टीआई ने पत्रकार को उठाया, की मारपीटगाजियाबाद में महिला पत्रकार से लूटहिन्दुस्तान में साइन कराने का सिलसिला शुरू पत्रकार अक्षय सिंह की विसरा रिपोर्ट तैयार, सीबीआईI के पास जाएगीतुर्की में 2 ब्रिटिश पत्रकार पुलिस हिरासत मेंदैनिक भास्कर मुरैना के सिटी हेड रवि भटनागर के पिता का निधनकरोड़ की डील को लेकर विवादों में सिद्धू, चैनल ने मांगा हर्जानाजागरण के प्रधान संपादक और CEO संजय गुप्ता ने प्रधानमंत्री को सौंपा ड्राफ्टपीपली लाइव के निर्देशक के खिलाफ आरोप तयराजस्थान पत्रिका के साथ जुड़े पुनीत पराशर पत्रकारों का बैर व्यक्ति से नहीं प्रतिबंधित चैनलों का प्रसारण नहींओमजी ने पुरस्‍कार कल्‍याण सिंह के हाथों नहीं बल्कि राज्‍यपाल के हाथों से लियाचंपू संपादक नहीं हैं शशि शेखर .....मजीठिया रिपोर्ट पर श्रम मंत्री नाराज , कई पर गिरेगी गाजMajithia Award: it is as dismal in Madhya Pradesh as in other states नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स के चुनावी दंगल की तैयारी जोरों पर Not even one employee of any newspaper of Rajathan is getting Majithia Award जागरण के मुख्यमहाप्रबंधक,कार्मिक प्रबंधक और मार्केटिंग मैनेजर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्जन्यूजX में पीटर-इंद्राणी के कारनामे भी कम रहस्‍यमय नहींहिंदी की फुल स्पीड...!!कैसे मिलेगा न्याय और मजीठिया , जब...सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय हुआ इनके हवाले क्या करें इन अकादमियों का ?प्रगतिशील कन्नड़ लेखक कलबर्गी की हत्या प्रांशु अध्यक्ष, नीरज सचिव और संजय शर्मा चुने गए उपाध्यक्षहिंदी के कई अखबारों में काम किया, साथी ने ही जान ले लीकब तक लटकती रहेगी तलवारअतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा का फार्म कल अखबार में छपेगाधनबाद पुलिस पत्रकारों की आवाज दबाने में लगीRaghav Chari IIMC से विदाकांग्रेस का आरोप, भाजपा की शह पर स्टिंग ऑपरेशनपत्रकार रतन पंवार पर देर रात हमलागलत सूचना देकर लोगों को गुमराह कर रहा सोनभद्र का सूचना विभागजमादार हत्याकांड में आरोपी थानेदार ने किया पत्रकारों पर केसजागरण, सहारनपुर में ब्रांडिंग के नाम पर करोड़ों का खेलप्रधानमंत्री ने मीडिया सलाहकार नहीं रखा, खुद ही संभालते हैं कमानमीडिया के दरबार में इंद्राणी की फंतासीरवीश कुमार ने कुछ गलत कहा क्यारवीश कुमार सही में दलाल हैअरुण सिंह अमर उजाला के साथ जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हितेन महंत का बीमारी के बाद निधनमीडिया, पुलिस और जनमतविवेक सिंह की माताजी का डेंगू से निधनइंद्राणी मुखर्जी के फ्लैट से सूटकेस बरामद, इसमें छुपे हैं कुछ राजकानपुर में दरोगा ने मीडिया कर्मी पर तानी रिवाल्वर, सस्पेंडबीजापुर में मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यहार गीता प्रेस विवाद को खत्म कराएंगे उप श्रमायुक्तअल-जजीरा के पत्रकारों की सजा पर UN चिंतितउत्तर प्रदेश राज्य मान्यता संवाददाता समिति का परिणाम घोषित, हेमंत अध्यक्ष, सिद्धार्थ सचिव चुने

हिंदी की फुल स्पीड...!! ...

हिंदी की फुल स्पीड...!! ...
तारकेश कुमार ओझा। जब मैने होश संभाला तो देश में हिंदी – विरोध और समर्थन दोनों का मिला – जुला माहौल था। बड़ी संख्या में लोग हिंदी प्रेमी थे, जो लोगों से
तारकेश कुमार ओझा। जब मैने होश संभाला तो देश में हिंदी – विरोध और समर्थन दोनों का मिला – जुला माहौल था। बड़ी संख्या में लोग हिंदी प्रेमी थे, जो लोगों से हिंदी अपनाने की अपील किया करते थे। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों खास कर तामिलनाडु में इसके हिंसक विरोध की खबरें भी जब – तब सुनने – पढ़ने को मिला करती थी। हालांकि काफी प्रयास के बावजूद इसकी वजह मेरी सम ...

कब तक लटकती रहेगी तलवार ...

कब तक लटकती रहेगी तलवार ...
हिन्दी पत्रकारिता संक्रमण काल से गुजर रही है... यह बात तबसे (1987) सुन रहा हूँ जब पत्रकारिता शुरू की थी | बातचीत के दौरान मेरे सीनियर यह जुमला दोहराते थे... अब सोचता हूँ की कब
हिन्दी पत्रकारिता संक्रमण काल से गुजर रही है... यह बात तबसे (1987) सुन रहा हूँ जब पत्रकारिता शुरू की थी | बातचीत के दौरान मेरे सीनियर यह जुमला दोहराते थे... अब सोचता हूँ की कब इसके अच्छे दिन थे ? वो दिन लद गए जब पत्रकारिता मिशन हुआ करती थी...आजादी के पहले अंग्रेजों से लड़ने का हथियार हुआ करती थी अब धंधा होकर रह गयी है | हर धंधे की तरह इसका भी उद्द ...

रवीश कुमार ने कुछ गलत कहा क्या ...

रवीश कुमार ने कुछ गलत कहा क्या ...
Sanjaya Kumar Singh के फेसबुक वाल से। “इस देश में एक पार्टी की तारीफ करते हुए आप लिखते रहें कोई दलाल नहीं कहेगा। इस पार्टी के समर्थकों ने अपनी पार्टी की आलोचना करने वालों को दलाल
Sanjaya Kumar Singh के फेसबुक वाल से। “इस देश में एक पार्टी की तारीफ करते हुए आप लिखते रहें कोई दलाल नहीं कहेगा। इस पार्टी के समर्थकों ने अपनी पार्टी की आलोचना करने वालों को दलाल बताने का ठेका ले रखा है। कई पत्रकार, स्तंभकार बेशर्मी से इस पार्टी की चाटुकारिता कर रहे हैं। कभी मैंने उनकी मरम्मत होते नहीं देखा। कोई उन्हें लेकर पत्रकारिता का संकट नहीं ...

रवीश कुमार सही में दलाल है ...

