''आप बाहर निकल जाइए। ये तो बदतमीज़ी है।''रघु आदित्य का दैनिक भास्कर, जयपुर से इस्तीफा, अमर उजाला में समाचार संपादक बनेअमर उजाला हल्द्वानी को सतर्क रहने की जरूरत, हिंदुस्तान जा रहे हैं दो तिहाई कर्मचारी ‪‎बुरा‬ न मानो क्योंकि मीडिया मे मिलावट हैं? हिंदुस्तान, हल्द्वानी की लांचिंग की तैयारियां शुरू देश को क्यों बांट रहा है मीडिया, कलाम हों रोलमाडल या मेमन सोचना होगानीतीश के गृह जिले में कुशासन की चपेट में पत्रकार मुकेश भारतीय की जानो माल Journalist Rama Pandey honoured in London for a lifetime of achievementsअमर उजाला, बुलंदशहर में शबनम के बेटे का महिमामंडन, कारण क्या है पत्रकारों दलाली छोड़ो, दलालों पत्रकारिता छोड़ोकुल्लू के पत्रकार सुरेश शर्मा को पितृशोकमुलायम सिंह के खिलाफ कोर्ट पहुंचे अमिताभ ठाकुरचार के खिलाफ पिता ने दर्ज कराया मुकदमा, भूमि विवाद बना मौत का कारणदिल्ली में सूचना अधिकारी के साथ कांस्टेबल ने की बदसलूकीपंकज सिंह लखनऊ में आज करेंगे 'कलास्रोत' के नए अंक का लोकार्पणआज थानवी सर का जनसत्ता में आखिरी दिन थाअब दफ्तर से घर को निकल रहा हूंः ओम थानवीओम थानवी के लिए रिटायर्ड शब्द इस्तेमाल करना गुनाह ही समझिएःआज विदा हो जाएंगे जनसत्ता के संपादक ओम थानवी लोकमत के मालिक विजय दर्डा को समन अब कन्नौज में गई पत्रकार की जानओपिनियन पोस्ट से जुड़े मृत्युंजय कुमारप्रतिबंधों के बीच भी फल -फूल रहा है धोखे का धंधा विवेक नागपाल के इशारों पर नाचते हैं देश के दर्जनों मीडिया दिग्गजहिंदुस्तान टाइम्स का अंग बनी सुधा एफटीआईआई छात्रों से राहुल बोले, मैं आपके साथ हूंडीबी कॉर्प का Q1 मुनाफा 66.5 करोड़ रुपएTV Today files Rs 100-cr defamation suit against Radio Cityजाने- माने साहित्यकार हृदयानंद राय का निधन महेश कुमार गुप्त ने लगाई फांसी अब राजस्थान पत्रिका करेगा यूपी का रुख, जाएगा मोदी के संसदीय क्षेत्र याकूब मेमन के फांसी पर सियासतन्यूज एक्सप्रेस को संंचालित करने वाली कंपनी साईं प्रसाद का रिकार्ड खंगाला मीडियाकर्मी बताकर कर दे रहा था धमकी, गया जेलवैशाली मेट्रो स्टेशन पर मीडियाकर्मी का उड़ाया मोबाइल चयन सरकार के घर पर हमले के आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग को लेकर रैली दैनिक जागरण, बरेली में बीस दिन में सोलह बार सिर्फ बसपा विधायक और उनके भाई का फोटो मजीठिया को लेकर वन टू वन चर्चा करेगा मप्र श्रम विभाग दैनिक जगारण के प्रसार मैनेजर खा गए वेंडरों का उपहारसुप्रीम कोर्ट में मेमन के बाद अब मीडिया मालिकों की बारीजागरण को पहली तिमाही में 345.57 करोड़ रुपये का विज्ञापनआखिरकार यह अखबार भी बंद हो गयापत्रकार हरीश तिवारी को मातृशोकपत्रकार सुरक्षा पर जागी शिवराज सरकार टीआरपी का चक्‍कर और मीडिया का पागलपनएक आततायी भीड़ का शोकगानLabour Minister Assures IFWJ Delegation to Amend Working Journalists Act to Include Electronic Mediaकर्मचारियों का हक मार रहे हैं दैनिक भास्कर के अधिकारी कई लोग खा गए इस फोटो से धोखासहारा को एक और झटका, म्यूचुअल फंड का लाइसेंस भी रद

देश को क्यों बांट रहा है मीडिया, कलाम हों रोलमाडल या मेमन सोचना होगा ...

देश को क्यों बांट रहा है मीडिया,  कलाम हों रोलमाडल या मेमन सोचना होगा ...
-संजय द्विवेदी। काफी समय हुआ पटना में एक आयोजन में माओवाद पर बोलने का प्रसंग था। मैंने अपना वक्तव्य पूरा किया तो प्रश्नों का समय आया। राज्य के बहुत वरिष्ठ नेता, उस समय
-संजय द्विवेदी। काफी समय हुआ पटना में एक आयोजन में माओवाद पर बोलने का प्रसंग था। मैंने अपना वक्तव्य पूरा किया तो प्रश्नों का समय आया। राज्य के बहुत वरिष्ठ नेता, उस समय विधान परिषद के सभापति रहे स्व.श्री ताराकांत झा भी उस सभा में थे, उन्होंने मुझे जैसे बहुत कम आयु और अनुभव में छोटे व्यक्ति से पूछा “आखिर देश का कौन सा प्रश्न या मुद्दा है जिस पर सभ ...

याकूब मेमन के फांसी पर सियासत ...

याकूब मेमन के फांसी पर सियासत ...
याकूब मेमन को भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी दी है और यहां तक की राष्ट्रपति द्वारा भी मेनन के याचिका को ठुकराया जा चुका था। ऐसे में अगर मेनन को फांसी की सजा होती है
याकूब मेमन को भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी दी है और यहां तक की राष्ट्रपति द्वारा भी मेनन के याचिका को ठुकराया जा चुका था। ऐसे में अगर मेनन को फांसी की सजा होती है तो इसमें उस व्यक्ति को बोलने का कतई अधिकार नहीं जो कानून और साक्ष्य के प्रति अपरिचित हो। उच्च न्यायालय से लेकर सर्वाेच्च न्यायालय के जज जिन्होंने फांसी की सजा सुनाई उनके समक्ष समस्त ...

एक आततायी भीड़ का शोकगान ...

एक आततायी भीड़ का शोकगान ...
Abhishek Srivastava के फेसबुक वाल से। टीवी चैनलों में लिंक न्‍यूज़ का प्रयोग Punya Prasun Bajpai ने किया था। उनकी आदत है कि हर ख़बर को दूसरी ख़बर के साथ जोड़कर बुलेटिन बनाते हैं
Abhishek Srivastava के फेसबुक वाल से। टीवी चैनलों में लिंक न्‍यूज़ का प्रयोग Punya Prasun Bajpai ने किया था। उनकी आदत है कि हर ख़बर को दूसरी ख़बर के साथ जोड़कर बुलेटिन बनाते हैं ताकि एक परिप्रेक्ष्‍य निर्मित हो सके। इसीलिए आज सुबह जब वे रामेश्‍वरम और मुंबई को अलग-अलग दिखा रहे थे, तब मैंने उन्‍हें एक एसएमएस किया कि क्‍यों न दो विंडो में रामेश्‍वरम ...

