Country's richest woman Savitri Jindal loses in Haryana pollsमुकेश राजपूत पहुंचे ईटीवी, बने डिप्टी एडिटर एनडीटीवी ने खोले जाब के दरवाजे यूपी में सूचना आयोग में भाई-भतीजावाद रोकने की मांगफ्लिपकार्ट ने 300 करोड़ रुपये सालाना किराए पर लिया ऑफिसबरेली में अमर उजाला दिवाली कार्निवल में एक और रिकॉर्डरजत शर्मा का मोदी सरकार में प्रवेश, राज्यसभा का रास्ता साफजी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा पर चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप, केस दर्जएचटी मीडिया की दूसरी तिमाही का शुद्ध लाभ 24.56 फीसदी घटाआजम खां के खिलाफ खबर चलाने पर सपाइयों ने फूंका चैनल का पुतलारवि बने न्यूज एक्सप्रेस में क्राइम और एसआईटी हेडदैनिक भास्कर में मिला दीवाली बोनस, अकाउंट में पहुंचा 90% employees at Kasturi and Sons fall under the purview of the wage boardअमर उजाला, गोरखपुर से वेदरत्न शुक्ला का इस्तीफा जबलपुर में डाक्टरों ने पत्रकार प्रतीक अवस्थी को पीटादैनिक भास्कर की कंपनी डीबी कॉर्प ने तीन महीने में कमाए 68 करोड़पुन्हाना के पत्रकार मनीष आहूजा पर हमला दैनिक जागरण, नोएडा का एक रिपोर्टर संपादक के नाम पर मांग रहा है दीपावली गिफ्ट!लोकमत ने भी लागू किया मजीठिया पर दिया चौथे, पांचवे और छठे ग्रेड का वेतनमान हार्टअटैक से समस्तीपुर के पत्रकार विजय वर्मा का निधनम्यांमार में मीडिया ग्रुप के मालिक, प्रकाशक और 3 पत्रकारों को 2 साल की कैदवाह रे सहारा, इंटरव्यू दिया उपसंपादक का बना दिया मुख्य उपसंपादककैनविज टाइम्स दो एडिशन लांच करने के साथ ही लेकर आएगा दो नए चैनलस्मिता भी आईबीएन के घराने से गईं, हेडलाइंस टुडे के साथ जुड़ी इंडिया टीवी ने आजतक को दी पटकनी Dainik Jagran is guilty of the contempt of the Apex Court: IFWJपुष्प सवेरा समूह ने 40 करोड़ ब्लैकमनी को व्हाइट कियाएनडीटीवी पर ऐसे उठा मजीठिया का मामलाWhy CNN-IBN was unhappy with anchor Bhupendra Chaubeyइस चैनल में तीन उद्योगपति लगा रहे हैं पैसाआस्ट्रेलियाई चैनल-10 ने माफी मांगी मीडियाकर्मी पर हमले में कार्रवाई नहीं होने पर लोगों ने लगाया चक्काजामआजमखां मामले में चैनल के संपादक और मालिक पर मानहानि का केस दर्जफारवर्ड प्रेस के आयवन कोस्का और प्रमोद रंजन को मिली अग्रिम जमानत हर्यंश्व सिंह बिजनौर से डेस्क पर आए, सर्वेंद्र नए ब्यूरो चीफहिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड का मुनाफा 26 फीसदी बढ़ापुष्प सवेरा को प्रकाशित करने वाली कंपनी पुष्पांजलि समूह पर आयकर छापाचला गया संतोष का आनंददैनिक जागरण का जीएम कहता है ‘हरामजादा’ गाली नहींमजीठिया की लड़ाई की आग अन्य अखबारों को भी जलाएगीमजीठिया मामले में मालिकों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस 28 अक्टूबर से पहलेडा. चन्देश्वर यादव अवधनामा 2014 सम्मान से नवाजे गएमोदीनामा लिखने गुजरात गए काशी के पत्रकारों में मुन्नाभाई भीअमर उजाला मेरठ में अच्छाई पर बुराई की जीत लिखने पर कई पर गाजरेत खनन बना बागपत के पत्रकारों की कमाई का जरियासारधा मामले में रोजवैली के एमडी व तारा टीवी के मालिक तलबसंघी पिता के पुत्री सीमा गुप्ता को मिली लोकसभा टीवी की कमान, सीईओ कम एडिटर इन चीफ बनीं भास्कर रिपोर्टर पर हमला, किडनैप कर हिमाचल ले जाने की कोशिशवरिष्ठ पत्रकार नाफे किदवाई नहीं रहे, उपजा ने दी श्रद्धांजलि बड़ा मुश्किल है पत्रकारिता में फ्रीलांसिंग करना

जुकरबर्ग को आप जानते हैं? मैं नहीं जानता ...

जुकरबर्ग को आप जानते हैं? मैं नहीं जानता  ...
जुकरबर्ग को आप जानते हैं? मैं नहीं जानता और न ही मेरी जानने में कोई रुचि है। दरअसल, पिछले दिनों ये कोई जुकरबर्ग नाम के शख्स ने हिन्दी पत्रकारों के साथ
मनोज कुमार,वरिष्ठ पत्रकार, मध्यप्रदेश जुकरबर्ग को आप जानते हैं? मैं नहीं जानता और न ही मेरी जानने में कोई रुचि है। दरअसल, पिछले दिनों ये कोई जुकरबर्ग नाम के शख्स ने हिन्दी पत्रकारों के साथ जो व्यवहार किया, वह अनपेक्षित नहीं था। वास्तव में ये महाशय भारत में तो आये नहीं थे। इनका वेलकम तो इंडिया में हो रहा था। फिर ये भारतीय पत्रकारों को क्यो ...

मैंने संघ क्यों छोड़ा? ...

मैंने संघ क्यों छोड़ा? ...
विकास पाठक, सहायक प्रोफ़ेसर, शारदा यूनिवर्सिटी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी अपने को 'राष्ट्रवादी' विचारधारा से संचालित संगठन बताते हैं.
विकास पाठक, सहायक प्रोफ़ेसर, शारदा यूनिवर्सिटी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी अपने को 'राष्ट्रवादी' विचारधारा से संचालित संगठन बताते हैं. मेरे विचार से भारत में 'राष्ट्रवाद' की विचारधारा की जनक भाजपा से ज़्यादा कांग्रेस रही है.वहीं, संघ की विचारधारा एक समुदाय मात्र को मजबूत करने वाली प्रतीत होती है.भारत जैसी सांस्कृतिक विविधता वाले ...

वर्तमान राजनीति में पत्रकार क्या करे ...

वर्तमान राजनीति में पत्रकार क्या करे ...
कई बार विचार आता है कि फेसबुक पर राजनीति पर कम से कम लिखूं। अखबारों में तो लिखता ही रहता हूं। बहस में भी बोलना ही पड़ता है। इसका पहला कारण तो यह है कि दुर्भाग्य से देश के सारे मुद्दे पर राजनीति के हाबी हो जाने से हमारा समाज कई प्रकार के संकटों का शिकार हुआ। इनमें सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक...सभी प्रकार के संकट हैं।
Awadhesh Kumar। मित्रों, कई बार विचार आता है कि फेसबुक पर राजनीति पर कम से कम लिखूं। अखबारों में तो लिखता ही रहता हूं। बहस में भी बोलना ही पड़ता है। इसका पहला कारण तो यह है कि दुर्भाग्य से देश के सारे मुद्दे पर राजनीति के हाबी हो जाने से हमारा समाज कई प्रकार के संकटों का शिकार हुआ। इनमें सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक...सभी प्रकार के संकट हैं। ...