रवीश कुमार सही में दलाल है ...
रवीश कुमार। सभी मुद्दे वे मुद्दे हैं जिन पर रवीश कुमार को बोलना चाहिए या प्राइम टाइम में चर्चा करनी चाहिए । सभी बोल भी लें लेकिन सभी मुद्दों पर सभी का बोलना तभी माना जाएगा जब
रवीश कुमार। सभी मुद्दे वे मुद्दे हैं जिन पर रवीश कुमार को बोलना चाहिए या प्राइम टाइम में चर्चा करनी चाहिए । सभी बोल भी लें लेकिन सभी मुद्दों पर सभी का बोलना तभी माना जाएगा जब रवीश कुमार बोलेंगे या प्राइम टाइम में चर्चा करेंगे । जैसे जब प्राइम टाइम और फेसबुक नहीं था उस टाइम के भी सभी मुद्दों का हिसाब कुछ लोग रवीश कुमार से लेते हैं । तब तो आप नहीं ...

मीडिया, पुलिस और जनमत ...

मीडिया, पुलिस और जनमत ...
नीलांजन मुखोपाध्याय। हम भारतीय संपन्न लोगों से संबंधित हत्या के मामले की रिपोर्टिंग करने और उसे पढ़ने में काफी दिलचस्पी लेते हैं। ऐसे मामलों में मीडिया हमेशा जांच पूरी होने से पहले
नीलांजन मुखोपाध्याय। हम भारतीय संपन्न लोगों से संबंधित हत्या के मामले की रिपोर्टिंग करने और उसे पढ़ने में काफी दिलचस्पी लेते हैं। ऐसे मामलों में मीडिया हमेशा जांच पूरी होने से पहले ही अपना फैसला सुना देता है। पहली बार वर्ष 1959 में मीडिया ने नानावटी हत्या मामले में निर्णायक काम किया था, जब ज्यूरी ने मीडिया से बेहद प्रभावित होते हुए जोशीले नौसेना अध ...

आपातकाल और मीडिया ...

आपातकाल और मीडिया ...
Mukesh Kumar। हर साल की तरह इमर्जेंसी को याद करने की रस्म अदायगी इस साल भी संपन्न की गई। इस बार भी ये कर्मकांड करते हुए वही चूक हुई जो हर बार होती है। आपातकाल को याद
Mukesh Kumar। हर साल की तरह इमर्जेंसी को याद करने की रस्म अदायगी इस साल भी संपन्न की गई। इस बार भी ये कर्मकांड करते हुए वही चूक हुई जो हर बार होती है। आपातकाल को याद करते समय़ केवल मीडिया पर लगे प्रतिबंधों को याद किया गया। इमर्जेंसी के दौरान हुई दूसरी ज़्यादतियों का उल्लेख नहीं हुआ और अगर हुआ भी तो बहुत कम। ऐसा शायद इसलिए होता है कि मीडिया को अपने ...

सांगठनिक अपराध में तब्दील हो गया सत्ता-मीडिया गठजोड़ ...

 सांगठनिक अपराध में तब्दील हो गया सत्ता-मीडिया गठजोड़ ...
Punya Prasun Bajpai के ब्लाग से। आजादी के अडसठ बरस बाद यह सोचना कि मीडिया कितना स्वतंत्र है। यह अपने आप में कम त्रासद नहीं है। खासकर तब जबकि सत्ता और मीडिया
Punya Prasun Bajpai के ब्लाग से। आजादी के अडसठ बरस बाद यह सोचना कि मीडिया कितना स्वतंत्र है। यह अपने आप में कम त्रासद नहीं है। खासकर तब जबकि सत्ता और मीडिया की साठगांठ खुले तौर पर या तो खुशहाल जिन्दगी जीने और परोसने का नाटक कर रही हो या फिर कभी विकास के नाम पर तो कभी राष्ट्रवाद के नाम पर मीडिया को धंधे में बदलने की बिसात को ही चौथा स्तंम्भ करार देन ...

शर्मनाक हार और बेगैरत मीडिया ...

शर्मनाक हार और बेगैरत मीडिया ...
Sushil Upadhyay। भारत-श्रीलंका मैच के तीसरे दिन ही हिंदी चैनलों ने भारतीय टीम को जिता दिया था, जयकारे और वाह-वाह सुनाई देने लगी थी। मेरे जैसे तमाम दर्शक परेशान थे कि
Sushil Upadhyay। भारत-श्रीलंका मैच के तीसरे दिन ही हिंदी चैनलों ने भारतीय टीम को जिता दिया था, जयकारे और वाह-वाह सुनाई देने लगी थी। मेरे जैसे तमाम दर्शक परेशान थे कि खेल में कुछ भी हो सकता है, लेकिन चैनल तय मान बैठे हैं कि जीत भारत की ही होगी। तमाम नामी, धुरंधर और दिग्गज मीडियाकार ऐलान कर रहे थे कि भारत की आजादी के दिन क्रिकेट टीम तोहफा देगी। लेक ...

हर शाख पे उल्लू बैठा है ...

हर शाख पे उल्लू बैठा है ...
पत्रकारिता के अव्वल, दोयम और फर्जी संस्थानों से हर साल सपनीली आंखों वाले लड़के-लड़कियों के झुंड बाहर निकल रहे हैं. इनमें से बहुतेरे किसी दोस्त, परिचित के हवाले से मुझसे मिलते हैं.
पत्रकारिता के अव्वल, दोयम और फर्जी संस्थानों से हर साल सपनीली आंखों वाले लड़के-लड़कियों के झुंड बाहर निकल रहे हैं. इनमें से बहुतेरे किसी दोस्त, परिचित के हवाले से मुझसे मिलते हैं. कॅरिअर के बारे में सलाह मांगने के बीच में अचानक उतावले होकर बोल पड़ते हैं, सर! कोई नौकरी हो तो बताइए, मैं अपनी जान लगा दूंगा या दूंगी. तब किसी आदिम प्रवृत्ति के तहत मेर ...

@जिंदा रहने का सबूत देना पड़ता है ...

 @जिंदा रहने का सबूत देना पड़ता है ...
Santosh Kumar के फेसबुक वाल से। 8 अगस्त को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में दो दिवसीय नेशनल कंसल्टेसन ऑन मीडिया फ्रीडम एंड लॉ के पहले दिन के गहमागहमी के बाद यह बात सामने
Santosh Kumar के फेसबुक वाल से। 8 अगस्त को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में दो दिवसीय नेशनल कंसल्टेसन ऑन मीडिया फ्रीडम एंड लॉ के पहले दिन के गहमागहमी के बाद यह बात सामने निकल कर आई कि "इस लोकतंत्र" में जिंदा रहने का सबूत देना पड़ेगा, नहीं तो उसे मरा हुआ ही मान लिया जाएगा। विमर्श का मुद्दा था मीडिया और मीडियाकर्मीयों पर लगातार हो रहे हमले, उसकी कानूनी वै ...

आत्म नियमन फेल नियमन की जरूरत ...