चैनलों पर बकबकियों की बहस...!! ...

चैनलों पर बकबकियों की बहस...!! ...
फिल्म गदर करीब डेढ़ दशक पहले आई थी। लेकिन यह शायद इस फिल्म की लोकप्रियता का ही परिणाम है कि अक्सर किसी न किसी चैनल यह प्रदर्शित होती
तारकेश कुमार ओझा फिल्म गदर करीब डेढ़ दशक पहले आई थी। लेकिन यह शायद इस फिल्म की लोकप्रियता का ही परिणाम है कि अक्सर किसी न किसी चैनल यह प्रदर्शित होती ही रहती है। यूं तो फिल्म में कई रोचक व दिल को छू जाने वाले प्रसंग है। लेकिन इस फिल्म का एक सीन वर्तमान राजनीति पर भी सटीक बैठता है। जिसमें पाकिस्तानी राजनेता बने अमरीश पुरी अपनी बेटी के साथ हुई ...

‘पेड न्यूज’ पर जवाबदेही तय हो ...

‘पेड न्यूज’ पर जवाबदेही तय हो ...
Sushil Upadhyay । सपाट शब्दों में कहें तो पेड न्यूज पाठकों के भरोसे के प्रति छल और कपटपूर्ण बर्ताव है। जिन लोगों ने भारतीय पत्रकारिता के आकार-ग्रहण करने में मदद की और उसे वर्तमान
Sushil Upadhyay । सपाट शब्दों में कहें तो पेड न्यूज पाठकों के भरोसे के प्रति छल और कपटपूर्ण बर्ताव है। जिन लोगों ने भारतीय पत्रकारिता के आकार-ग्रहण करने में मदद की और उसे वर्तमान स्तर तक पहुंचाया, पेड न्यूज उनके प्रति भी धोखा है। जैसा कि हम में से ज्यादातर लोग जानते हैं कि आजादी की लड़ाई के दौरान भाषायी पत्रकारिता ने काफी बड़ी चुनौतियों का सामना ...

भाषा की भी है एक राजनीति ...

भाषा की भी  है एक राजनीति ...
अब जबकि भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन सितंबर महीने में होने जा रहा तो एक बार यह विचार जरूर होना चाहिए कि आखिर हिंदी के विकास की समस्याएं क्या
संजय द्विवेदी! अब जबकि भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन सितंबर महीने में होने जा रहा तो एक बार यह विचार जरूर होना चाहिए कि आखिर हिंदी के विकास की समस्याएं क्या हैं? वे कौन से लोग और तत्व हैं जो हिंदी की विकास बाधा हैं? सही मायनों में हिंदी के मान-अपमान का संकट राजनीतिक ज्यादा है। हम पिछले सात दशकों में न तो हिंदी समाज बना सके न ही अपनी भाषा, माटी और ...

न्यूज, पेड न्यूज और फेड न्यूज! ...

न्यूज, पेड न्यूज और फेड न्यूज! ...
Sushil Upadhyay । भले ही साल दर साल वेब-न्यूज का प्रयोग बढ़ रहा हो, लेकिन यह भी सच्चाई है कि अखबारों की प्रसार-संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कुछ साल पहले निजी
Sushil Upadhyay । भले ही साल दर साल वेब-न्यूज का प्रयोग बढ़ रहा हो, लेकिन यह भी सच्चाई है कि अखबारों की प्रसार-संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कुछ साल पहले निजी चैनलों की आमद के बाद आशंका जताई गई थी कि आने वाले बरसों में अखबारों का अंत हो जाएगा। इसी प्रकार की आशंका उस वक्त जताई गई, जब इंटनरेट पर खबरों का दौर आरंभ हुआ। लेकिन, यथार्थ यह है ...

लोहिया के सपनों को तोड़ता मुलायम का नव-समाजवाद ...

लोहिया के सपनों को तोड़ता मुलायम का नव-समाजवाद ...
अजीब व्यवस्था है जिसमें कोई गायत्री प्रजापति या कोई राममूर्ति वर्मा अवैध खनन के आरोप के बावजूद हमारा रहनुमा बना रहता है पर इनके गैर-कानूनी हरकतों के खिलाफ आवाज
एनके सिंहः अजीब व्यवस्था है जिसमें कोई गायत्री प्रजापति या कोई राममूर्ति वर्मा अवैध खनन के आरोप के बावजूद हमारा रहनुमा बना रहता है पर इनके गैर-कानूनी हरकतों के खिलाफ आवाज उठाने वाला आई आई टी से पढ़ा भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी अमिताभ ठाकुर बलात्कार का आरोप झेलता इस बात पर निलंबित हो जाता है कि राज्य छोड़ने के लिए राज्य के पुलिस प्रमुख से इजाजत नह ...

सूरज तराश कौशल आ जाए अगर हमको--- ...

सूरज तराश कौशल आ जाए अगर हमको--- ...
Shrikant Singh के फेसबुक वाल से। हमारे एक वरिष्‍ठ सहयोगी कहा करते थे-बनारस में हम लोगों से कई गुना अधिक काबिल लोग बहुत कम सैलरी में खुश रहते हैं, क्‍योंकि उनका वहां
Shrikant Singh के फेसबुक वाल से। हमारे एक वरिष्‍ठ सहयोगी कहा करते थे-बनारस में हम लोगों से कई गुना अधिक काबिल लोग बहुत कम सैलरी में खुश रहते हैं, क्‍योंकि उनका वहां पत्रकारिता का शौक पूरा हो रहा है। उनकी दिनचर्या का एक अंग यह भी होता था कि खबर छापी और अगले दिन फोन पर लग गए अपने किसी साथी के साथ। देखा न क्‍या रिपोर्ट छापी है। हिला कर रख दिया है। इला ...

प्रभात खबर, धनबाद संस्करण का 16वें वर्ष में प्रवेश ...

प्रभात खबर, धनबाद संस्करण का 16वें वर्ष में प्रवेश  ...
साहिर लुधियानवी की यह पंक्ति क्यों? क्योंकि अलग झारखंड राज्य गठन के डेढ़ दशक और धनबाद नगर निगम को अस्तित्व में आये पांच वर्ष से अधिक समय गुजर चुके हैं. नये राज्य
‘नया सफर है, पुराने चिराग गुल कर दो.’’ साहिर लुधियानवी साहिर लुधियानवी की यह पंक्ति क्यों? क्योंकि अलग झारखंड राज्य गठन के डेढ़ दशक और धनबाद नगर निगम को अस्तित्व में आये पांच वर्ष से अधिक समय गुजर चुके हैं. नये राज्य से लेकर नगर निगम तक से जो उम्मीदें थीं, वह पूरी नहीं हो पायी. ऐसे में ‘निराश’ हो जाना मानवीय स्वभाव है. तो फिर साहिर लुधियानवी क ...