एक पत्रकार की नजर से देखिए गांधी मैदान को ...

एक पत्रकार की नजर से देखिए गांधी मैदान को ...
Gyaneshwar Vatsyayan। खबरों का योद्धा हूं । सोमवार को पटना की सड़कों पर आंखें बहुत कुछ पढ़ रही थी । सरकार का खूनी चेहरा/इरादा/पागलपन साफ दिख रहा था । नेपथ्‍य में गांधी मैदान का दशहरा हादसा था । आंखों की स्‍टडी को तुलनात्‍मक भी रखना था ।
Gyaneshwar Vatsyayan। खबरों का योद्धा हूं । सोमवार को पटना की सड़कों पर आंखें बहुत कुछ पढ़ रही थी । सरकार का खूनी चेहरा/इरादा/पागलपन साफ दिख रहा था । नेपथ्‍य में गांधी मैदान का दशहरा हादसा था । आंखों की स्‍टडी को तुलनात्‍मक भी रखना था । बगैर तस्‍वीरों की बात नहीं बनती । इस पोस्‍ट के साथ कुल आठ तस्‍वीरें हैं । सबों को बहुत ध्‍यान से देखियेगा । ...

थानवी साहब के सवाल का प्रदीप ने यूं दिया जवाब ...

थानवी साहब के सवाल का प्रदीप ने यूं दिया जवाब ...
Om Thanvi (थानवी साहब के सवाल)। अमेरिका के राष्ट्रपति हर शनिवार रेडियो पर मन की बात कहते हैं, "वीकली एड्रेस" नाम से। शायद उससे थोड़ी प्रेरणा नरेंद्र
Om Thanvi (थानवी साहब के सवाल)। अमेरिका के राष्ट्रपति हर शनिवार रेडियो पर मन की बात कहते हैं, "वीकली एड्रेस" नाम से। शायद उससे थोड़ी प्रेरणा नरेंद्र मोदी लेते आए हैं। पर हमारे प्रधानमंत्री ने अपने पहले रेडियो प्रसारण के लिए विजयदशमी का दिन चुना, जो हिन्दू त्योहार है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्थापना दिवस भी है। बहरहाल उन्होंने "मन की बात" में ...

मीडिया जगत में स्त्री शरीर को कैश कराने की होड़ कितनी सही कितनी गलत ....? ...

मीडिया जगत में स्त्री शरीर को कैश कराने की होड़ कितनी सही कितनी गलत ....? ...
सौंदर्य और आकर्षण का अटूट रिश्ता है, सौंदर्य से दुनियाँ के समृद्ध साहित्य अटे पड़े है, चाहे पूरब हो या पश्चिम सभी जगह कवियों ने साहित्यकारों ने, चित्रकारों ने यहाँ
सौंदर्य और आकर्षण का अटूट रिश्ता है, सौंदर्य से दुनियाँ के समृद्ध साहित्य अटे पड़े है, चाहे पूरब हो या पश्चिम सभी जगह कवियों ने साहित्यकारों ने, चित्रकारों ने यहाँ तक की ऋषि मुनियो ने भी सौंदर्य को अपना आधार बनाया! किसी ने प्रकृति की गोद में जाकर प्रकृति के सौंदर्य में ईश्वर को ढूंढा और पाया तो किसी ने स्त्री सौंदर्य में ही समूची प्रकृति को ढून ...

अब श्रीलंका के अखबार सीलोन टुडे ने जोड़ा एक नया आयाम ...

अब श्रीलंका के अखबार सीलोन टुडे  ने जोड़ा एक नया आयाम  ...
जब त्रि-आयामी यानी थ्री-डी सिनेमा आया, तो यह दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना। थ्री-डी तकनीकी के इफेक्ट को महसूस करने के लिए खास चश्मे बने और दर्शकों
जब त्रि-आयामी यानी थ्री-डी सिनेमा आया, तो यह दुनिया भर में कौतूहल का विषय बना। थ्री-डी तकनीकी के इफेक्ट को महसूस करने के लिए खास चश्मे बने और दर्शकों को दिए गए। यह दृश्य माध्यम में थ्रिल और सनसनी का दौर था। सिनेमा के परदे से निकलकर यह तकनीक अखबारों और पत्रिकाओं तक भी पहुंची, हालांकि वहां इसने इतनी सनसनी नहीं पैदा की। लेकिन अब श्रीलंका के अखबार सीलो ...

बेस्ट नहीं , ब्रेस्ट मीडिया ...

बेस्ट नहीं , ब्रेस्ट मीडिया  ...
बेस्ट होता है सबसे बढ़िया , ब्रेस्ट औरत के स्तन को कहते हैं ! हालिया "नंगई" करने में माहिर, "टाइम्स ऑफ इंडिया" नाम के "बेस्ट" अंगरेजी अखबार, ने "ब्रेस्ट"
बेस्ट होता है सबसे बढ़िया , ब्रेस्ट औरत के स्तन को कहते हैं ! हालिया "नंगई" करने में माहिर, "टाइम्स ऑफ इंडिया" नाम के "बेस्ट" अंगरेजी अखबार, ने "ब्रेस्ट" जर्नलिज़्म की अपनी शातिराना परम्परा को जारी रखा ! बॉलीवुड की अदाकारा दीपिका पादुकोण के आंशिक स्तनों का पूरा प्रदर्शन करने की चाह में आलोचना का पात्र भी बना ! लोगों ने गरियाया भी ! ...

बचना - बढ़ना हिंदी का ....!! ...

बचना - बढ़ना हिंदी का ....!! ...
मेरे छोटे से शहर में जब पहली बार माल खुला , तो शहरवासियों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं था। क्योंकि यहां सब कुछ अप्रत्याशित औऱ अकल्पनीय था। इसमें
तारकेश कुमार ओझा। मेरे छोटे से शहर में जब पहली बार माल खुला , तो शहरवासियों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं था। क्योंकि यहां सब कुछ अप्रत्याशित औऱ अकल्पनीय था। इसमें पहुंचने पर लोगों को किसी सपनीली दुनिया में चले जाने का भान होता। बड़ी - बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों की चकाचौंध भरे विज्ञापन लोगों को हैरत में डाल देते थे। लेकिन इसमें एक ख ...

हिन्दी के लिये रुदन ...