 आत्म नियमन फेल नियमन की जरूरत ...
आज मीडिया अराजकता और दायित्वहीनता से गुजर रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह स्वार्थ सिद्धि है, उद्देश्य बदल चुके हैं, जनसरोकारों से रिश्ता टूट चुका है. इसलिए जरूरी है कि आत्मनियमन के भ्रमजाल से निकल कर नियमन की दिशा में कदम उठाए जाएं
आज मीडिया अराजकता और दायित्वहीनता से गुजर रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह स्वार्थ सिद्धि है, उद्देश्य बदल चुके हैं, जनसरोकारों से रिश्ता टूट चुका है. इसलिए जरूरी है कि आत्मनियमन के भ्रमजाल से निकल कर नियमन की दिशा में कदम उठाए जाएं मुकेश कुमार। अब ये लगभग सिद्ध हो गया है कि मीडिया उद्योग द्वारा आत्म नियमन के जरिए खुद को दुरूस्त करने के तमाम दावे ...

धर्म को धोखा देते ये कथित संत ...

धर्म को धोखा देते ये कथित संत  ...
आसाराम प्रकरण के बाद ऐसा लगने लगा था कि देश में बाबाओं के मायाजाल से आम आदमी दूर हो जाएगा किन्तु हाल ही में उजागर हुए दो मामलों से मैं गलत साबित
आसाराम प्रकरण के बाद ऐसा लगने लगा था कि देश में बाबाओं के मायाजाल से आम आदमी दूर हो जाएगा किन्तु हाल ही में उजागर हुए दो मामलों से मैं गलत साबित हुआ हूं। ओडिशा में खुद को भगवान विष्णु का अवतार बताने वाले सारथि बाबा हों या देवी दुर्गा का अवतार कहलाने वाली सुखविंदर कौर उर्फ़ बब्बू उर्फ़ राधे मां; धर्म का ऐसा मखौल इस देश में बन गया है मानो ईश्वर इ ...

स्वतंत्र भारत में खबरों की आजादी...!! ...

स्वतंत्र भारत में खबरों की आजादी...!! ...
आजादी के बाद से खबरचियों यानी मीडिया के क्षेत्र में भी आमूलचूल परिवर्तन आया है। पहले मीडिया से जुड़े लोग फिल्म निदेशकों की तरह हमेशा पर्दे के पीछे ही
तारकेश कुमार ओझा आजादी के बाद से खबरचियों यानी मीडिया के क्षेत्र में भी आमूलचूल परिवर्तन आया है। पहले मीडिया से जुड़े लोग फिल्म निदेशकों की तरह हमेशा पर्दे के पीछे ही बने रहते थे। लेकिन समय के साथ इतना बदलाव आया है कि अब इस क्षेत्र के दिग्गज बिल्कुल किसी सेलीब्रिटी की तरह परिदृश्य के साथ पर्दे पर भी छाये रहते हैं।अपने ही चैनल पर अपना इंटरव् ...

खो रही है चमकः कुछ करिए सरकार ...

खो रही है चमकः कुछ करिए सरकार ...
-संजय द्विवेदी। नरेंद्र मोदी के चाहने वाले भी अगर उनकी सरकार से निराशा जताने लगे हों तो यह उनके संभलने और विचार करने का समय है। कोई भी सरकार अपनी छवि और इकबाल
-संजय द्विवेदी। नरेंद्र मोदी के चाहने वाले भी अगर उनकी सरकार से निराशा जताने लगे हों तो यह उनके संभलने और विचार करने का समय है। कोई भी सरकार अपनी छवि और इकबाल से ही चलती है। चाहे जिस भी कारण से अगर आपके चाहने वालों में भी निराशा आ रही है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। नरेंद्र मोदी की सरकार पहले दिन से ही अपने विरोधियों के निशाने पर है। दिल ...

टिटिहरी पत्रकार, बरसाती चैनल ...

टिटिहरी पत्रकार, बरसाती चैनल ...
अभिषेक श्रीवास्तव। फरवरी-2015 की गुनगुनी धूप और निजी कंपनियों के दफ्तरों से बजबजाता नोएडा का सेक्टर-63… दिन के बारह बज रहे हैं और एक बेरोजगार पत्रकार तिपहिया
अभिषेक श्रीवास्तव। फरवरी-2015 की गुनगुनी धूप और निजी कंपनियों के दफ्तरों से बजबजाता नोएडा का सेक्टर-63… दिन के बारह बज रहे हैं और एक बेरोजगार पत्रकार तिपहिया ऑटो से एक पता खोज रहा है. उसने सुना है कि यहां कोई नया समाचार चैनल खुलने वाला है. किसी माध्यम से उसे यहां मालिक से मिलने के लिए भेजा गया है. कांच के इस जंगल में करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद ...

वर्तमान की भौतिकवादी मीडिया ...

वर्तमान की भौतिकवादी मीडिया ...
-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी। मीडिया जगत से जुड़े लोग कुछ उस तरह के हो गए हैं जैसे पुराने समय में एक राज्य का महामंत्री। शायद इस कहानी को अधिकाँश लोग नहीं सुने होंगे। उस कहानी
-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी। मीडिया जगत से जुड़े लोग कुछ उस तरह के हो गए हैं जैसे पुराने समय में एक राज्य का महामंत्री। शायद इस कहानी को अधिकाँश लोग नहीं सुने होंगे। उस कहानी का सार यहाँ प्रस्तुत करना आवश्यक हो गया है। कहानी के अनुसार उक्त राज्य में अकाल पड़ गया था प्रजा में त्राहि-त्राहि मची थी। यह बात राजा के कानो तक नहीं पहुँची थी। राजा जब भीं ...

जन्मदिन 8 अगस्त पर विशेष लेखः राजेन्द्र माथुर की गैरहाजिरी के 25 साल ...

जन्मदिन 8 अगस्त पर विशेष लेखः राजेन्द्र माथुर की गैरहाजिरी के 25 साल ...
-मनोज कुमार, वरिष्ठ पत्रकार। किसी व्यक्ति के नहीं रहने पर आमतौर पर महसूस किया जाता है कि वो होते तो यह होता, वो होते तो यह नहीं होता और यही खालीपन राजेन्द्र माथुर के जा
-मनोज कुमार, वरिष्ठ पत्रकार। किसी व्यक्ति के नहीं रहने पर आमतौर पर महसूस किया जाता है कि वो होते तो यह होता, वो होते तो यह नहीं होता और यही खालीपन राजेन्द्र माथुर के जाने के बाद लग रहा है। यूं तो 8 अगस्त को राजेन्द्र माथुर का जन्मदिवस है किन्तु उनके नहीं रहने के पच्चीस बरस की रिक्तता आज भी हिन्दी पत्रकारिता में शिद्दत से महसूस की जाती है। राजेन्द ...

मीडिया में नियमित और सुकून की नौकरी ...

मीडिया में नियमित और सुकून की नौकरी  ...
Sanjaya Kumar Singh! मीडिया में ऐसा नहीं है कि अगर आपने एक स्तरीय मीडिया संस्थान में नौकरी शुरू की, अच्छा काम करते हैं, योग्य हैं तो उसी में रहेंगे,
Sanjaya Kumar Singh! मीडिया में ऐसा नहीं है कि अगर आपने एक स्तरीय मीडिया संस्थान में नौकरी शुरू की, अच्छा काम करते हैं, योग्य हैं तो उसी में रहेंगे, समय के साथ आपको तरक्की मिलती रहेगी और आप संतुष्ट या असंतुष्ट रहकर भी उसी में नौकरी करते हुए रिटायर हो जाएं। अमूमन ऐसा देखने मे नहीं आता है – कुछेक अपवाद जरूर होंगे। 20-25 वर्षों से कॉरपोरेट संस्थानों ...