प्रामाणिकता की कसौटी पर खरी है यह बेबाक बयानी ...

प्रामाणिकता की कसौटी पर खरी है यह बेबाक बयानी ...
किसी भी लेखन, विशेषत: संस्मरणात्मक और विश्लेषणात्मक लेखन की श्रेष्ठता की पहली और अनिवार्य शर्त होती है, उसमें वर्णित तथ्यों की विश्वसनीयता। इस कसौटी पर डॉ. सुशील उपाध्याय की पुस्तक सौ फीसद कामयाब है। हालांकि वह मेरे बेहद विश्वसनीय और काबिल सहयोगी रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस पुस्तक के जरिये तथ्यात्मक ईमानदारी
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। मेरे संपादक रहे आदरणीय एल.एन.शीतल जी ने मेरी प्रकाशानाधीन किताब के लिए ये भूमिका लिखी है। अपने इस काम पर मैं इससे बेहतर और मार्गदर्शक-टिप्पणी की उम्मीद नहीं कर सकता था। शीतल जी ने जो आशीर्वाद दिया है, उनके लिए ‘धन्यवाद’ कह देना बहुत छोटा शब्द है। उनका मागर्दशन हमेशा मिलता रहे, यही कामना है। प्रामाणिकता की कसौटी ...

पत्रकारीय-आजादी का सवाल-1 ...

पत्रकारीय-आजादी का सवाल-1 ...
Sushil Upadhyay ! किसी भी पत्रकार के लिए सबसे बड़ी पूंजी यह होती है कि लोग उस पर भरोसा करें। इसके साथ जुड़ी दूसरी बात यह है कि पत्रकार जिस संस्थान में
Sushil Upadhyay ! किसी भी पत्रकार के लिए सबसे बड़ी पूंजी यह होती है कि लोग उस पर भरोसा करें। इसके साथ जुड़ी दूसरी बात यह है कि पत्रकार जिस संस्थान में कार्यरत है, वह संस्थान उस पर भरोसा करे। पत्रकारिता में भरोसे की जितनी अधिक महत्ता है, यह उतनी आसानी से हासिल नहीं होता है। पत्रकार हर वक्त सवालियाा निशान के दायरे में रहता है। पत्रकार को एक साथ क ...

ग्रीक ट्रेजडी के भारतीय मिथक ...

ग्रीक ट्रेजडी के भारतीय मिथक ...
ग्रीस की पवित्र वातोपेदी मॉनेस्ट्री के महंत इफ्राहीम व देश के शिपिंग मंत्री की पत्नी सहित 14 लोगों को पिछले साल नवंबर में जब ग्रीक सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी का दोषी करार दिया,
anshuman tiwari। ग्रीस की ट्रेजडी को घटिया गवर्नेंस व सियासत ने गढ़ा है. ग्रीस के ताजा संकट के कई मिथक भारत से मिलते हैं ग्रीस की पवित्र वातोपेदी मॉनेस्ट्री के महंत इफ्राहीम व देश के शिपिंग मंत्री की पत्नी सहित 14 लोगों को पिछले साल नवंबर में जब ग्रीक सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी का दोषी करार दिया, तब तक यह तय हो चुका था कि ग्रीस (यूनान) आइएमएफ के ...

तटस्थता, निरपेक्षता और पत्रकारिता के मूल्य-3 ...

तटस्थता, निरपेक्षता और पत्रकारिता के मूल्य-3 ...
Sushil Upadhyay । जैसा कि पहले गया है कि पत्रकारिता के मानक और मूल्य अक्सर गतिशील तत्व होते हैं। सत्य भी इस परिभाषा से बाहर नहीं है। सत्य को सही अर्थाें और सही संदर्भाें में
Sushil Upadhyay । जैसा कि पहले गया है कि पत्रकारिता के मानक और मूल्य अक्सर गतिशील तत्व होते हैं। सत्य भी इस परिभाषा से बाहर नहीं है। सत्य को सही अर्थाें और सही संदर्भाें में स्थापित किया जाना जरूरी है। ऐसा न होने पर कई बार असत्य ऐसा आभास देने लगता है कि वह सत्य है और उससे परे कुछ भी नहीं है। कोई भी पत्रकार सच को प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी किसी औ ...

पत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’ ...

पत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’ ...
अगस्त 2014 में मध्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांपुर में एक रहस्यमय पोस्टर पर सबकी निगाह पड़ी थी। गहरे बैंगनी पृष्ठभूमि के इस ‘वांछित’ पोस्टर में कथित के बारे में गंभीर
ईएनएस की रिपोर्ट। अगस्त 2014 में मध्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांपुर में एक रहस्यमय पोस्टर पर सबकी निगाह पड़ी थी। गहरे बैंगनी पृष्ठभूमि के इस ‘वांछित’ पोस्टर में कथित के बारे में गंभीर आरोप थे। पोस्टर में उसे उगाही, ब्लैकमेल करने वाला अपराधी तत्व बताया गया था। इसमें कहा गया था कि उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। पोस्टर में कहा गया कि लोग इस शातिर शख्स ...

नेट न्यूट्रीलिटी’ का अनसुलझा सवाल ...

नेट न्यूट्रीलिटी’ का अनसुलझा सवाल ...
-मनोज कुमार। संचार माध्यमों के विस्तार के साथ ही इंटरनेट ने एक ऐसी दुनिया क्रियेट की जिसके चलते विश्व-ग्राम की अवधारणा की स्थापना हुई। बहुसंख्या में आज भी लोग इंटरनेट फ्रेंडली भले ही न हुए हों लेकिन ज्यादतर काम इंटरनेट के माध्यम से होने लगा है। बाजार ने जब देखा कि इंटरनेट के बिना अब समाज का काम नहीं चलना है तो उसने
-मनोज कुमार। संचार माध्यमों के विस्तार के साथ ही इंटरनेट ने एक ऐसी दुनिया क्रियेट की जिसके चलते विश्व-ग्राम की अवधारणा की स्थापना हुई। बहुसंख्या में आज भी लोग इंटरनेट फ्रेंडली भले ही न हुए हों लेकिन ज्यादतर काम इंटरनेट के माध्यम से होने लगा है। बाजार ने जब देखा कि इंटरनेट के बिना अब समाज का काम नहीं चलना है तो उसने अपने पंजे फैलाना आरंभ कर दिया ...

बातें मीडिया की-17 इंटर्नशिप को बनाएं सीढ़ी ...

बातें मीडिया की-17 इंटर्नशिप को बनाएं सीढ़ी ...
जो युवा पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर इस बात से दो-चार होते हैं कि आखिर इस पेशे में एंट्री कहां से पाई जाए। वैसे, निजी संस्थान तो यही सपना दिखाते हैं कि उनके यहां
Sushil Upadhyay । जो युवा पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर इस बात से दो-चार होते हैं कि आखिर इस पेशे में एंट्री कहां से पाई जाए। वैसे, निजी संस्थान तो यही सपना दिखाते हैं कि उनके यहां मीडिया स्टूडैंट्स के लिए कैंपस सेलेक्शन होता है, लेकिन ये बात आंशिक तौर पर ही सच है। अपवाद छोड़ दे ंतो शायद ही कोई कंपनी किसी मीडिया संस्थान में जा ...