हिन्दी के लिये रुदन  ...
हिन्दी के प्रति निष्ठा जताने वालों के लिये हर साल सितम्बर की 14 तारीख रुदन का दिन होता है। इस एक दिनी विलाप के लिये वे पूरे वर्ष भीतर ही भीतर तैयारी करते हैं
-मनोज कुमार हिन्दी के प्रति निष्ठा जताने वालों के लिये हर साल सितम्बर की 14 तारीख रुदन का दिन होता है। इस एक दिनी विलाप के लिये वे पूरे वर्ष भीतर ही भीतर तैयारी करते हैं लेकिन अनुभव हुआ है कि सालाना तैयारी हिन्दी में न होकर लगभग घृणा की जाने वाली भाषा अंग्रेजी में होती है। हिन्दी को प्रतिष्ठापित करने की कोशिश स्वाधीनता के पूर्व से हो रही है और ...

हरियाणवी दंगल में अपना-अपना मीडिया ...

हरियाणवी दंगल में अपना-अपना मीडिया ...
लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव। इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भारत में जिस चुनाव आयोग की है, उसकी ईमानदारी की साख दुनिया भर
खुशदीप सहगल इस गड़बड़झाले में कैसे बन पाएगी स्वतंत्र राय सवाल सिर्फ निष्पक्षता और शुचिता का ही नहीं, चुनाव में सभी प्रत्याशियोंं को प्रचार के समान अवसर मुहैया कराने का भी है लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव। इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भारत में जिस चुनाव आयोग की है, उसकी ईमानदारी की साख दुनिया भर में है। लेकि ...

TRAI Report on Media Ownership ...

TRAI Report on Media Ownership ...
The Telecom Regulatory Authority of India recently released its report on media ownership to a studied indifference from the print media which otherwise debates this issue vigorously. Why have the newspapers avoided a serious and vigorous engagement with the report’s consequential recommendations?
The Telecom Regulatory Authority of India recently released its report on media ownership to a studied indifference from the print media which otherwise debates this issue vigorously. Why have the newspapers avoided a serious and vigorous engagement with the report’s consequential recommendations? Given the general tone of public discussions ...

भारतीय मीडिया में खबरों का ज्वार - भाटा...!! ...

भारतीय मीडिया में खबरों का ज्वार - भाटा...!! ...
तारकेश कुमार ओझा। पता नहीं क्यों मुझे भारतीय मीडिया का मिजाज भारत - पाकिस्तान सीमा की तरह विरोधाभासी व अबूझ प्रतीत होता है। भारत - पाक की सीमा
तारकेश कुमार ओझा। पता नहीं क्यों मुझे भारतीय मीडिया का मिजाज भारत - पाकिस्तान सीमा की तरह विरोधाभासी व अबूझ प्रतीत होता है। भारत - पाक की सीमा में कब बम - गोलियां बरसने लगे और कब दोनों देशों के सैन्य अधिकारी आपस में हाथ मिलाते नजर आ जाएं, कहना मुश्किल है। अभी कुछ दिन पहले तक चैनलों पर सीमा में तनाव की इतनी खबरें चली कि लगने लगा कि दोनों देशों ...

हिंदी के अच्छे पत्रकार वही साबित हुए जिनकी अंग्रेजी पर भी सामान पकड़ हो ...

हिंदी के अच्छे पत्रकार वही साबित हुए जिनकी अंग्रेजी पर भी सामान पकड़ हो  ...
हो सकता है कि मेरे कहने से हिंदी भाषी आहत महसूस करें, लेकिन गौर करें तो हिंदी के अच्छे संपादक वही हुए हैं जिनका हिंदी के साथ अंग्रेजी पर समान अधिकार रहा।
हो सकता है कि मेरे कहने से हिंदी भाषी आहत महसूस करें, लेकिन गौर करें तो हिंदी के अच्छे संपादक वही हुए हैं जिनका हिंदी के साथ अंग्रेजी पर समान अधिकार रहा। स्वर्गीय अज्ञेय,मनोहर श्याम जोशी, राजेंद्र माथुर, प्रभाष जोशी से लेकर मौजूदा वक्त में प्रमोद जोशी और नीलाभ मिश्र पर ध्यान दें तो यह बात समान रूप से लागू होती है। शुष्क आंकड़ों और नीतियों को सम ...

आपबीतीः तो मनोज झा ने तो पिंकू की अंगुठी उतरवा दी ...

आपबीतीः तो मनोज झा ने तो पिंकू की अंगुठी उतरवा दी ...
मेरठ में एक मुहल्ला है, उमेश नगर। 2000 में अमर उजाला में काम करने के दौरान वहां कमरा लिया था। पड़ोस में आसपास ही पुराने दोस्त मुकेश सिंह, सतीश सिंह,
मेरठ में एक मुहल्ला है, उमेश नगर। 2000 में अमर उजाला में काम करने के दौरान वहां कमरा लिया था। पड़ोस में आसपास ही पुराने दोस्त मुकेश सिंह, सतीश सिंह, संजय श्रीवास्तव, दीपक सती, संजीव सिंह पुंडीर, दिनेश उप्रैती रहते थे। सभी अमर उजाला में काम करते थे। एक परिवार की तरह रहते थे। सुबह हो या शाम या दोपहर..कोई किसी के घर चला जाता था, चाय नाश्ता या भो ...

पुरस्कारों में भी चल रहा है खेल, एक हाथ से दे दूजे हाथ से ले ...

पुरस्कारों में भी चल रहा है खेल, एक हाथ से दे दूजे हाथ से ले ...
छब्बीस अगस्त को टीवी पर एक समाचार चैनल में नीचे की पट्टी पर हिंदी के कुछ लेखकों को मिले पुरस्कारों की सूचना देख रहा था। फेसबुक पर तो हर रोज कोई न कोई
छब्बीस अगस्त को टीवी पर एक समाचार चैनल में नीचे की पट्टी पर हिंदी के कुछ लेखकों को मिले पुरस्कारों की सूचना देख रहा था। फेसबुक पर तो हर रोज कोई न कोई लेखक अपने पुरस्कृत होने का जश्न मनाता हुआ दिखाई देता है। अगर हिसाब लगाया जाए तो अभी देश के गांव, प्रखंड, जिलों, कस्बों, महानगरों में हिंदी के लेखकों को मिलने वाले पुरस्कारों की संख्या हजारों में होगी। ...

​कंपनी या कारू का खजाना...? ...

​कंपनी या कारू का खजाना...? ...
तारकेश कुमार ओझा। एक कंपनी के कई कारोबार। कारोबार में शामिल पत्र - पत्रिकाओं का भी व्यापार। महिलाओं की एक पत्रिका की संपादिका का मासिक वेतन साढ़े सात
तारकेश कुमार ओझा। एक कंपनी के कई कारोबार। कारोबार में शामिल पत्र - पत्रिकाओं का भी व्यापार। महिलाओं की एक पत्रिका की संपादिका का मासिक वेतन साढ़े सात लाख रुपए तो समाचार पत्र समूह के सीईओ का साढ़े सोलह लाख से कुछ कम। पढ़ने - सुनने में यह भले यह अविश्सनीय सा लगे, लेकिन है पूरे सोलह आने सच। वह भी अपने ही देश में। हम बात कर रहे हैं हजारों करोड़ रुपयो ...

वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्रा की आपबीती, पढिए ...

वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्रा की आपबीती, पढिए ...
Vikas Mishra: करीब आठ साल बाद किराए के मकान में आया हूं। आठ साल खुद के फ्लैट में रहा। उससे पहले लंबा वक्त किराए के मकान में गुजरा है। तरह तरह
Vikas Mishra: करीब आठ साल बाद किराए के मकान में आया हूं। आठ साल खुद के फ्लैट में रहा। उससे पहले लंबा वक्त किराए के मकान में गुजरा है। तरह तरह के मकान, तरह तरह के मकान मालिक। हर घर में कई-कई कहानी। ये संयोग ही है कि हमेशा मकान मालिक के तौर पर बड़े अच्छे लोग मिले। मकान-मालिक और किराएदार का रिश्ता बस एक दिन का होता था, जब किराया देता था। बाकी तो घर ...

जेम्स फोले को गीदड़ पत्रकारिता की श्रद्धांजलि ...

जेम्स फोले को गीदड़ पत्रकारिता की श्रद्धांजलि ...
अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोले मार दिए गए ! क़त्ल का अंदाज़ वहशियाना था ! बकरे की गर्दन माफ़िक उनकी गर्दन को रेता गया ! दुनिया भर में इसकी खूब निंदा हो
अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोले मार दिए गए ! क़त्ल का अंदाज़ वहशियाना था ! बकरे की गर्दन माफ़िक उनकी गर्दन को रेता गया ! दुनिया भर में इसकी खूब निंदा हो रही है ! अब दुसरे पत्रकार स्टीवन जोएल सोटलॉफ की कटी गर्दन की ख़बर का इंतज़ार है ! दुनिया के तमाम देशों के गृह-युद्ध या आतंकवादी घटनाओं को, घटना स्थल से लाइव कवरेज के चक्कर में सैकड़ों साहसी शेर-नुमा पत्रक ...

मीडिया के गेंग्स आफ वासेपुर ...

मीडिया के गेंग्स आफ वासेपुर ...
कभी केजरीवाल की सुपारी ली तो कभी मोदी की. कभी आसाराम की धोती के हर धागे खोलकर चीथड़े चीथड़े कर दिए. तो कभी बलात्कार का बलात्कार ही कर डाला.
· कभी केजरीवाल की सुपारी ली तो कभी मोदी की. कभी आसाराम की धोती के हर धागे खोलकर चीथड़े चीथड़े कर दिए. तो कभी बलात्कार का बलात्कार ही कर डाला. मूड हुआ तो कभी खबर ही छोड़ दी . तो कभी खबर समझे ही नही. कभी दो टके के एंकर को हीरो बना दिया और कभी दो टके के हीरो से एंकरिंग करा दी. जो जितना घटिया उतना ही बढ़िया. ये हाल हे फिल्मसिटी के गेंग्स आफ वासेपुर ...

जब रात 10 बजे प्रधानमंत्री सो जाते थे तो मतंग सिंह सरकार चलाते थे ...

जब रात 10 बजे प्रधानमंत्री सो जाते थे तो मतंग सिंह सरकार चलाते थे ...
लक्ष्मी अय्यर का फोन आया। उसने कहा कि सुना है कि मतंग सिंह के घर पर सीबीआई का छापा पड़ा है। जरा पता लगाइए। मैंने सीबीआई कवर करने वाले मित्र पत्रकार नीलू रंजन से संपर्क साधा तो पता चला
लक्ष्मी अय्यर का फोन आया। उसने कहा कि सुना है कि मतंग सिंह के घर पर सीबीआई का छापा पड़ा है। जरा पता लगाइए। मैंने सीबीआई कवर करने वाले मित्र पत्रकार नीलू रंजन से संपर्क साधा तो पता चला कि मतंग सिंह और उनकी बीवी रही मनोरंजन सिंह समेत उनसे जुड़े 28 लोगों व ठिकानों पर छापे मारे गए हैं। तलाशी चल रही थी। यह छापे कलकत्ता की शारदा कंपनी से संबंध रखने के सिलस ...

क्यों नपुंसक हैं पत्रकार? ...

 क्यों नपुंसक हैं पत्रकार? ...
Arun Srivastava। किसी शायर ने कहा है, ‘खुदा के घर से कुछ गधे फरार हो गए, कुछ पकड़े गए बाकी पत्रकार हो गए।’ यह कहावत कम से कम कॉरपोरेट जगत
Arun Srivastava। किसी शायर ने कहा है, ‘खुदा के घर से कुछ गधे फरार हो गए, कुछ पकड़े गए बाकी पत्रकार हो गए।’ यह कहावत कम से कम कॉरपोरेट जगत के पत्रकारों के लिए तो लागू होती ही है। कारपोरेट या सम्पादक अक्सर कहता है कि कार्यालय आने का समय होता है जाने का नहीं, लेकिन वह कॉरपोरेट क्षेत्र की सुविधाओं को ताक पर रखता है। आज कुछ अखबारों के मालिक कॉरपोरेट जग ...

संजय सिन्हा की आपबीतीः जो करने से खुशी मिले वही कर गुजरिए ...

संजय सिन्हा की आपबीतीः जो करने से खुशी मिले वही कर गुजरिए ...
मुझे सच में नहीं पता कि मेरी सैलरी कितनी है। मोटे तौर पर जानता हूं कि इतने पैसे हर महीने एकाउंट में पहुंचते है, पर उसमें कुछ कटता-छंटता होगा तो मुझे नहीं
मुझे सच में नहीं पता कि मेरी सैलरी कितनी है। मोटे तौर पर जानता हूं कि इतने पैसे हर महीने एकाउंट में पहुंचते है, पर उसमें कुछ कटता-छंटता होगा तो मुझे नहीं पता चलता। मेरी दिलचस्पी नहीं है इस बात को जानने में। मेरी दिलचस्पी सिर्फ इस बात में है कि मैं जो काम कर रहा हूं, उस काम को मैं सचमुच करना चाहता हूं कि नहीं, और फिर घर चलाने, दोस्तों पर खर्च कर ...

अखबारों ने गांव में बदला खबरों का कलेवर ...

 अखबारों ने गांव में बदला खबरों का कलेवर ...
कुछ साल पहले पंजाब के एक हिंदी अखबार के पहले पेज पर चार तस्वीरों के साथ एक खबर छपी थी, जिसका शीर्षक था ‘मुझे घर जाने दो, नहीं तो जान दे दूंगी.’
।। प्रमोद जोशी ।। वरिष्ठ पत्रकार कुछ साल पहले पंजाब के एक हिंदी अखबार के पहले पेज पर चार तस्वीरों के साथ एक खबर छपी थी, जिसका शीर्षक था ‘मुझे घर जाने दो, नहीं तो जान दे दूंगी.’ खबर एक छोटे शहर की थी, जहां की पुलिस सार्वजनिक स्थानों पर घूमते जोड़ों की पकड़-धकड़ कर रही थी. खबर के साथ लगी पहली तीन तस्वीरों में एक लड़की पुलिस वालों से बात करती ...

दहशत भरी ज़िंदगी.. एक डर ये भी.... ...