ये जो मीडिया, जनतंत्र के लिए खतरनाक है: ...

ये जो मीडिया, जनतंत्र के लिए खतरनाक है: ...
Vineet Kumar के फेसबुक वाल से। क्या नेटवर्क 18, दैनिक भास्कर समूह, जी नेटवर्क, टाइम्स ग्रुप या ऐसे तमाम मीडिया समूह जनतंत्र की मूल आत्मा और उसके ढांचे के लिए खतरनाक हैं
Vineet Kumar के फेसबुक वाल से। क्या नेटवर्क 18, दैनिक भास्कर समूह, जी नेटवर्क, टाइम्स ग्रुप या ऐसे तमाम मीडिया समूह जनतंत्र की मूल आत्मा और उसके ढांचे के लिए खतरनाक हैं जो एक ही साथ दर्जनभर से ज्यादा ब्रांड को चमकाने और उनसे अपने मीडिया बिजनेस का प्रसार करने में लगे हैं ? देश के इन प्रमुख मीडिया घरानों के संबंध में अगर ये बात सवाल की शक्ल में न करक ...

देश को क्यों बांट रहा है मीडिया, कलाम हों रोलमाडल या मेमन सोचना होगा ...

देश को क्यों बांट रहा है मीडिया,  कलाम हों रोलमाडल या मेमन सोचना होगा ...
-संजय द्विवेदी। काफी समय हुआ पटना में एक आयोजन में माओवाद पर बोलने का प्रसंग था। मैंने अपना वक्तव्य पूरा किया तो प्रश्नों का समय आया। राज्य के बहुत वरिष्ठ नेता, उस समय
-संजय द्विवेदी। काफी समय हुआ पटना में एक आयोजन में माओवाद पर बोलने का प्रसंग था। मैंने अपना वक्तव्य पूरा किया तो प्रश्नों का समय आया। राज्य के बहुत वरिष्ठ नेता, उस समय विधान परिषद के सभापति रहे स्व.श्री ताराकांत झा भी उस सभा में थे, उन्होंने मुझे जैसे बहुत कम आयु और अनुभव में छोटे व्यक्ति से पूछा “आखिर देश का कौन सा प्रश्न या मुद्दा है जिस पर सभ ...

याकूब मेमन के फांसी पर सियासत ...

याकूब मेमन के फांसी पर सियासत ...
याकूब मेमन को भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी दी है और यहां तक की राष्ट्रपति द्वारा भी मेनन के याचिका को ठुकराया जा चुका था। ऐसे में अगर मेनन को फांसी की सजा होती है
याकूब मेमन को भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने फांसी दी है और यहां तक की राष्ट्रपति द्वारा भी मेनन के याचिका को ठुकराया जा चुका था। ऐसे में अगर मेनन को फांसी की सजा होती है तो इसमें उस व्यक्ति को बोलने का कतई अधिकार नहीं जो कानून और साक्ष्य के प्रति अपरिचित हो। उच्च न्यायालय से लेकर सर्वाेच्च न्यायालय के जज जिन्होंने फांसी की सजा सुनाई उनके समक्ष समस्त ...

एक आततायी भीड़ का शोकगान ...

एक आततायी भीड़ का शोकगान ...
Abhishek Srivastava के फेसबुक वाल से। टीवी चैनलों में लिंक न्‍यूज़ का प्रयोग Punya Prasun Bajpai ने किया था। उनकी आदत है कि हर ख़बर को दूसरी ख़बर के साथ जोड़कर बुलेटिन बनाते हैं
Abhishek Srivastava के फेसबुक वाल से। टीवी चैनलों में लिंक न्‍यूज़ का प्रयोग Punya Prasun Bajpai ने किया था। उनकी आदत है कि हर ख़बर को दूसरी ख़बर के साथ जोड़कर बुलेटिन बनाते हैं ताकि एक परिप्रेक्ष्‍य निर्मित हो सके। इसीलिए आज सुबह जब वे रामेश्‍वरम और मुंबई को अलग-अलग दिखा रहे थे, तब मैंने उन्‍हें एक एसएमएस किया कि क्‍यों न दो विंडो में रामेश्‍वरम ...

चैनलों पर बकबकियों की बहस...!! ...

चैनलों पर बकबकियों की बहस...!! ...
फिल्म गदर करीब डेढ़ दशक पहले आई थी। लेकिन यह शायद इस फिल्म की लोकप्रियता का ही परिणाम है कि अक्सर किसी न किसी चैनल यह प्रदर्शित होती
तारकेश कुमार ओझा फिल्म गदर करीब डेढ़ दशक पहले आई थी। लेकिन यह शायद इस फिल्म की लोकप्रियता का ही परिणाम है कि अक्सर किसी न किसी चैनल यह प्रदर्शित होती ही रहती है। यूं तो फिल्म में कई रोचक व दिल को छू जाने वाले प्रसंग है। लेकिन इस फिल्म का एक सीन वर्तमान राजनीति पर भी सटीक बैठता है। जिसमें पाकिस्तानी राजनेता बने अमरीश पुरी अपनी बेटी के साथ हुई ...

‘पेड न्यूज’ पर जवाबदेही तय हो ...

‘पेड न्यूज’ पर जवाबदेही तय हो ...
Sushil Upadhyay । सपाट शब्दों में कहें तो पेड न्यूज पाठकों के भरोसे के प्रति छल और कपटपूर्ण बर्ताव है। जिन लोगों ने भारतीय पत्रकारिता के आकार-ग्रहण करने में मदद की और उसे वर्तमान
Sushil Upadhyay । सपाट शब्दों में कहें तो पेड न्यूज पाठकों के भरोसे के प्रति छल और कपटपूर्ण बर्ताव है। जिन लोगों ने भारतीय पत्रकारिता के आकार-ग्रहण करने में मदद की और उसे वर्तमान स्तर तक पहुंचाया, पेड न्यूज उनके प्रति भी धोखा है। जैसा कि हम में से ज्यादातर लोग जानते हैं कि आजादी की लड़ाई के दौरान भाषायी पत्रकारिता ने काफी बड़ी चुनौतियों का सामना ...

भाषा की भी है एक राजनीति ...

भाषा की भी  है एक राजनीति ...
अब जबकि भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन सितंबर महीने में होने जा रहा तो एक बार यह विचार जरूर होना चाहिए कि आखिर हिंदी के विकास की समस्याएं क्या
संजय द्विवेदी! अब जबकि भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन सितंबर महीने में होने जा रहा तो एक बार यह विचार जरूर होना चाहिए कि आखिर हिंदी के विकास की समस्याएं क्या हैं? वे कौन से लोग और तत्व हैं जो हिंदी की विकास बाधा हैं? सही मायनों में हिंदी के मान-अपमान का संकट राजनीतिक ज्यादा है। हम पिछले सात दशकों में न तो हिंदी समाज बना सके न ही अपनी भाषा, माटी और ...