26 जून पर विशेष - … तो अखिलेश यादव अपराधी हैं ...

26 जून पर विशेष - … तो अखिलेश यादव अपराधी हैं  ...
लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को दस हजार रुपए माहवार पेंशन और सम्‍मान देना अपराध है तो मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव अपराधी हैं और मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि वह ताउम्र यह अपराध करते रहें। मेरी इच्‍छा तो यह
Dhirendra Nath Srivastva के फेसबुक वाल से। - लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को दस हजार रुपए माहवार पेंशन और सम्‍मान देना अपराध है तो मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव अपराधी हैं और मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि वह ताउम्र यह अपराध करते रहें। मेरी इच्‍छा तो यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस अपराध में शामिल होकर इस पेंशन और सम्‍मान राष्‍ट्रीय स्‍वरूप दे ...

जनमत ही मीडिया का एकमात्र हथियार ...

जनमत ही मीडिया का एकमात्र हथियार ...
एनके सिंह! मानव और पशु में एक मूल अंतर है. ईश्वर ने मानव में भावना-जनित करुणा और बुद्धि-जनित नैतिकता दी है जो पशु में नहीं होती. नतीजा यह होता
एनके सिंह! मानव और पशु में एक मूल अंतर है. ईश्वर ने मानव में भावना-जनित करुणा और बुद्धि-जनित नैतिकता दी है जो पशु में नहीं होती. नतीजा यह होता है कि कोई करुणा के अतिरेक में चैतन्य महाप्रभु बनता है तो कोई गाँधी बन कर सत्य के प्रति आग्रह जीवन का साध्य मानता है. मानव में ये दोनों पक्ष जितना हीं कम होते जाते हैं वह उतना हीं पशुवत होता जाता है. और जब ...

बातें मीडिया की-15 आॅनलाइन मीडिया का ‘क्लास-कैरेक्टर’ ...

बातें मीडिया की-15 आॅनलाइन मीडिया का ‘क्लास-कैरेक्टर’ ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। आॅनलाइन मीडिया का एक विशिष्ट वर्गीय चरित्र है। यूं तो पूरा आधुनिक मीडिया ही वर्गीय चरित्र पर आधारित है, लेकिन इस पैमाने पर आॅनलाइन मीडिया
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। आॅनलाइन मीडिया का एक विशिष्ट वर्गीय चरित्र है। यूं तो पूरा आधुनिक मीडिया ही वर्गीय चरित्र पर आधारित है, लेकिन इस पैमाने पर आॅनलाइन मीडिया अधिक और व्यापक चिंता पैदा करता हैं। न्यूनतम बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के बिना आॅनलाइन मीडिया के उपयोग के बारे में सोचा नहीं जा सकता। इस ढांचे को कितना भी कम करके देखें तो भी एक ...

पत्रकारों की शहादत, बेशर्म सियासत ...

पत्रकारों की शहादत, बेशर्म सियासत  ...
मुकुंद ! सारी दुनिया में पत्रकारों के सिर पर 24 घंटे मौत का साया मंडराता रहता है। कलम पर हमले जारी हैं। भारत के कई राज्यों में स्थिति बेहद संवेदनशील
मुकुंद ! सारी दुनिया में पत्रकारों के सिर पर 24 घंटे मौत का साया मंडराता रहता है। कलम पर हमले जारी हैं। भारत के कई राज्यों में स्थिति बेहद संवेदनशील है। खासकर उत्तर प्रदेश में पत्रकार बेखौफ होकर काम नहीं कर पा रहे हैं। सत्ता और कानून के पहरेदारों (पुलिस) की संगीने हर पल कलम का पीछा कर रही हैं। बात अस्सी के दशक से शुरू करते हैं। मैं ग्रुजुएशन करके ...

क्या राज्यमंत्री को बर्खास्त करेंगे अखिलेश ...

क्या राज्यमंत्री को बर्खास्त करेंगे अखिलेश  ...
जी हां, जांबाज शहीद पत्रकार जगेन्द्र मामले में आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा व घूसखोर इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय के खिलाफ रपट दर्ज हो जाने के बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो अखिलेश सरकार
जी हां, जांबाज शहीद पत्रकार जगेन्द्र मामले में आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा व घूसखोर इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय के खिलाफ रपट दर्ज हो जाने के बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो अखिलेश सरकार पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है। क्या ऐसे ही मंत्रियो, बाहुबलियों, श्रीप्रकाश राय, संजयनाथ तिवारी जैसे लूटेरा व घुसखोर इंस्पेक्टर, भ्रष्ट आईएएस अमृत त्रि ...

किस्से अखबारों के-48 भाषा की ऐसी की तैसी! ...

किस्से अखबारों के-48 भाषा की ऐसी की तैसी! ...
Sushil Upadhyay। भाषा किसी भी अखबार की जान होती है और शैली उसका सौंदर्य। लेकिन, देहरादून से प्रकाशित होने वाले नामी, प्रतिष्ठित, पहुंचवाले और सरोकार वाले अखबारों को देखकर
Sushil Upadhyay। भाषा किसी भी अखबार की जान होती है और शैली उसका सौंदर्य। लेकिन, देहरादून से प्रकाशित होने वाले नामी, प्रतिष्ठित, पहुंचवाले और सरोकार वाले अखबारों को देखकर लगता है कि इनका सौंदर्य लुट गया और जान भी निकल गई है। एक कागजनुमा मृत देह सुबह-सवेरे लोगों के घरों तक पहुंचाई जाती है। जिन्हें बरसों पुरानी लत लगी हुई है वे घंटा-दो घंटा इस देह को ...

किस्से अखबारों के-47 पारुल की शिकायत और मीडिया में लड़कियां ...

किस्से अखबारों के-47 पारुल की शिकायत और मीडिया में लड़कियां ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पिछले दिनों एक पोस्ट में कुछ ऐसे दोस्तों का जिक्र किया था, जिन्होंने दस साल या उससे भी कम समय में ट्रेनी से संपादक तक का सफर पूरा किया है।
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पिछले दिनों एक पोस्ट में कुछ ऐसे दोस्तों का जिक्र किया था, जिन्होंने दस साल या उससे भी कम समय में ट्रेनी से संपादक तक का सफर पूरा किया है। संयोग ऐसा रहा है कि इस पोस्ट के सभी नाम पुरुष थे। इस पर मेरी पूर्व सहकर्मी और मेरे गुरु प्रो. कमलकांत बुधकर की पुत्रवधु पारुल बुधकर का संदेश मिला। उनकी आपत्ति है कि मैं केवल पुर ...

किस्से अखबारों के-46 सफलता का कोई नियम नहीं! ...