दहशत भरी ज़िंदगी.. एक डर ये भी.... ...
एक तो विकासशील देश का तमगा और उस पर दिन ब दिन घटते नैतिक मूल्यों के साथ ज़ीरो जेंडर सेंस्टिविटी, आज यही हमारे समाज की पहचान है। हम उसी
ज़िंदगी में हर छोटी बड़ी बात चाहें वो ग़म हो या खुशी जब हम बांटना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने मां-बाप की तरफ देखते हैं, क्योंकि यही वो आंखे होती हैं जिनमें खुशियों की चमक सबसे तेज़ नज़र आती है, और यही वो आंचल होता है जिसमें दुनिया भर के ग़मों को छिपा लेने की कूवत होती है, इसे हम normal life कहते हैं, लेकिन यही नॉर्मल लाइफ जब आपको हिस्से में ना हो त ...

फिर वही, एक विनम्र जिद्दी धुन ...

फिर वही, एक विनम्र जिद्दी धुन ...
इस तरह अनुराधा के जीवन की वह यात्रा शुरू हुई जो लगभग दो साल बाद जाकर एक महत्वपूर्ण कृति के सामने आने के साथ खत्म हुई. काम कठिन था या नहीं कहना
"सब बात करते हैं. कोई नहीं करता ये काम. मैं करके देखती हूं....." इस तरह अनुराधा के जीवन की वह यात्रा शुरू हुई जो लगभग दो साल बाद जाकर एक महत्वपूर्ण कृति के सामने आने के साथ खत्म हुई. काम कठिन था या नहीं कहना मुश्किल है. लेकिन कुछ लोगों ने उसे असंभव बना दिया था. सारे लोग मान चुके थे कि एक दशक में जो काम नहीं हो पाया, वह नहीं हो पाएगा. श ...

कस्तूरचंद गुप्त: मध्यप्रदेश की पत्रकारिता की पाठशाला ...

कस्तूरचंद गुप्त: मध्यप्रदेश  की पत्रकारिता की पाठशाला  ...
राजेन्द्र अग्रवालः मिशन से प्रोफेशन में बदलने वाली पत्रकारिता का जब जब उल्लेख होता है तब तब कस्तूरचंद गुप्त का स्मरण सहज ही हो जाता है। अपने समय के
राजेन्द्र अग्रवालः मिशन से प्रोफेशन में बदलने वाली पत्रकारिता का जब जब उल्लेख होता है तब तब कस्तूरचंद गुप्त का स्मरण सहज ही हो जाता है। अपने समय के प्रतिबद्ध पत्रकार श्री गुप्त पूरे जीवनकाल पत्रकारिता को समाजसेवा का आधार मानते रहे हैं। उनका मानना था कि समाज में जब सुनवाई की एक ऐसी जटिल प्रक्रिया है जहां एक गरीब पीड़ित व्यक्ति नहीं पहुंच सकता है, ...

मैकाले की संतानें का अंग्रेजी अखबारों और चैनलों में संपादक बनकर नई ‘बाबू ...

मैकाले की संतानें का अंग्रेजी अखबारों और चैनलों में संपादक बनकर नई ‘बाबू ...
इन दिनों अंग्रेजी वाले हिंदी से अचानक बहुत प्यार करने लगे हैं. भारतीय नस्ल के अंग्रेजों का हिंदी के प्रति ऐसा विकट अनुराग देखकर डर लगता है. लगता है कि
इन दिनों अंग्रेजी वाले हिंदी से अचानक बहुत प्यार करने लगे हैं. भारतीय नस्ल के अंग्रेजों का हिंदी के प्रति ऐसा विकट अनुराग देखकर डर लगता है. लगता है कि अपनी खाल, बाल और चाल बदलकर मैकाले की संतानें अंग्रेजी अखबारों और चैनलों में संपादक या एंकर बनकर नई ‘बाबूगीरी’ कर रही हों. अंग्रेजी मीडिया को आखिर हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं के लिए ऐसी चिंता क्यों हो ...

मीडिया के योगी, गरीब विरोधी - नरेंद्र मोदी ...

मीडिया के योगी, गरीब विरोधी - नरेंद्र मोदी  ...
सरकारी गुणा-गणित के मुताबिक़ , भारत के, गाँव और शहर में रहने वाला व्यक्ति गर 30 व् 40 रुपये रोज़ कमाता है, तो वो गरीब नहीं है ! अब इस तीस और
सरकारी गुणा-गणित के मुताबिक़ , भारत के, गाँव और शहर में रहने वाला व्यक्ति गर 30 व् 40 रुपये रोज़ कमाता है, तो वो गरीब नहीं है ! अब इस तीस और चालीस रुपये का हिसाब देख लें ! दाल 80 रुपये, आटा 30 रुपये, टमाटर 90 , चावल 30, प्याज 70, आलू 30, दूध 40 रुपये और इन सबको आम आदमी तक पहुंचाने वाला डीज़ल-पेट्रोल-गैस अपने-अपने हिसाब से ! 30-40 वाला नंगा, नहाये क् ...

जिस मीडिया के चहेते थे उसी से दूरी -अजॉय बोस ...

जिस मीडिया के चहेते थे उसी से दूरी -अजॉय बोस ...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय मीडिया के बीच बढ़ती दूरियां इसलिए अचरज का विषय है, क्योंकि महज चंद माह पहले तक मोदी मीडिया के सबसे चहेते नेता हुआ करते थे। वास्तव में लंबे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय मीडिया के बीच बढ़ती दूरियां इसलिए अचरज का विषय है, क्योंकि महज चंद माह पहले तक मोदी मीडिया के सबसे चहेते नेता हुआ करते थे। वास्तव में लंबे और सरगर्मियों से भरपूर चुनाव प्रचार अभियान के दौरान तो मोदी के अनेक विरोधियों ने मीडिया (खासतौर पर टीवी मीडिया) पर यह इल्जाम भी लगाया था कि वे भाजपा के इस ताकतवर नेता के पक्ष म ...

कश्मीर पर मेरे कहे को पहले समझें तो सही ! ...

कश्मीर पर मेरे कहे को पहले समझें तो सही ! ...
वेद प्रताप वैदिक। पहले हाफिज सईद से मेरी मुलाकात पर संसद में हंगामा हुआ और फिर कश्मीर पर मेरे विचारों को लेकर। मुझे दुख है कि हमारे नेताओं ने इन दोनों मुद्दों पर ठंडे दिमाग से
वेद प्रताप वैदिक। पहले हाफिज सईद से मेरी मुलाकात पर संसद में हंगामा हुआ और फिर कश्मीर पर मेरे विचारों को लेकर। मुझे दुख है कि हमारे नेताओं ने इन दोनों मुद्दों पर ठंडे दिमाग से क्यों नहीं सोचा? वे कुछ अनैतिक टीवी चैनलों के कुप्रचार के शिकार क्यों बन गए? आज तक दुनिया के किसी भी देश की संसद किसी पत्रकार या विशेषज्ञ की मुलाकात पर कभी इस तरह ठप नहीं हुई ...

बेनेट कोलमैन, वैदिक के अधर्म में मारा गया धर्मयुग ...

