही क्यों चुनी .
अब यह तो मोदी ही जानते हैं कि उन्होंने मीडिया पर तंज कसने के लिए मक्खी बनाम मधु मक्खी ही क्यों चुनी . मोदी कहते हैं कि पत्रकारों को मक्खी नहीं होना चाहिए जो गंदगी पर बैठती है और गंदगी फैलाती है . पत्रकार को तो मधुमक्खी की तरह होना चाहिए जो शहद पर बैठती है और उसकी राह में आने वाले को डंक मारती है . सवाल उठता है कि अगर हर कोई शहद पर ही बैठेगा तो गंदग ...

अमित शाह ने किया ‘मैनेजमेंट गुरू नरेंद्र मोदी’ का विमोचन ...

अमित शाह ने किया ‘मैनेजमेंट गुरू नरेंद्र मोदी’ का विमोचन ...
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने डायमंड बुक्स से प्रकाशित हिमांशु शेखर की पुस्तक ‘मैनेजमेंट गुरु नरेंद्र मोदी’ का विमोचन किया. इस मौके पर श्री शाह ने ऐसी पुस्तक के प्रकाशन के लिए डायमंड बुक्स के निदेशक श्री नरेंद्र वर्मा को बधाई दी और कहा की आप आगे भी ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन करें. अमित शाह ने कहा की यह एक ऐसी पुस्तक है
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने डायमंड बुक्स से प्रकाशित हिमांशु शेखर की पुस्तक ‘मैनेजमेंट गुरु नरेंद्र मोदी’ का विमोचन किया. इस मौके पर श्री शाह ने ऐसी पुस्तक के प्रकाशन के लिए डायमंड बुक्स के निदेशक श्री नरेंद्र वर्मा को बधाई दी और कहा की आप आगे भी ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन करें. अमित शाह ने कहा की यह एक ऐसी पुस्तक है जिसमे ...

तारा शाहदेव और मीडिया का ''धर्मपरिवर्तन'' ...

तारा शाहदेव और मीडिया का ''धर्मपरिवर्तन'' ...
यह ख़बर आज के इक्का-दुक्का अख़बारों के इक्का-दुक्का संस्करणों में ही किसी कोने पर है कि रांची की सीजेएम कोर्ट ने तारा शाहदेव प्रकरण में सिर्फ ''दहेज प्रताड़ना'' के आरोप का संज्ञान लिया है। राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज़ तारा शाहदेव के जबरन धर्मपरिवर्तन की जो ख़बर महीनों मीडिया में छाई रही, अदालत ने उसका संज्ञान लेना भी ज़रूरी नहीं समझा।
Pankaj Parvez। सीबीआई ने पांच महीने की जाँच के बाद दावा किया है कि बदायूँ कांड, हत्या-बलात्कार नहीं, खुदकुशी का मामला है। मीडिया ने इस काँड की झंडागाड़ रिपोर्टिंग की थी। पेश है इसी प्रवृत्ति पर 8 नवंबर को पोस्ट की गयी एक टिप्पणी--- तारा शाहदेव और मीडिया का ''धर्मपरिवर्तन'' ---------------------------------------------------------- यह ख़बर आज क ...
Latest News मजीठिया मामले में हील - हवाली करने वाले दिल्ली के अधिकारी नपे हाईकोर्ट इलाहाबाद से दैनिक जागरण यूनियन को नोटिस मजीठिया: चंडीगढ़ में मजीठिया संघर्ष समिति ने गवर्नर एवं प्रशासक को सौंपा ज्ञापन तो क्या अब साईं प्रसाद का नम्बर हैं ? संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर को मिलेगा राज्य स्तरीय पर्यावरण पुरस्कार जयपुर भास्कर प्रबंधन ने संजय सैनी का जवाबी पत्र लेने से इनकार किया हिंदु्स्तान, रांची में संपादकों के चहेतों को ही प्रमोशन हिंदुस्तान..जो कर रहें बदनाम..उन्हें मिल रहा सम्मान अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर, पढ़िए कैसे प्रभात खबर की कंपनी उषा मार्टिन के खिलाफ मामला दर्ज बुलंदशहर में फर्जी टीवी चैनल के पत्रकार सहित चार वाहन चोर गिरफ्तार सिटी केबल को 34.12 करोड़ रुपये का एकीकृत घाटा मजीठिया के प्रताडि़त दैनिक जागरण कर्मचारियों को काम देने का निर्देश वीणा जैन बनीं दूरदर्शन की महानिदेशक समाचार, सोशल मीडिया का प्रभार भी प्रभात खबर देवघर के कर्मी प्रचार में जुटे प्रेस क्लब को बचाने के लिए इस पैनल को भी आजमाएं Special Labour Inspectors start working in Delhi BARC India to report Individual Ratings Data from next week किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक Majithia Wage Board: Labour Minister assures सुब्रत राय समेत आठ पर धोखाधड़ी का केस छिंदवाड़ा में चिटफंड कम्पनी साईं प्रसाद के खिलाफ निवेशक पहुंचा थाने Sebi cautions investors against Sai Prasad Group schemes हिंदुस्तान में बंटने लगा इंक्रीमेंट और प्रमोशन का लेटर पंचनामा: टीवी न्यूज़ रिपोर्टिंग की मौत का अमिताभ बच्‍चन करेंगे डीडी किसान चैनल का प्रचार गढ़वा के पत्रकार जवाहर प्रसाद अब हमारे बीच नहीं रहे संजय कुमार की इस अपील पर जरूर गौर करें, गौतम लाहड़ी-प्रदीप श्रीवास्तव-संजय कुमार के पैनल को वोट दे जागरण की एक साल की आमदनी 308.09 करोड़ रुपये मोदी को मीडिया मालिक खूब भाते हैं मुंबई में नेवी ऑफिसर लेफ्टिनेंट एमएस किरण पर महिला पत्रकार से रेप का आरोप रांची में लगा साईं प्रसाद के दफ्तर पर ताला मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ब्रिटने के होटल ग्रॉसवेनर हाउस को फिर खरीदने की दौड़ में सहारा मशहूर नक्कारा वादक अग्गन खान नहीं रहे! खाद का काम करेगा किसान चैनलः सिरोही सामाजिक विकास में पत्रकारों की भूमिका" विषय पर मथुरा में विचार गोष्ठी भोपाल वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन अमर उजाला, बलरामपुर के कराया दो मृत बच्चों का सम्मान हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है जो बढ़ाएं प्रेस क्लब आफ इंडिया का मान उसे ही करें वोट सौ सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शोभना भी Press Club faces Companies Act hurdle इन अखबारों को पढ़ते हैं मोदी, अमर उजाला के पत्रकार बालियान पर हमले को लेकर स्थानीय पत्रकार लामबंद वॉशिंगटन पोस्ट के रिपोर्टर जैसन रेजैन के खिलाफ बंद कमरे में सुनवाई नई दुनिया के वरिष्ठ पत्रकार दिनेश जोशी का निधन राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार आलोक के खाते ठगों ने उड़ाए साढे चार हजार दैनिक बिहार आब्जर्वर के पत्रकार को आपकी मदद की दरकार प्रधानमंत्री जी के पत्र का एक जवाब