किस्से अखबारों के-46 सफलता का कोई नियम नहीं! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में सफलता और विफलता, बहुत बड़ी हद तक संयोगों पर निर्भर करती है। जिसके जीवन में संयोग सध जाएं, उसे सफलता हासिल हो जाती है
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में सफलता और विफलता, बहुत बड़ी हद तक संयोगों पर निर्भर करती है। जिसके जीवन में संयोग सध जाएं, उसे सफलता हासिल हो जाती है और जो अनुकूल संयोगों की श्रंखला से वंचित रह जाए, उसकी गिनती विफल लोगों में होने लगती है। मोटे तौर पर तो यही कहा जाता है कि मेधावी, योग्य, दक्ष, परिश्रमी और सुपात्र व्यक्ति कभी विफल ...

पत्रकारिता की साख पर बट्टा लगा रहे है दलाल पत्रकार ...

पत्रकारिता की साख पर बट्टा लगा रहे है दलाल पत्रकार  ...
सुरेश गांधी। बात उन दिनों की है जब समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियां चरम पर थी। ब्रतानियां हुकूमत की लाठियां हिन्दुस्तानियों पर कहर बनकर टूट रही थी। बहु-बेटियों की
पत्रकारिता दिवस पर विशेष हर कोई अखबार में काम तो करना चाहता है लेकिन उसके पीछे उस व्यक्ति के कई कारण होते हैं। यानी आज पत्रकारिता बुरे दौर से गुजरने पर मजबूर हैं। अरे अब तो वह दौर आ चुका है कि पैसे के लिए वे अपने ही किसी साथी की बलि बहुत ही संयत भाव से चढा सकते हैं। माना कि पत्रकारिता अब मिशन नहीं, यह एक प्रोफेशन और बिजनेस हो चला है। मगर क्या हर ...

अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर, पढ़िए कैसे ...

अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर,  पढ़िए कैसे  ...
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई। 42 साल तक कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग की पिछले पखवाड़े हुई मौत के बाद यह सवाल बार- बार उठ रहा था कि उसका कातिल सोहनलाल वाल्मिकी आखिर है
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई। 42 साल तक कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग की पिछले पखवाड़े हुई मौत के बाद यह सवाल बार- बार उठ रहा था कि उसका कातिल सोहनलाल वाल्मिकी आखिर है कहां ? क्या वह जिंदा भी है या नहीं ? खुद पुलिस को सोहनलाल के जिंदा होने पर शक था, पर जो काम पुलिस नहीं कर पाई, वह काम किया एक मराठी अखबार के प्रमुख संवाददाता ज्ञानेश चव्हाण ने खुद सोहनलाल क ...

किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक ...

किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक ...
पत्रकारिता की कक्षा में छात्र-छात्राएं अक्सर सफलता के गुर पूछते हैं, वे जानना चाहते हैं कि कौन-से रास्ते से चलकर वे परचम लहरा सकते हैं। उनकी इस जिज्ञासा का जवाब देना बेहद
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की कक्षा में छात्र-छात्राएं अक्सर सफलता के गुर पूछते हैं, वे जानना चाहते हैं कि कौन-से रास्ते से चलकर वे परचम लहरा सकते हैं। उनकी इस जिज्ञासा का जवाब देना बेहद कठिन है। मैं, अक्सर उनके सामने कुछ उदाहरण रखता हूं। ये उदाहरण इतिहास के किन्हीं महान पत्रकारों के नहीं हैं, वरन मेरे समकालीन उन लोगों के हैं ...

मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ...

मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ...
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। वो सच में परिवर्तन के दिन थे...मेरे निजी जीवन के परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों ने भी दस्तक देना शुरु कर दिया था।अब यह बात
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। वो सच में परिवर्तन के दिन थे...मेरे निजी जीवन के परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों ने भी दस्तक देना शुरु कर दिया था।अब यह बात और है कि मेरी ही तरह बाकी लोग भी इन परिवर्तनों को नजर अंदाज कर रहे थे या इनकी गंभीरता को हल्के से ले रहे थे।यही वह समय था जब नरसिम्हा राव के नेतृत्व में मनमोहन सिंह देश की आर्थि ...

हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आत ...

हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आत ...
Nadim S. Akhter के फेसबुक वाल से। बुरा मत मानिएगा लेकिन भारत में हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है. लगता है कि -पत्रकार- का पत्र कहीं
Nadim S. Akhter के फेसबुक वाल से। बुरा मत मानिएगा लेकिन भारत में हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है. लगता है कि -पत्रकार- का पत्र कहीं दूर छूट गया है, सिर्फ -कार- ही बची है. कोई चैनल बेशर्मी से भारत में गर्मी के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरता है (कम पढ़े-लिखे लोगों के मन में पाकिस्तान के खिलाफ भावनाएं भ ...

किस्से अखबारों के-44 मीडिया अध्ययन के लिए ‘केस-स्टडी’ है राज ठाकरे ...

किस्से अखबारों के-44 मीडिया अध्ययन के लिए ‘केस-स्टडी’ है राज ठाकरे ...
Sushil Upadhyay। दिल्ली के पत्रकारों की दुनिया एकदम अलग है। छोटी जगहों पर पत्रकारिता करते हुए लगता है कि दिल्ली में बैठे तमाम पत्रकार महामानव हैं, उनमें नारद, हनुमान,
Sushil Upadhyay। दिल्ली के पत्रकारों की दुनिया एकदम अलग है। छोटी जगहों पर पत्रकारिता करते हुए लगता है कि दिल्ली में बैठे तमाम पत्रकार महामानव हैं, उनमें नारद, हनुमान, व्यास और महाभारत के संजय, सभी की खूबी समाई हुई है। लेकिन, जब आप उनके साथ काम करते हैं या पत्रकारिता से संबंधित कोई मदद मांगते हैं तो वे एकदम भिन्न किस्म के जीव नजर आते हैं। इन जीवों क ...

ताक में पत्रकारिता, तकनीकी का दौर ...

ताक में पत्रकारिता, तकनीकी का दौर ...
मनोज कुमार!nसाल 1826, माह मई की 30 तारीख को ‘उदंत मार्तंड’ समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था. पराधीन
30 मई हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विशेष मनोज कुमार!साल 1826, माह मई की 30 तारीख को ‘उदंत मार्तंड’ समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था. पराधीन भारत को स्वराज्य दिलाने की गुरुत्तर जवाबदारी तब पत्रकारिता के कांधे पर थी. कहना न होगा कि हिन्दी पत्रकारिता ने न केवल अपनी जवाबदारी पूरी निष्ठा के साथ पूर्ण किया, अपितु भविष्य ...

किस्से अखबारों के-42 योग्यता का सवाल और डिग्री की जरूरत ...