न्यूज, पेड न्यूज और फेड न्यूज! ...

न्यूज, पेड न्यूज और फेड न्यूज! ...
Sushil Upadhyay । भले ही साल दर साल वेब-न्यूज का प्रयोग बढ़ रहा हो, लेकिन यह भी सच्चाई है कि अखबारों की प्रसार-संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कुछ साल पहले निजी
Sushil Upadhyay । भले ही साल दर साल वेब-न्यूज का प्रयोग बढ़ रहा हो, लेकिन यह भी सच्चाई है कि अखबारों की प्रसार-संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कुछ साल पहले निजी चैनलों की आमद के बाद आशंका जताई गई थी कि आने वाले बरसों में अखबारों का अंत हो जाएगा। इसी प्रकार की आशंका उस वक्त जताई गई, जब इंटनरेट पर खबरों का दौर आरंभ हुआ। लेकिन, यथार्थ यह है ...

लोहिया के सपनों को तोड़ता मुलायम का नव-समाजवाद ...

लोहिया के सपनों को तोड़ता मुलायम का नव-समाजवाद ...
अजीब व्यवस्था है जिसमें कोई गायत्री प्रजापति या कोई राममूर्ति वर्मा अवैध खनन के आरोप के बावजूद हमारा रहनुमा बना रहता है पर इनके गैर-कानूनी हरकतों के खिलाफ आवाज
एनके सिंहः अजीब व्यवस्था है जिसमें कोई गायत्री प्रजापति या कोई राममूर्ति वर्मा अवैध खनन के आरोप के बावजूद हमारा रहनुमा बना रहता है पर इनके गैर-कानूनी हरकतों के खिलाफ आवाज उठाने वाला आई आई टी से पढ़ा भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी अमिताभ ठाकुर बलात्कार का आरोप झेलता इस बात पर निलंबित हो जाता है कि राज्य छोड़ने के लिए राज्य के पुलिस प्रमुख से इजाजत नह ...

सूरज तराश कौशल आ जाए अगर हमको--- ...

सूरज तराश कौशल आ जाए अगर हमको--- ...
Shrikant Singh के फेसबुक वाल से। हमारे एक वरिष्‍ठ सहयोगी कहा करते थे-बनारस में हम लोगों से कई गुना अधिक काबिल लोग बहुत कम सैलरी में खुश रहते हैं, क्‍योंकि उनका वहां
Shrikant Singh के फेसबुक वाल से। हमारे एक वरिष्‍ठ सहयोगी कहा करते थे-बनारस में हम लोगों से कई गुना अधिक काबिल लोग बहुत कम सैलरी में खुश रहते हैं, क्‍योंकि उनका वहां पत्रकारिता का शौक पूरा हो रहा है। उनकी दिनचर्या का एक अंग यह भी होता था कि खबर छापी और अगले दिन फोन पर लग गए अपने किसी साथी के साथ। देखा न क्‍या रिपोर्ट छापी है। हिला कर रख दिया है। इला ...

प्रभात खबर, धनबाद संस्करण का 16वें वर्ष में प्रवेश ...

प्रभात खबर, धनबाद संस्करण का 16वें वर्ष में प्रवेश  ...
साहिर लुधियानवी की यह पंक्ति क्यों? क्योंकि अलग झारखंड राज्य गठन के डेढ़ दशक और धनबाद नगर निगम को अस्तित्व में आये पांच वर्ष से अधिक समय गुजर चुके हैं. नये राज्य
‘नया सफर है, पुराने चिराग गुल कर दो.’’ साहिर लुधियानवी साहिर लुधियानवी की यह पंक्ति क्यों? क्योंकि अलग झारखंड राज्य गठन के डेढ़ दशक और धनबाद नगर निगम को अस्तित्व में आये पांच वर्ष से अधिक समय गुजर चुके हैं. नये राज्य से लेकर नगर निगम तक से जो उम्मीदें थीं, वह पूरी नहीं हो पायी. ऐसे में ‘निराश’ हो जाना मानवीय स्वभाव है. तो फिर साहिर लुधियानवी क ...

प्रामाणिकता की कसौटी पर खरी है यह बेबाक बयानी ...

प्रामाणिकता की कसौटी पर खरी है यह बेबाक बयानी ...
किसी भी लेखन, विशेषत: संस्मरणात्मक और विश्लेषणात्मक लेखन की श्रेष्ठता की पहली और अनिवार्य शर्त होती है, उसमें वर्णित तथ्यों की विश्वसनीयता। इस कसौटी पर डॉ. सुशील उपाध्याय की पुस्तक सौ फीसद कामयाब है। हालांकि वह मेरे बेहद विश्वसनीय और काबिल सहयोगी रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस पुस्तक के जरिये तथ्यात्मक ईमानदारी
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। मेरे संपादक रहे आदरणीय एल.एन.शीतल जी ने मेरी प्रकाशानाधीन किताब के लिए ये भूमिका लिखी है। अपने इस काम पर मैं इससे बेहतर और मार्गदर्शक-टिप्पणी की उम्मीद नहीं कर सकता था। शीतल जी ने जो आशीर्वाद दिया है, उनके लिए ‘धन्यवाद’ कह देना बहुत छोटा शब्द है। उनका मागर्दशन हमेशा मिलता रहे, यही कामना है। प्रामाणिकता की कसौटी ...

पत्रकारीय-आजादी का सवाल-1 ...

पत्रकारीय-आजादी का सवाल-1 ...
Sushil Upadhyay ! किसी भी पत्रकार के लिए सबसे बड़ी पूंजी यह होती है कि लोग उस पर भरोसा करें। इसके साथ जुड़ी दूसरी बात यह है कि पत्रकार जिस संस्थान में
Sushil Upadhyay ! किसी भी पत्रकार के लिए सबसे बड़ी पूंजी यह होती है कि लोग उस पर भरोसा करें। इसके साथ जुड़ी दूसरी बात यह है कि पत्रकार जिस संस्थान में कार्यरत है, वह संस्थान उस पर भरोसा करे। पत्रकारिता में भरोसे की जितनी अधिक महत्ता है, यह उतनी आसानी से हासिल नहीं होता है। पत्रकार हर वक्त सवालियाा निशान के दायरे में रहता है। पत्रकार को एक साथ क ...

ग्रीक ट्रेजडी के भारतीय मिथक ...

ग्रीक ट्रेजडी के भारतीय मिथक ...
ग्रीस की पवित्र वातोपेदी मॉनेस्ट्री के महंत इफ्राहीम व देश के शिपिंग मंत्री की पत्नी सहित 14 लोगों को पिछले साल नवंबर में जब ग्रीक सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी का दोषी करार दिया,
anshuman tiwari। ग्रीस की ट्रेजडी को घटिया गवर्नेंस व सियासत ने गढ़ा है. ग्रीस के ताजा संकट के कई मिथक भारत से मिलते हैं ग्रीस की पवित्र वातोपेदी मॉनेस्ट्री के महंत इफ्राहीम व देश के शिपिंग मंत्री की पत्नी सहित 14 लोगों को पिछले साल नवंबर में जब ग्रीक सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी का दोषी करार दिया, तब तक यह तय हो चुका था कि ग्रीस (यूनान) आइएमएफ के ...