बेनेट कोलमैन, वैदिक के अधर्म में मारा गया धर्मयुग ...
दक्षिणी दिल्ली में प्रेस इन्क्लेव पत्रकारों की एक कॉलोनी है। इसी कॉलोनी के एक फ्लैट में रघुवीर सहाय रहते थे। यहीं दिसंबर, 1990 में उनकी मृत्यु हुई। इसी कॉलोनी
♦ आलोक श्रीवास्‍तव दक्षिणी दिल्ली में प्रेस इन्क्लेव पत्रकारों की एक कॉलोनी है। इसी कॉलोनी के एक फ्लैट में रघुवीर सहाय रहते थे। यहीं दिसंबर, 1990 में उनकी मृत्यु हुई। इसी कॉलोनी में दिल्ली के कई नामी-गिरामी पत्रकार रहते हैं। 11 अगस्त, 1996 को इस कॉलोनी में अचानक दिल्ली के पत्रकारों का आना-जाना बढ़ गया। बड़े-बड़े पत्रकार – हां, बेशक हिंदी के। मही ...

हां मैं मिला था दाउद से (हिंदी में पढ़े) ...

हां मैं मिला था दाउद से (हिंदी में पढ़े) ...
इस लेख को शीर्षक देने के दो तरीके हो सकते हैं। पहला, हां, मैं दाउद इब्राहिम से मिला और मैं एक आतंकवादी नहीं हूं। और दूसरा मैं केवल एक पत्रकार हूं और मेरा नाम वैदिक नहीं है। अब मैं
इस लेख को शीर्षक देने के दो तरीके हो सकते हैं। पहला, हां, मैं दाउद इब्राहिम से मिला और मैं एक आतंकवादी नहीं हूं। और दूसरा मैं केवल एक पत्रकार हूं और मेरा नाम वैदिक नहीं है। अब मैं पहले सवाल का जवाब देता हूं और मैं इसकी पूरी जानकारी देना चाहता हूं। मैं जरनैलसिंह भिंडरावाले से डेढ़ दर्जन बार मिला हूं। इसके अलावा, ललडेंगा, तुइंगलेंग मुइवा, गुलुबुद ...

पत्रकारिता में पुरानी है आत्मप्रवंचना की बीमारी ...!! ...

पत्रकारिता में पुरानी है आत्मप्रवंचना की बीमारी ...!! ...
भारतीय राजनीति के अमर सिंह और हाफिज सईद से मुलाकात करके चर्चा में आए वेद प्रताप वैदिक में भला क्या समानता हो सकती है। लेकिन मुलाकात पर मचे बवंडर
भारतीय राजनीति के अमर सिंह और हाफिज सईद से मुलाकात करके चर्चा में आए वेद प्रताप वैदिक में भला क्या समानता हो सकती है। लेकिन मुलाकात पर मचे बवंडर पर वैदिक जिस तरह सफाई दे रहे हैं, उससे मुझे अनायास ही अमर सिंह की याद हो आई। तब भारतीय राजनीति में अमर सिंह का जलवा था। संजय दत्त , जया प्रदा व मनोज तिवारी के साथ एक के बाद एक नामी - गिरामी सितारे सम ...

आपने सुना है शिवमूर्ति को ...

आपने सुना है शिवमूर्ति को ...
बहुत कम ही लेखकों के साथ ऐसा होता है कि वे जितना अच्छा लिखते हैं, उतना ही अच्छा बोलते भी हैं। शिवमूर्ति ऐसे ही रचनाकार हैं। जो पढ़ने बैठिए तो लगता है
बहुत कम ही लेखकों के साथ ऐसा होता है कि वे जितना अच्छा लिखते हैं, उतना ही अच्छा बोलते भी हैं। शिवमूर्ति ऐसे ही रचनाकार हैं। जो पढ़ने बैठिए तो लगता है कि एक ही सांस में पूरा खत्म कर लें और जो सुनिए तो बस सुनते ही चले जाइए। उनका कहा रोचक भी होता है और विचारपूर्ण भी। किस्से-कहानी, लोकगीत-दोहा-चौपाई, कहावतें-मुहावरों का तो विपुल भण्डार है उनके पास । चुट ...

ज्यादातर न्यूज चैनल केवल तमाशाई ...

ज्यादातर न्यूज चैनल केवल तमाशाई  ...
अगर भारत जैसे देश में मीडिया कारोबार को पूरी तरह मुक्त कर दिया जाता है, तो क्रॉस मीडिया स्वामित्व पर कानूनी पहल, मीडिया में विविधता या न्यायपूर्ण
।। उर्मिलेश ।। अगर भारत जैसे देश में मीडिया कारोबार को पूरी तरह मुक्त कर दिया जाता है, तो क्रॉस मीडिया स्वामित्व पर कानूनी पहल, मीडिया में विविधता या न्यायपूर्ण व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा जैसे सवालों पर कौन नीति-निर्धारण करेगा? इन दिनों मीडिया से जुड़ा एक जरूरी सवाल गलत ढंग से उठाया जा रहा है. जब से नये सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने ...

Free media and good governance ...

Free media and good governance ...
A.S. PANNEERSELVAN । Any modern society strives to fulfil its own mandate and uses remembrance, memory and
A.S. PANNEERSELVAN । Any modern society strives to fulfil its own mandate and uses remembrance, memory and commemoration as an effective checklist. Last week marked two important milestones for freedom of expression and a major global initiative led by the United Nations Organisation. The 2014 PEN/Pinter Prize was awarded to Salman Rushdie. June 19 ...

गिरोह पत्रकारिता में सिसक रही है पत्रकारिता। ...

 गिरोह पत्रकारिता में सिसक रही है पत्रकारिता। ...
गिरोह पत्रकारिता में सिसक रही है पत्रकारिता। जितना बड़ा झूठा और दलाल उतना बड़ा पत्रकार। पहले के ज़माने में पत्रकारिता और पत्रकार की पहचान कंटेंट , जानकारी
गिरोह पत्रकारिता में सिसक रही है पत्रकारिता। जितना बड़ा झूठा और दलाल उतना बड़ा पत्रकार। पहले के ज़माने में पत्रकारिता और पत्रकार की पहचान कंटेंट , जानकारी ,विश्वश्नीयता , और ईमानदारी की वजह से होती थी लेकिन अब पत्रकारिता और पत्रकार की पहचान झूठ बोलने में महारथ , दलाली करने में पारंगत और मालिको को खुश रखने की कला से होती है। अगर इन गुणों के बाद थोड़ा ...

‘Our essential qualifications have changed… but a reporter’s life is mor ...

‘Our essential qualifications have changed… but a reporter’s life is mor ...
Editor-in-chief Shekhar Gupta writes a farewell note to ‘The Indian Express’ newsroom
I had promised to write specially to my fellow reporters. I am delivering on it now, sure enough, just before the deadline runs out. Which is so typical of us. I had said also that I shall write this note even at the risk of being accused of crass tribalism. But it isn’t just that. In our more vain moments — which assail a reporter’s mind of ...

दंभहीन और भारतीय संस्कृति के शांत प्रकोष्ठों को ढूंढ़नेवाले संपादक थे ना ...