किस्से अखबारों के-42 योग्यता का सवाल और डिग्री की जरूरत ...
Sushil Upadhyay ! पत्रकारिता के साथ बरसों से एक सवाल जुड़ा हुआ है कि किसी पत्रकार की योग्यता क्या होनी चाहिए ? इसके साथ दूसरा सवाल यह है कि इस
Sushil Upadhyay ! पत्रकारिता के साथ बरसों से एक सवाल जुड़ा हुआ है कि किसी पत्रकार की योग्यता क्या होनी चाहिए ? इसके साथ दूसरा सवाल यह है कि इस योग्यता का निर्धारण कैसे हो ? और क्या किसी ऐसी संस्था या मैकेनिज्म की जरूरत है जो पत्रकारों की योग्यता को जांच-परख सके ? साल, 1993 में जब मैं नवभारत, भोपाल में काम सीखने गया तो यह बात पहले दिन ही समझ में आ ...

किस्से अखबारों के-42 माया, मोदी और मीडिया ...

किस्से अखबारों के-42 माया, मोदी और मीडिया ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। साल 2014 की खबरों को मानक मान लें तो मोटे तौर पर कह सकते हैं कि मीडिया में मोदियापा छाया रहा है। इसके बरअक्स, दूसरा तथ्य यह है कि
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। साल 2014 की खबरों को मानक मान लें तो मोटे तौर पर कह सकते हैं कि मीडिया में मोदियापा छाया रहा है। इसके बरअक्स, दूसरा तथ्य यह है कि मेनस्ट्रीम मीडिया में बसपा और उसकी प्रमुख मायावती के प्रति एक खास तरह का द्वेष और घृणा का भाव अक्सर नजर आता है। ये भाव इतने गहरे तक बैठा हुआ है कि कई बार अनजाने में ही इसकी बेहद चिंताजनक ...

किस्से अखबारों के-41: चैथा खंभा है या रेत की दीवार! ...

किस्से अखबारों के-41: चैथा खंभा है या रेत की दीवार! ...
Sushil Upadhyay। 2014 के लोकसभा चुनाव में मीडिया, खासतौर से टीवी मीडिया ने लोकतंत्र के चैथे-खंभे की बजाय खुद को रेत की दीवार में बदल लिया है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में
Sushil Upadhyay। 2014 के लोकसभा चुनाव में मीडिया, खासतौर से टीवी मीडिया ने लोकतंत्र के चैथे-खंभे की बजाय खुद को रेत की दीवार में बदल लिया है। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में एबीपी न्यूज और जी-न्यूज पर मोदी के इंटरव्यू देखने के बाद से ऐसा लग रहा है कि पत्रकार और पत्रकारिता की परिभाषा को नए सिरे से परिभाषित किया जाना चाहिए। पत्रकार की विशेषताओं का भी पुनर ...

किस्से अखबारों के-40 आरक्षण का मुद्दा और रिपोर्टिंग के मानक ...

किस्से अखबारों के-40 आरक्षण का मुद्दा और रिपोर्टिंग के मानक ...
Sushil Upadhyay! यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या मुख्यधारा का हिंदी मीडिया बुनियादी तौर पर सवर्ण मीडिया है ? सीधे तौर पर हां या ना कह देना
Sushil Upadhyay! यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या मुख्यधारा का हिंदी मीडिया बुनियादी तौर पर सवर्ण मीडिया है ? सीधे तौर पर हां या ना कह देना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन मुख्यधारा के हिंदी मीडिया में हर रोज ऐसे उदाहरण देखने को मिल जाएंगे जिनसे यह पता चलता है कि संबंधित खबरों या विश्लेषणों में पीछे कौन-सा दिमाग काम कर रहा था। मीडिया के पास जब भी आरक्षण या ऐ ...

किस्से अखबारों के-39 बहुत नाशुक्रा काम है समीक्षा करना ...

किस्से अखबारों के-39 बहुत नाशुक्रा काम है समीक्षा करना ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में जिस किसी को ठिकाने लगाना हो, उसे अखबारों की समीक्षा का काम दे देते हैं। मुझे भी एक बार अमर उजाला, मेरठ में और
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में जिस किसी को ठिकाने लगाना हो, उसे अखबारों की समीक्षा का काम दे देते हैं। मुझे भी एक बार अमर उजाला, मेरठ में और एक बार अमर उजाला, देहरादून में समीक्षा का काम करना पड़ा। तथाकथित समीक्षकों को अखबार में छपी भाषायी, तथ्यात्मक और प्रस्तुति संबंधी गलतियों को छांटकर रिपोर्ट तैयार करनी होती है। इस रिपोर्ट क ...

किस्से अखबारों के-35-तनाव सहो या भगोड़े बन जाओ! ...

 किस्से अखबारों के-35-तनाव सहो या भगोड़े बन जाओ! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। सामान्यतः लोग यही कहते हैं कि सेना में काम करने के लिए बहुत ऊंचे मानसिक बल की जरूरत पड़ती है। इसके अभाव में व्यक्ति या तो आत्मघात कर लेगा
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। सामान्यतः लोग यही कहते हैं कि सेना में काम करने के लिए बहुत ऊंचे मानसिक बल की जरूरत पड़ती है। इसके अभाव में व्यक्ति या तो आत्मघात कर लेगा या फिर भगोड़ा हो जाएगा। यही बात मीडिया पर भी ज्यों की त्यों लागू होती है। मीडिया में काम करने के लिए जिन चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत है, उनमें से एक है-मानसिक दबाव सहने की योग्य ...

किस्से अखबारों के-37-शशि शेखर का घृणाशास्त्री और...... ...

किस्से अखबारों के-37-शशि शेखर का घृणाशास्त्री और...... ...
अमर उजाला छोड़े हुए सात साल हो गए, हिन्दुस्तान को भी पांच साल पहले अलविदा कहा था, लेकिन दोनों अखबारों के साथ भावात्मक रिश्ता बना हुआ है, भले
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से! अमर उजाला छोड़े हुए सात साल हो गए, हिन्दुस्तान को भी पांच साल पहले अलविदा कहा था, लेकिन दोनों अखबारों के साथ भावात्मक रिश्ता बना हुआ है, भले ही यह एकतरफा क्यों न हो! यह सब वैसा ही जैसा कि अपने अतीत के प्रति एक खास तरह का आकर्षण हमेशा बना रहता है। सुबह अखबार देखता हूं तो पुराने दिनों की तरह उन कमियों की ओर ध्यान जाता ...

किस्से अखबारों के-34- वैदिक जी से वास्ता और आवरण का सच ...

किस्से अखबारों के-34- वैदिक जी से वास्ता और आवरण का सच ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की दुनिया में कुछ ऐसे नाम हैं, जो कभी मेरी पसंद का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उनसे गाहे-बगाहे वास्ता पड़ता रहा। इन्हीें में से एक नाम डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का भी है।
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की दुनिया में कुछ ऐसे नाम हैं, जो कभी मेरी पसंद का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन उनसे गाहे-बगाहे वास्ता पड़ता रहा। इन्हीें में से एक नाम डाॅ. वेदप्रताप वैदिक का भी है। वैदिक जी साल 1994 में प्रेस क्लब, हरिद्वार द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस समारोह में मुझे उनके हाथ गोल्ड मेडल ...

किस्से अखबारों के-30- ऐसी-वैसी भाषा, कैसी-कैसी भाषा! ...