तटस्थता, निरपेक्षता और पत्रकारिता के मूल्य-3 ...

तटस्थता, निरपेक्षता और पत्रकारिता के मूल्य-3 ...
Sushil Upadhyay । जैसा कि पहले गया है कि पत्रकारिता के मानक और मूल्य अक्सर गतिशील तत्व होते हैं। सत्य भी इस परिभाषा से बाहर नहीं है। सत्य को सही अर्थाें और सही संदर्भाें में
Sushil Upadhyay । जैसा कि पहले गया है कि पत्रकारिता के मानक और मूल्य अक्सर गतिशील तत्व होते हैं। सत्य भी इस परिभाषा से बाहर नहीं है। सत्य को सही अर्थाें और सही संदर्भाें में स्थापित किया जाना जरूरी है। ऐसा न होने पर कई बार असत्य ऐसा आभास देने लगता है कि वह सत्य है और उससे परे कुछ भी नहीं है। कोई भी पत्रकार सच को प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी किसी औ ...

पत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’ ...

पत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’ ...
अगस्त 2014 में मध्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांपुर में एक रहस्यमय पोस्टर पर सबकी निगाह पड़ी थी। गहरे बैंगनी पृष्ठभूमि के इस ‘वांछित’ पोस्टर में कथित के बारे में गंभीर
ईएनएस की रिपोर्ट। अगस्त 2014 में मध्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांपुर में एक रहस्यमय पोस्टर पर सबकी निगाह पड़ी थी। गहरे बैंगनी पृष्ठभूमि के इस ‘वांछित’ पोस्टर में कथित के बारे में गंभीर आरोप थे। पोस्टर में उसे उगाही, ब्लैकमेल करने वाला अपराधी तत्व बताया गया था। इसमें कहा गया था कि उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। पोस्टर में कहा गया कि लोग इस शातिर शख्स ...

नेट न्यूट्रीलिटी’ का अनसुलझा सवाल ...

नेट न्यूट्रीलिटी’ का अनसुलझा सवाल ...
-मनोज कुमार। संचार माध्यमों के विस्तार के साथ ही इंटरनेट ने एक ऐसी दुनिया क्रियेट की जिसके चलते विश्व-ग्राम की अवधारणा की स्थापना हुई। बहुसंख्या में आज भी लोग इंटरनेट फ्रेंडली भले ही न हुए हों लेकिन ज्यादतर काम इंटरनेट के माध्यम से होने लगा है। बाजार ने जब देखा कि इंटरनेट के बिना अब समाज का काम नहीं चलना है तो उसने
-मनोज कुमार। संचार माध्यमों के विस्तार के साथ ही इंटरनेट ने एक ऐसी दुनिया क्रियेट की जिसके चलते विश्व-ग्राम की अवधारणा की स्थापना हुई। बहुसंख्या में आज भी लोग इंटरनेट फ्रेंडली भले ही न हुए हों लेकिन ज्यादतर काम इंटरनेट के माध्यम से होने लगा है। बाजार ने जब देखा कि इंटरनेट के बिना अब समाज का काम नहीं चलना है तो उसने अपने पंजे फैलाना आरंभ कर दिया ...

बातें मीडिया की-17 इंटर्नशिप को बनाएं सीढ़ी ...

बातें मीडिया की-17 इंटर्नशिप को बनाएं सीढ़ी ...
जो युवा पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर इस बात से दो-चार होते हैं कि आखिर इस पेशे में एंट्री कहां से पाई जाए। वैसे, निजी संस्थान तो यही सपना दिखाते हैं कि उनके यहां
Sushil Upadhyay । जो युवा पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर इस बात से दो-चार होते हैं कि आखिर इस पेशे में एंट्री कहां से पाई जाए। वैसे, निजी संस्थान तो यही सपना दिखाते हैं कि उनके यहां मीडिया स्टूडैंट्स के लिए कैंपस सेलेक्शन होता है, लेकिन ये बात आंशिक तौर पर ही सच है। अपवाद छोड़ दे ंतो शायद ही कोई कंपनी किसी मीडिया संस्थान में जा ...

26 जून पर विशेष - … तो अखिलेश यादव अपराधी हैं ...

26 जून पर विशेष - … तो अखिलेश यादव अपराधी हैं  ...
लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को दस हजार रुपए माहवार पेंशन और सम्‍मान देना अपराध है तो मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव अपराधी हैं और मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि वह ताउम्र यह अपराध करते रहें। मेरी इच्‍छा तो यह
Dhirendra Nath Srivastva के फेसबुक वाल से। - लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को दस हजार रुपए माहवार पेंशन और सम्‍मान देना अपराध है तो मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव अपराधी हैं और मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि वह ताउम्र यह अपराध करते रहें। मेरी इच्‍छा तो यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस अपराध में शामिल होकर इस पेंशन और सम्‍मान राष्‍ट्रीय स्‍वरूप दे ...

जनमत ही मीडिया का एकमात्र हथियार ...

जनमत ही मीडिया का एकमात्र हथियार ...
एनके सिंह! मानव और पशु में एक मूल अंतर है. ईश्वर ने मानव में भावना-जनित करुणा और बुद्धि-जनित नैतिकता दी है जो पशु में नहीं होती. नतीजा यह होता
एनके सिंह! मानव और पशु में एक मूल अंतर है. ईश्वर ने मानव में भावना-जनित करुणा और बुद्धि-जनित नैतिकता दी है जो पशु में नहीं होती. नतीजा यह होता है कि कोई करुणा के अतिरेक में चैतन्य महाप्रभु बनता है तो कोई गाँधी बन कर सत्य के प्रति आग्रह जीवन का साध्य मानता है. मानव में ये दोनों पक्ष जितना हीं कम होते जाते हैं वह उतना हीं पशुवत होता जाता है. और जब ...

बातें मीडिया की-15 आॅनलाइन मीडिया का ‘क्लास-कैरेक्टर’ ...

बातें मीडिया की-15 आॅनलाइन मीडिया का ‘क्लास-कैरेक्टर’ ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। आॅनलाइन मीडिया का एक विशिष्ट वर्गीय चरित्र है। यूं तो पूरा आधुनिक मीडिया ही वर्गीय चरित्र पर आधारित है, लेकिन इस पैमाने पर आॅनलाइन मीडिया
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। आॅनलाइन मीडिया का एक विशिष्ट वर्गीय चरित्र है। यूं तो पूरा आधुनिक मीडिया ही वर्गीय चरित्र पर आधारित है, लेकिन इस पैमाने पर आॅनलाइन मीडिया अधिक और व्यापक चिंता पैदा करता हैं। न्यूनतम बुनियादी ढांचे की उपलब्धता के बिना आॅनलाइन मीडिया के उपयोग के बारे में सोचा नहीं जा सकता। इस ढांचे को कितना भी कम करके देखें तो भी एक ...

पत्रकारों की शहादत, बेशर्म सियासत ...