दंभहीन और भारतीय संस्कृति के शांत प्रकोष्ठों को ढूंढ़नेवाले संपादक थे ना ...
।। अनुराग चतुर्वेदी।। नारायण दत्त जी दंभहीन और भारतीय संस्कृति के शांत प्रकोष्ठों को ढूंढ़नेवाले संपादक थे. उन्होंने ‘नवनीत’ को नैतिक पत्रिका बनाया और हिंदी
।। अनुराग चतुर्वेदी।। नारायण दत्त जी दंभहीन और भारतीय संस्कृति के शांत प्रकोष्ठों को ढूंढ़नेवाले संपादक थे. उन्होंने ‘नवनीत’ को नैतिक पत्रिका बनाया और हिंदी पत्रकारिता के लिए उच्च आदर्श स्थापित किये. वे शांत, सादगीपूर्ण, मृदुभाषी और आश्चर्यजनक रूप से सत्ता, प्रसिद्धि और चमक-दमक से दूर रहनेवाले व्यक्ति थे. उन्होंने ‘स्क्रीन’ जैसे फिल्मी साप्ताहिक से ...

मनीषी संपादक श्री नारायणदत्त के जाने से मन उदास है... ...

मनीषी संपादक श्री नारायणदत्त के जाने से मन उदास है... ...
मन बहुत उदास है। अचानक खबर मिली कि नए लेखकों को खोजने, उनकी कलम को तराशने और उन्हें आगे बढ़ाने वाले मनीषी संपादक श्री नारायणदत्त नहीं रहे। वह एक
मन बहुत उदास है। अचानक खबर मिली कि नए लेखकों को खोजने, उनकी कलम को तराशने और उन्हें आगे बढ़ाने वाले मनीषी संपादक श्री नारायणदत्त नहीं रहे। वह एक जून को चल बसे। वह उन महान संपादकों में से एक थे, जिन्होंने नवनीत डाइजेस्ट के संपादक के रूप में विभिन्न विषयों के लेखकों की नई पीढ़ियां तैयार कीं। उनकी कलम में भाषा के लालित्य, उसके अनुशासन और विषय क ...

क्या आपने प्रथम पृष्ठ पर डरे हुए हिंदुस्तान का घटिया संपादकीय पढ़ा ? ...

क्या आपने प्रथम पृष्ठ पर डरे हुए हिंदुस्तान का घटिया संपादकीय पढ़ा ? ...
हिंदुस्तान के आगरा और अलीगढ़ क्षेत्र से जुड़े संस्करणों में इस रविवार (01 जून, 2014) को एक डरे हुए और घटिया संपादकीय ने माह की शुरूआत ही
एक पत्रकार इस आर्टिकल से सहमत नहीं है पर आप सहमत हैं या नहीं पर जरूर कमेंट करिए ...देखिए..... हिंदुस्तान के आगरा और अलीगढ़ क्षेत्र से जुड़े संस्करणों में इस रविवार (01 जून, 2014) को एक डरे हुए और घटिया संपादकीय ने माह की शुरूआत ही बिगाड़ दी। 'बदले-बदले से सरकार नजर आते हैं' शीर्षक से प्रकाशित इस संपादकीय में यह बताने की कोशिश की गई है कि ...

नई राह तलाशती रफ्तार की पत्रकारिता ...

नई राह तलाशती रफ्तार की पत्रकारिता ...
मुकुल श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर, लखनऊ विश्वविद्यालय। खबरों को जो सबसे तेजी से लोगों तक पहुंचाता है, वही समाचारों की दुनिया का बादशाह होता है। अखबार,
मुकुल श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर, लखनऊ विश्वविद्यालय। खबरों को जो सबसे तेजी से लोगों तक पहुंचाता है, वही समाचारों की दुनिया का बादशाह होता है। अखबार, रेडियो और टीवी के बाद आज इंटरनेट तेजी का पर्याय बन चुका है, बल्कि इंटरनेट अब खबरों की दुनिया के एक ऐसे हिस्से को प्रभावित कर रहा है, जिसके बारे में आमतौर पर चर्चा कम ही होती है। आम तौर पर खबरों का ...

हिन्दी पत्रकारिता का संडे स्पेशल... ...

हिन्दी पत्रकारिता का संडे स्पेशल... ...
मनोज कुमार। संडे स्पेशल शीर्षक देखकर आपके मन में गुदगुदी होना स्वाभाविक है। संडे यानि इतवार और स्पेशल मतलब खास यानि इतवार के दिन कुछ खास और इस
मनोज कुमार। संडे स्पेशल शीर्षक देखकर आपके मन में गुदगुदी होना स्वाभाविक है। संडे यानि इतवार और स्पेशल मतलब खास यानि इतवार के दिन कुछ खास और इस खास से सीधा मतलब खाने से होता है लेकिन इन दिनों मीडिया में संडे स्पेशल का चलन शुरू हो गया है। संडे स्पेशल स्टोरी इस तरह प्रस्तुत की जाती है मानो पाठकों को खबर या रिपोर्ट पढऩे के लिये न देकर खाने के लिये कह र ...

Of paid news and underpaid newsmen ...

Of paid news and underpaid newsmen ...
The Statesman19 May 2014। When volumes of space are devoted to discussing the paid news menace, it is always forgotten that
The Statesman19 May 2014। When volumes of space are devoted to discussing the paid news menace, it is always forgotten that most media employees remain deprived of basic minimum facilities in northeast India. The paid news issue may create the impression that politicians are feeding the media groups, but the truth remains that employees never g ...

Unpaid media employees of India ...

Unpaid media employees of India ...
India’s highest court on April 9 ruled that journalists and non-journalists of newspapers and news agencies are
By NJ Thakuria India’s highest court on April 9 ruled that journalists and non-journalists of newspapers and news agencies are entitled to a pay hike under the recommendations of the Majithia Wage Board. Dismissing pleas by various owners seeking a review of its earlier judgment, the Supreme Court directed publishers to implement the recomm ...

सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या हुआ...दरकते ख्वाब ...

सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या हुआ...दरकते ख्वाब ...
-संजीव चौहान। सपने बड़े देखिये, जब सपने आंखों में पलेंगे तभी वे साकार होंगे। यह मेरा मानना है, जरुरी नहीं कि, मेरे मत से सब सहमत हों। बड़े सपने देखते वक्त, बस इसका
-संजीव चौहान। सपने बड़े देखिये, जब सपने आंखों में पलेंगे तभी वे साकार होंगे। यह मेरा मानना है, जरुरी नहीं कि, मेरे मत से सब सहमत हों। बड़े सपने देखते वक्त, बस इसका ख्याल जरुर रखिये कि, ख्वाबों के टूटने पर, आपमें उन्हें दुबारा देखने का माद्दा शेष बचता है या नहीं। अगर आप टूटे/ बिखरे ख्वाबों को दुबारा जोड़कर उन्हें सजाने की कलाकारी नहीं जानते हैं, तो ...

दहेज लोभियों के कारण गई वरिष्ठ पत्रकार की बेटी की जान ...