किस्से अखबारों के-30- ऐसी-वैसी भाषा, कैसी-कैसी भाषा! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। मीडिया की दुनिया में रहते हुए दो बार शशिशेखर जी के साथ काम करने का मौका मिला। पहले अमर उजाला और फिर हिन्दुस्तान में। उनके नाम के
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। मीडिया की दुनिया में रहते हुए दो बार शशिशेखर जी के साथ काम करने का मौका मिला। पहले अमर उजाला और फिर हिन्दुस्तान में। उनके नाम के साथ जी लगाने पर कुछ लोगों को एतराज हो सकता है, लेकिन मेरा मन कई कारणों से उनका सम्मान करता हूं। शशिशेखर को भले ही कितनी भी गालियां दी जाएं, लेकिन वे हिंदी के उन संपादकों में हैं जिन्हों ...

मीडिया की मंडी में हम-16- तालठोंक मामले का क्या हश्र हुआ ...

मीडिया की मंडी में हम-16- तालठोंक मामले का क्या हश्र हुआ ...
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। तो मित्रों मैं 1992 में जयपुर हाइकोर्ट में करप्शन,वकीलों की नाराजगी और मुझ पर अवमानना के मुद्दे की चर्चा कर रहा था।मेरा सोशल एक्टिविस्ट सक्रिय
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। तो मित्रों मैं 1992 में जयपुर हाइकोर्ट में करप्शन,वकीलों की नाराजगी और मुझ पर अवमानना के मुद्दे की चर्चा कर रहा था।मेरा सोशल एक्टिविस्ट सक्रिय हो गया था...मैं प्रेस कांफ्रेंस में मुखर हर वकील से ,उसके घर जाकर मिला....उनके द्वारा जजों पर लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों के सबूत इकठ्ठे किए। स्टोरी लिखी और भेज दी। हमारे ब ...

मीडिया की मंडी में हम-15 ...

मीडिया की मंडी में हम-15  ...
dhiraj kulshrestha! माया ज्वॉइन करते ही अगले महीने मैंने एक दुस्साहसी स्टोरी लिख दी.......\"अदालत कटघरे में\"।इस स्टोरी में न्यायपालिका
मेरा सोशल एक्टिविस्ट जाग गया dhiraj kulshrestha! माया ज्वॉइन करते ही अगले महीने मैंने एक दुस्साहसी स्टोरी लिख दी.......\"अदालत कटघरे में\"।इस स्टोरी में न्यायपालिका में और खास तौर पर हाईकोर्ट की जयपुर बैंच के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।इस स्टोरी को माया ने प्रमुखता से छापा और वह अंक एक ही दिन में बाजार में बिक गया।हर तरफ...खास तौर से ज्यूड ...

कितना मजबूत है लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ? ...

कितना मजबूत है लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ? ...
Dinesh Chandra के फेसबुक वाल से। आज़ादी के बाद से लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ भली भांति फलफूल गए ।लेकिन चौथा स्तम्भ शायद भीतर ही भीतर गल गया।आज मिडिया की जो तरक्की नज़र
Dinesh Chandra के फेसबुक वाल से। आज़ादी के बाद से लोकतंत्र के तीनों स्तम्भ भली भांति फलफूल गए ।लेकिन चौथा स्तम्भ शायद भीतर ही भीतर गल गया।आज मिडिया की जो तरक्की नज़र आती है वो बस कुछ बड़े मिडिया हाउस है ।जो बड़े कॉरपोरेट घरानों या राजनेताओं से जुड़े है। वो समाचार पत्र जो स्थानीय स्तर पर निकलते हैं आज मरने की कगार पर हैं।कुछ सिधार चुके कुछ जीने क ...

तो जल्द ही अभिजात्य वर्ग की गिरफ्त में होगी पत्रकारिता भी....!! ...

तो जल्द ही अभिजात्य वर्ग की गिरफ्त में होगी पत्रकारिता भी....!! ...
तारकेश कुमार ओझा ! क्या गीत - संगीत व कला से लेकर राजनीति के बाद अब लेखन व पत्रकारिता के क्षेत्र में भी जल्द ही ताकतवर अभिजात्य वर्ग का क
​ तारकेश कुमार ओझा ! क्या गीत - संगीत व कला से लेकर राजनीति के बाद अब लेखन व पत्रकारिता के क्षेत्र में भी जल्द ही ताकतवर अभिजात्य वर्ग का कब्जा होने वाला है। क्या बड़े - बड़े लिक्खाड़ इस वर्ग के पीछे वैसे ही घूमते रहने को मजबूर होंगे , जैसा राजनीति के क्षेत्र में देखने को मिलता है। क्या यह क्षेत्र अब तक इस वर्ग की धमक से काफी हद तक इस वजह से ...

शेखर ने मानी भूल ...

शेखर ने मानी भूल ...
रामबहादुर राय! शेखर गुप्ता ने आखिरकार अपनी भूल मान ली है, पर एक गहरी हिचकिचाहट और बहुत चालाकी के साथ।
रामबहादुर राय! शेखर गुप्ता ने आखिरकार अपनी भूल मान ली है, पर एक गहरी हिचकिचाहट और बहुत चालाकी के साथ। अपने कॉलम में उन्होंने 18 फरवरी को लिखा था- ’27 साल गुजर चुके हैं। मैं इलाहाबाद की अपनी रिपोर्टर डायरी से एक अंश जाहिर कर ही सकता हूं। वीपी.सिंह ने चुनावों की साफ-सुथरी फंडिंग और कम से कम खर्च करने पर जोर दिया था। मोटरसाइकल पर प्रचार करना उनका ...

मजीठिया वेज बोर्ड: अफवाहों से बचें, विशेष जांच टीम से हकीकत बयां करें ...

मजीठिया वेज बोर्ड: अफवाहों से बचें, विशेष जांच टीम से हकीकत बयां करें ...
मेरे एक मित्र और वरिष्ठ पत्रकार उस दिन तो फोन कनेक्ट होते ही बिफर पड़े। अत्यंत विचलित और अधीरज भरे लहजे में बोलने लगे, च्मैने अपनी रिट पिटीशन
मेरे एक मित्र और वरिष्ठ पत्रकार उस दिन तो फोन कनेक्ट होते ही बिफर पड़े। अत्यंत विचलित और अधीरज भरे लहजे में बोलने लगे, च्मैने अपनी रिट पिटीशन के लिए वकील साहब को पे स्लिप और दूसरे जरूरी कागजात तो दे दिए थे। सुप्रीम कोर्ट में उसे जज साहब को दिखाया क्यों नहीं? दूसरे साथियों ने भी पे स्लिप समेत सारे कागजात-डाक्यूमेंट केस के साथ संलग्न करने के लिए दिए ...

मीडिया की मंडी में हम-14 ...