पत्रकारों की शहादत, बेशर्म सियासत  ...
मुकुंद ! सारी दुनिया में पत्रकारों के सिर पर 24 घंटे मौत का साया मंडराता रहता है। कलम पर हमले जारी हैं। भारत के कई राज्यों में स्थिति बेहद संवेदनशील
मुकुंद ! सारी दुनिया में पत्रकारों के सिर पर 24 घंटे मौत का साया मंडराता रहता है। कलम पर हमले जारी हैं। भारत के कई राज्यों में स्थिति बेहद संवेदनशील है। खासकर उत्तर प्रदेश में पत्रकार बेखौफ होकर काम नहीं कर पा रहे हैं। सत्ता और कानून के पहरेदारों (पुलिस) की संगीने हर पल कलम का पीछा कर रही हैं। बात अस्सी के दशक से शुरू करते हैं। मैं ग्रुजुएशन करके ...

क्या राज्यमंत्री को बर्खास्त करेंगे अखिलेश ...

क्या राज्यमंत्री को बर्खास्त करेंगे अखिलेश  ...
जी हां, जांबाज शहीद पत्रकार जगेन्द्र मामले में आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा व घूसखोर इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय के खिलाफ रपट दर्ज हो जाने के बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो अखिलेश सरकार
जी हां, जांबाज शहीद पत्रकार जगेन्द्र मामले में आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा व घूसखोर इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय के खिलाफ रपट दर्ज हो जाने के बाद भी अगर कार्रवाई नहीं हो पा रही है तो अखिलेश सरकार पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है। क्या ऐसे ही मंत्रियो, बाहुबलियों, श्रीप्रकाश राय, संजयनाथ तिवारी जैसे लूटेरा व घुसखोर इंस्पेक्टर, भ्रष्ट आईएएस अमृत त्रि ...

किस्से अखबारों के-48 भाषा की ऐसी की तैसी! ...

किस्से अखबारों के-48 भाषा की ऐसी की तैसी! ...
Sushil Upadhyay। भाषा किसी भी अखबार की जान होती है और शैली उसका सौंदर्य। लेकिन, देहरादून से प्रकाशित होने वाले नामी, प्रतिष्ठित, पहुंचवाले और सरोकार वाले अखबारों को देखकर
Sushil Upadhyay। भाषा किसी भी अखबार की जान होती है और शैली उसका सौंदर्य। लेकिन, देहरादून से प्रकाशित होने वाले नामी, प्रतिष्ठित, पहुंचवाले और सरोकार वाले अखबारों को देखकर लगता है कि इनका सौंदर्य लुट गया और जान भी निकल गई है। एक कागजनुमा मृत देह सुबह-सवेरे लोगों के घरों तक पहुंचाई जाती है। जिन्हें बरसों पुरानी लत लगी हुई है वे घंटा-दो घंटा इस देह को ...

किस्से अखबारों के-47 पारुल की शिकायत और मीडिया में लड़कियां ...

किस्से अखबारों के-47 पारुल की शिकायत और मीडिया में लड़कियां ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पिछले दिनों एक पोस्ट में कुछ ऐसे दोस्तों का जिक्र किया था, जिन्होंने दस साल या उससे भी कम समय में ट्रेनी से संपादक तक का सफर पूरा किया है।
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पिछले दिनों एक पोस्ट में कुछ ऐसे दोस्तों का जिक्र किया था, जिन्होंने दस साल या उससे भी कम समय में ट्रेनी से संपादक तक का सफर पूरा किया है। संयोग ऐसा रहा है कि इस पोस्ट के सभी नाम पुरुष थे। इस पर मेरी पूर्व सहकर्मी और मेरे गुरु प्रो. कमलकांत बुधकर की पुत्रवधु पारुल बुधकर का संदेश मिला। उनकी आपत्ति है कि मैं केवल पुर ...

किस्से अखबारों के-46 सफलता का कोई नियम नहीं! ...

किस्से अखबारों के-46 सफलता का कोई नियम नहीं! ...
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में सफलता और विफलता, बहुत बड़ी हद तक संयोगों पर निर्भर करती है। जिसके जीवन में संयोग सध जाएं, उसे सफलता हासिल हो जाती है
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। अखबारी दुनिया में सफलता और विफलता, बहुत बड़ी हद तक संयोगों पर निर्भर करती है। जिसके जीवन में संयोग सध जाएं, उसे सफलता हासिल हो जाती है और जो अनुकूल संयोगों की श्रंखला से वंचित रह जाए, उसकी गिनती विफल लोगों में होने लगती है। मोटे तौर पर तो यही कहा जाता है कि मेधावी, योग्य, दक्ष, परिश्रमी और सुपात्र व्यक्ति कभी विफल ...

पत्रकारिता की साख पर बट्टा लगा रहे है दलाल पत्रकार ...

पत्रकारिता की साख पर बट्टा लगा रहे है दलाल पत्रकार  ...
सुरेश गांधी। बात उन दिनों की है जब समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियां चरम पर थी। ब्रतानियां हुकूमत की लाठियां हिन्दुस्तानियों पर कहर बनकर टूट रही थी। बहु-बेटियों की
पत्रकारिता दिवस पर विशेष हर कोई अखबार में काम तो करना चाहता है लेकिन उसके पीछे उस व्यक्ति के कई कारण होते हैं। यानी आज पत्रकारिता बुरे दौर से गुजरने पर मजबूर हैं। अरे अब तो वह दौर आ चुका है कि पैसे के लिए वे अपने ही किसी साथी की बलि बहुत ही संयत भाव से चढा सकते हैं। माना कि पत्रकारिता अब मिशन नहीं, यह एक प्रोफेशन और बिजनेस हो चला है। मगर क्या हर ...

अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर, पढ़िए कैसे ...

अरुणा शानबाग के कातिल तक पहुंचा ये मराठी रिपोर्टर,  पढ़िए कैसे  ...
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई। 42 साल तक कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग की पिछले पखवाड़े हुई मौत के बाद यह सवाल बार- बार उठ रहा था कि उसका कातिल सोहनलाल वाल्मिकी आखिर है
सुनील मेहरोत्रा, मुंबई। 42 साल तक कोमा में पड़ी अरुणा शानबाग की पिछले पखवाड़े हुई मौत के बाद यह सवाल बार- बार उठ रहा था कि उसका कातिल सोहनलाल वाल्मिकी आखिर है कहां ? क्या वह जिंदा भी है या नहीं ? खुद पुलिस को सोहनलाल के जिंदा होने पर शक था, पर जो काम पुलिस नहीं कर पाई, वह काम किया एक मराठी अखबार के प्रमुख संवाददाता ज्ञानेश चव्हाण ने खुद सोहनलाल क ...

किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक ...