दहेज लोभियों के कारण गई वरिष्ठ पत्रकार की बेटी की जान ...
ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के कृष्णा नगर इलाके में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार की इकलौती बेटी ने फांसी लगाकरी खुदकुशी कर ली। मृतक लड़की का नाम रवीना शर्मा उर्फ दामिनी (20) के रूप में हुई।
ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के कृष्णा नगर इलाके में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार की इकलौती बेटी ने फांसी लगाकरी खुदकुशी कर ली। मृतक लड़की का नाम रवीना शर्मा उर्फ दामिनी (20) के रूप में हुई। पुलिस को कमरे से सूइसाइड नोट भी मिला है। नोट में लड़की ने अपने पैरेंटस से माफी मांगी है। आरोप है कि वह जिस लड़के से प्यार करती थी उसके परिवार वालों ने शादी में होंडा सिटी कार ...

पेड न्यूज के चलन से मीडिया की विश्वसनीयता खतरे में ...

पेड न्यूज के चलन से मीडिया की विश्वसनीयता खतरे में ...
सोलहवीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव की कवरेज के लिए मीडिया खुलकर मैदान में आ गया है। इस कवरेज के तहत विभिन्न दलों के चुनाव प्रचार के अलावा उनके
सोलहवीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव की कवरेज के लिए मीडिया खुलकर मैदान में आ गया है। इस कवरेज के तहत विभिन्न दलों के चुनाव प्रचार के अलावा उनके बीच आरोप-प्रत्यारोप संबंधी खबरों को प्रमुखता से पेश किया जा रहा है। अनेक प्रमुख प्रत्याशियों के राजनीतिक जीवन के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। यह सब कुछ इस कदर हो रहा है कि चारों ओर बस चुनाव की ही चर् ...

मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल ...

मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल  ...
मीडिया की विश्वसनीयता पर तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। एक आम मतदाता (नागरिक) को भी लगने लगा है कि मीडिया बैलेंस नहीं है। कई तार्किक सवाल भी
मीडिया की विश्वसनीयता पर तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। एक आम मतदाता (नागरिक) को भी लगने लगा है कि मीडिया बैलेंस नहीं है। कई तार्किक सवाल भी किए जाने लगे हैं। ये सारे सवाल एक तरह से मीडिया की विश्वसनीयता को लेकर हो रहे हैं। कतिपय सवालों में अतिरेक हो सकता है मगर सारे सवाल निरर्थक नहीं है। आम मतदाताओं की सोच में जो पार्टी या उम्मीदवार कहीं दिख भ ...
Latest News Country's richest woman Savitri Jindal loses in Haryana polls मुकेश राजपूत पहुंचे ईटीवी, बने डिप्टी एडिटर एनडीटीवी ने खोले जाब के दरवाजे यूपी में सूचना आयोग में भाई-भतीजावाद रोकने की मांग फ्लिपकार्ट ने 300 करोड़ रुपये सालाना किराए पर लिया ऑफिस बरेली में अमर उजाला दिवाली कार्निवल में एक और रिकॉर्ड रजत शर्मा का मोदी सरकार में प्रवेश, राज्यसभा का रास्ता साफ जी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा पर चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप, केस दर्ज एचटी मीडिया की दूसरी तिमाही का शुद्ध लाभ 24.56 फीसदी घटा आजम खां के खिलाफ खबर चलाने पर सपाइयों ने फूंका चैनल का पुतला रवि बने न्यूज एक्सप्रेस में क्राइम और एसआईटी हेड दैनिक भास्कर में मिला दीवाली बोनस, अकाउंट में पहुंचा 90% employees at Kasturi and Sons fall under the purview of the wage board अमर उजाला, गोरखपुर से वेदरत्न शुक्ला का इस्तीफा जबलपुर में डाक्टरों ने पत्रकार प्रतीक अवस्थी को पीटा दैनिक भास्कर की कंपनी डीबी कॉर्प ने तीन महीने में कमाए 68 करोड़ पुन्हाना के पत्रकार मनीष आहूजा पर हमला दैनिक जागरण, नोएडा का एक रिपोर्टर संपादक के नाम पर मांग रहा है दीपावली गिफ्ट! लोकमत ने भी लागू किया मजीठिया पर दिया चौथे, पांचवे और छठे ग्रेड का वेतनमान हार्टअटैक से समस्तीपुर के पत्रकार विजय वर्मा का निधन म्यांमार में मीडिया ग्रुप के मालिक, प्रकाशक और 3 पत्रकारों को 2 साल की कैद वाह रे सहारा, इंटरव्यू दिया उपसंपादक का बना दिया मुख्य उपसंपादक कैनविज टाइम्स दो एडिशन लांच करने के साथ ही लेकर आएगा दो नए चैनल स्मिता भी आईबीएन के घराने से गईं, हेडलाइंस टुडे के साथ जुड़ी इंडिया टीवी ने आजतक को दी पटकनी Dainik Jagran is guilty of the contempt of the Apex Court: IFWJ पुष्प सवेरा समूह ने 40 करोड़ ब्लैकमनी को व्हाइट किया एनडीटीवी पर ऐसे उठा मजीठिया का मामला Why CNN-IBN was unhappy with anchor Bhupendra Chaubey इस चैनल में तीन उद्योगपति लगा रहे हैं पैसा आस्ट्रेलियाई चैनल-10 ने माफी मांगी मीडियाकर्मी पर हमले में कार्रवाई नहीं होने पर लोगों ने लगाया चक्काजाम आजमखां मामले में चैनल के संपादक और मालिक पर मानहानि का केस दर्ज फारवर्ड प्रेस के आयवन कोस्का और प्रमोद रंजन को मिली अग्रिम जमानत हर्यंश्व सिंह बिजनौर से डेस्क पर आए, सर्वेंद्र नए ब्यूरो चीफ हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड का मुनाफा 26 फीसदी बढ़ा पुष्प सवेरा को प्रकाशित करने वाली कंपनी पुष्पांजलि समूह पर आयकर छापा चला गया संतोष का आनंद दैनिक जागरण का जीएम कहता है ‘हरामजादा’ गाली नहीं मजीठिया की लड़ाई की आग अन्य अखबारों को भी जलाएगी मजीठिया मामले में मालिकों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस 28 अक्टूबर से पहले डा. चन्देश्वर यादव अवधनामा 2014 सम्मान से नवाजे गए मोदीनामा लिखने गुजरात गए काशी के पत्रकारों में मुन्नाभाई भी अमर उजाला मेरठ में अच्छाई पर बुराई की जीत लिखने पर कई पर गाज रेत खनन बना बागपत के पत्रकारों की कमाई का जरिया सारधा मामले में रोजवैली के एमडी व तारा टीवी के मालिक तलब संघी पिता के पुत्री सीमा गुप्ता को मिली लोकसभा टीवी की कमान, सीईओ कम एडिटर इन चीफ बनीं भास्कर रिपोर्टर पर हमला, किडनैप कर हिमाचल ले जाने की कोशिश वरिष्ठ पत्रकार नाफे किदवाई नहीं रहे, उपजा ने दी श्रद्धांजलि बड़ा मुश्किल है पत्रकारिता में फ्रीलांसिंग करना