मीडिया की मंडी में हम-14 ...
Dhiraj Kulshreshtha. जयपुर दूरदर्शन से जुड़ने के बाद भी फ्रीलांसिंग जारी थी.......’माया’ में नियमित लेखन भी।फरवरी 1992 में माया का नियमित संवाददाता बन गया......पत्रकार ओम
हमारी टीम उन प्रतिक्रियाओं का आनंद उठाती थी ----------------------------------------------------------------------- Dhiraj Kulshreshtha. जयपुर दूरदर्शन से जुड़ने के बाद भी फ्रीलांसिंग जारी थी.......’माया’ में नियमित लेखन भी।फरवरी 1992 में माया का नियमित संवाददाता बन गया......पत्रकार ओम सैनी ब्यूरो चीफ थे,श्रीपाल शक्तावत साथ में संवाददाता थे औ ...

मीडिया की मंडी में हम-13 ...

मीडिया की मंडी में हम-13 ...
dhiraj kulshreshtha। ये मार्च या अप्रैल 1990 था,जब मैं जयपुर दूरदर्शन समाचार विभाग से नियमित जुड़ा था।एक कैजुअल सब एडिटर कम ट्रांसलेटर के रूप में......हर महीने दस दिन
dhiraj kulshreshtha। ये मार्च या अप्रैल 1990 था,जब मैं जयपुर दूरदर्शन समाचार विभाग से नियमित जुड़ा था।एक कैजुअल सब एडिटर कम ट्रांसलेटर के रूप में......हर महीने दस दिन की बुकिंग मिलती थी....उससे एक मुश्त कमरे का किराया और भोजन सहित छोटा-मोटा खर्च निकल जाता था,ये बहुत बड़ा सहारा था।साथ ही यह उम्मीद भी, कि कभी मौका लगा तो दूरदर्शन में स्थायी हो जाएंग ...

रवीश कुमार : क्या मीडिया बचा सकता था गजेंद्र की जान? ...

रवीश कुमार : क्या मीडिया बचा सकता था गजेंद्र की जान? ...
दक्षिण वियतनाम की एक सड़क पर नंगी भागती किम फुक (Kim Phuc) की उस तस्वीर को कौन भूल सकता है। नौ साल की किम के साथ कुछ और बच्चे भाग रहे हैं। सड़क के अंतिम छोर पर बम धमाके के
दक्षिण वियतनाम की एक सड़क पर नंगी भागती किम फुक (Kim Phuc) की उस तस्वीर को कौन भूल सकता है। नौ साल की किम के साथ कुछ और बच्चे भाग रहे हैं। सड़क के अंतिम छोर पर बम धमाके के बाद उठा हुआ काले धुएं का गुबार है। युद्ध की तबाही का यह काला सच दुनिया के सामने नहीं आता, अगर फोटोग्राफर निक ने हिम्मत करके वह तस्वीर न ली होती। निक ने न सिर्फ तस्वीर ली, बल्कि क ...
Latest News ''आप बाहर निकल जाइए। ये तो बदतमीज़ी है।'' रघु आदित्य का दैनिक भास्कर, जयपुर से इस्तीफा, अमर उजाला में समाचार संपादक बने अमर उजाला हल्द्वानी को सतर्क रहने की जरूरत, हिंदुस्तान जा रहे हैं दो तिहाई कर्मचारी ‪‎बुरा‬ न मानो क्योंकि मीडिया मे मिलावट हैं? हिंदुस्तान, हल्द्वानी की लांचिंग की तैयारियां शुरू देश को क्यों बांट रहा है मीडिया, कलाम हों रोलमाडल या मेमन सोचना होगा नीतीश के गृह जिले में कुशासन की चपेट में पत्रकार मुकेश भारतीय की जानो माल Journalist Rama Pandey honoured in London for a lifetime of achievements अमर उजाला, बुलंदशहर में शबनम के बेटे का महिमामंडन, कारण क्या है पत्रकारों दलाली छोड़ो, दलालों पत्रकारिता छोड़ो कुल्लू के पत्रकार सुरेश शर्मा को पितृशोक मुलायम सिंह के खिलाफ कोर्ट पहुंचे अमिताभ ठाकुर चार के खिलाफ पिता ने दर्ज कराया मुकदमा, भूमि विवाद बना मौत का कारण दिल्ली में सूचना अधिकारी के साथ कांस्टेबल ने की बदसलूकी पंकज सिंह लखनऊ में आज करेंगे 'कलास्रोत' के नए अंक का लोकार्पण आज थानवी सर का जनसत्ता में आखिरी दिन था अब दफ्तर से घर को निकल रहा हूंः ओम थानवी ओम थानवी के लिए रिटायर्ड शब्द इस्तेमाल करना गुनाह ही समझिएः आज विदा हो जाएंगे जनसत्ता के संपादक ओम थानवी लोकमत के मालिक विजय दर्डा को समन अब कन्नौज में गई पत्रकार की जान ओपिनियन पोस्ट से जुड़े मृत्युंजय कुमार प्रतिबंधों के बीच भी फल -फूल रहा है धोखे का धंधा विवेक नागपाल के इशारों पर नाचते हैं देश के दर्जनों मीडिया दिग्गज हिंदुस्तान टाइम्स का अंग बनी सुधा एफटीआईआई छात्रों से राहुल बोले, मैं आपके साथ हूं डीबी कॉर्प का Q1 मुनाफा 66.5 करोड़ रुपए TV Today files Rs 100-cr defamation suit against Radio City जाने- माने साहित्यकार हृदयानंद राय का निधन महेश कुमार गुप्त ने लगाई फांसी अब राजस्थान पत्रिका करेगा यूपी का रुख, जाएगा मोदी के संसदीय क्षेत्र याकूब मेमन के फांसी पर सियासत न्यूज एक्सप्रेस को संंचालित करने वाली कंपनी साईं प्रसाद का रिकार्ड खंगाला मीडियाकर्मी बताकर कर दे रहा था धमकी, गया जेल वैशाली मेट्रो स्टेशन पर मीडियाकर्मी का उड़ाया मोबाइल चयन सरकार के घर पर हमले के आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग को लेकर रैली दैनिक जागरण, बरेली में बीस दिन में सोलह बार सिर्फ बसपा विधायक और उनके भाई का फोटो मजीठिया को लेकर वन टू वन चर्चा करेगा मप्र श्रम विभाग दैनिक जगारण के प्रसार मैनेजर खा गए वेंडरों का उपहार सुप्रीम कोर्ट में मेमन के बाद अब मीडिया मालिकों की बारी जागरण को पहली तिमाही में 345.57 करोड़ रुपये का विज्ञापन आखिरकार यह अखबार भी बंद हो गया पत्रकार हरीश तिवारी को मातृशोक पत्रकार सुरक्षा पर जागी शिवराज सरकार टीआरपी का चक्‍कर और मीडिया का पागलपन एक आततायी भीड़ का शोकगान Labour Minister Assures IFWJ Delegation to Amend Working Journalists Act to Include Electronic Media कर्मचारियों का हक मार रहे हैं दैनिक भास्कर के अधिकारी कई लोग खा गए इस फोटो से धोखा सहारा को एक और झटका, म्यूचुअल फंड का लाइसेंस भी रद