किस्से अखबारों के-43: सफलता की प्रेरणा और विफलता के सबक ...
पत्रकारिता की कक्षा में छात्र-छात्राएं अक्सर सफलता के गुर पूछते हैं, वे जानना चाहते हैं कि कौन-से रास्ते से चलकर वे परचम लहरा सकते हैं। उनकी इस जिज्ञासा का जवाब देना बेहद
Sushil Upadhyay के फेसबुक वाल से। पत्रकारिता की कक्षा में छात्र-छात्राएं अक्सर सफलता के गुर पूछते हैं, वे जानना चाहते हैं कि कौन-से रास्ते से चलकर वे परचम लहरा सकते हैं। उनकी इस जिज्ञासा का जवाब देना बेहद कठिन है। मैं, अक्सर उनके सामने कुछ उदाहरण रखता हूं। ये उदाहरण इतिहास के किन्हीं महान पत्रकारों के नहीं हैं, वरन मेरे समकालीन उन लोगों के हैं ...

मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ...

मीडिया की मंडी में हम-19: हां.. मैंने ट्रीटमेंटिस्टिक जर्नलिज्म किया है ...
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। वो सच में परिवर्तन के दिन थे...मेरे निजी जीवन के परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों ने भी दस्तक देना शुरु कर दिया था।अब यह बात
Dhiraj Kulshreshtha के फेसबुक वाल से। वो सच में परिवर्तन के दिन थे...मेरे निजी जीवन के परिवर्तनों के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तनों ने भी दस्तक देना शुरु कर दिया था।अब यह बात और है कि मेरी ही तरह बाकी लोग भी इन परिवर्तनों को नजर अंदाज कर रहे थे या इनकी गंभीरता को हल्के से ले रहे थे।यही वह समय था जब नरसिम्हा राव के नेतृत्व में मनमोहन सिंह देश की आर्थि ...

हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आत ...

हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आत ...
Nadim S. Akhter के फेसबुक वाल से। बुरा मत मानिएगा लेकिन भारत में हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है. लगता है कि -पत्रकार- का पत्र कहीं
Nadim S. Akhter के फेसबुक वाल से। बुरा मत मानिएगा लेकिन भारत में हिन्दी न्यूज चैनलों की दुर्गति देखकर शर्म या हंसी नहीं आती, अब गुस्सा आता है. लगता है कि -पत्रकार- का पत्र कहीं दूर छूट गया है, सिर्फ -कार- ही बची है. कोई चैनल बेशर्मी से भारत में गर्मी के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरता है (कम पढ़े-लिखे लोगों के मन में पाकिस्तान के खिलाफ भावनाएं भ ...

किस्से अखबारों के-44 मीडिया अध्ययन के लिए ‘केस-स्टडी’ है राज ठाकरे ...

किस्से अखबारों के-44 मीडिया अध्ययन के लिए ‘केस-स्टडी’ है राज ठाकरे ...
Sushil Upadhyay। दिल्ली के पत्रकारों की दुनिया एकदम अलग है। छोटी जगहों पर पत्रकारिता करते हुए लगता है कि दिल्ली में बैठे तमाम पत्रकार महामानव हैं, उनमें नारद, हनुमान,
Sushil Upadhyay। दिल्ली के पत्रकारों की दुनिया एकदम अलग है। छोटी जगहों पर पत्रकारिता करते हुए लगता है कि दिल्ली में बैठे तमाम पत्रकार महामानव हैं, उनमें नारद, हनुमान, व्यास और महाभारत के संजय, सभी की खूबी समाई हुई है। लेकिन, जब आप उनके साथ काम करते हैं या पत्रकारिता से संबंधित कोई मदद मांगते हैं तो वे एकदम भिन्न किस्म के जीव नजर आते हैं। इन जीवों क ...
Latest News टीआई ने पत्रकार को उठाया, की मारपीट गाजियाबाद में महिला पत्रकार से लूट हिन्दुस्तान में साइन कराने का सिलसिला शुरू पत्रकार अक्षय सिंह की विसरा रिपोर्ट तैयार, सीबीआईI के पास जाएगी तुर्की में 2 ब्रिटिश पत्रकार पुलिस हिरासत में दैनिक भास्कर मुरैना के सिटी हेड रवि भटनागर के पिता का निधन करोड़ की डील को लेकर विवादों में सिद्धू, चैनल ने मांगा हर्जाना जागरण के प्रधान संपादक और CEO संजय गुप्ता ने प्रधानमंत्री को सौंपा ड्राफ्ट पीपली लाइव के निर्देशक के खिलाफ आरोप तय राजस्थान पत्रिका के साथ जुड़े पुनीत पराशर पत्रकारों का बैर व्यक्ति से नहीं प्रतिबंधित चैनलों का प्रसारण नहीं ओमजी ने पुरस्‍कार कल्‍याण सिंह के हाथों नहीं बल्कि राज्‍यपाल के हाथों से लिया चंपू संपादक नहीं हैं शशि शेखर ..... मजीठिया रिपोर्ट पर श्रम मंत्री नाराज , कई पर गिरेगी गाज Majithia Award: it is as dismal in Madhya Pradesh as in other states नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स के चुनावी दंगल की तैयारी जोरों पर Not even one employee of any newspaper of Rajathan is getting Majithia Award जागरण के मुख्यमहाप्रबंधक,कार्मिक प्रबंधक और मार्केटिंग मैनेजर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज न्यूजX में पीटर-इंद्राणी के कारनामे भी कम रहस्‍यमय नहीं हिंदी की फुल स्पीड...!! कैसे मिलेगा न्याय और मजीठिया , जब... सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय हुआ इनके हवाले क्या करें इन अकादमियों का ? प्रगतिशील कन्नड़ लेखक कलबर्गी की हत्या प्रांशु अध्यक्ष, नीरज सचिव और संजय शर्मा चुने गए उपाध्यक्ष हिंदी के कई अखबारों में काम किया, साथी ने ही जान ले ली कब तक लटकती रहेगी तलवार अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा का फार्म कल अखबार में छपेगा धनबाद पुलिस पत्रकारों की आवाज दबाने में लगी Raghav Chari IIMC से विदा कांग्रेस का आरोप, भाजपा की शह पर स्टिंग ऑपरेशन पत्रकार रतन पंवार पर देर रात हमला गलत सूचना देकर लोगों को गुमराह कर रहा सोनभद्र का सूचना विभाग जमादार हत्याकांड में आरोपी थानेदार ने किया पत्रकारों पर केस जागरण, सहारनपुर में ब्रांडिंग के नाम पर करोड़ों का खेल प्रधानमंत्री ने मीडिया सलाहकार नहीं रखा, खुद ही संभालते हैं कमान मीडिया के दरबार में इंद्राणी की फंतासी रवीश कुमार ने कुछ गलत कहा क्या रवीश कुमार सही में दलाल है अरुण सिंह अमर उजाला के साथ जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हितेन महंत का बीमारी के बाद निधन मीडिया, पुलिस और जनमत विवेक सिंह की माताजी का डेंगू से निधन इंद्राणी मुखर्जी के फ्लैट से सूटकेस बरामद, इसमें छुपे हैं कुछ राज कानपुर में दरोगा ने मीडिया कर्मी पर तानी रिवाल्वर, सस्पेंड बीजापुर में मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यहार गीता प्रेस विवाद को खत्म कराएंगे उप श्रमायुक्त अल-जजीरा के पत्रकारों की सजा पर UN चिंतित उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता संवाददाता समिति का परिणाम घोषित, हेमंत अध्यक्ष, सिद्धार्थ सचिव चुने